अमृत तुल्य दूध के गुण है हजार

विश्व दुग्ध दिवस- 1 जून

बाल मुकुन्द ओझा

दुनिया भर में एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। दूध हमारे खानपान का एक मुख्य आहार है। हर उम्र के लोगों के लिए अमृत समान है दूध। प्रथम विश्व दुग्ध दिवस 1 जून, 2001 को मनाया गया था। इस वर्ष का विषय एन्जॉय डेयरी रखा गया है। यह विषय जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने और पृथ्वी पर डेयरी क्षेत्र के प्रभाव को कम करने में मदद करने के लिए पहले से ही किए जा रहे काम को उजागर करेगा।विश्व दुग्ध दिवस देश और दुनिया में एक जून को मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। इसे मनाने का उद्देश्य दुग्ध का जन-जन तक प्रचार-प्रसार करना और लोगों को जागरूक करना है।

दुग्ध उद्योग, कृषि की एक श्रेणी है। हमारी आधी से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है तथा 60 प्रतिशत लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब 7 करोड़ कृषक परिवार में प्रत्येक दो ग्रामीण घरों में से एक डेरी उद्योग से जुड़े हैं। भारतीय दुग्ध उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार देश में 70 प्रतिशत दूध की आपूर्ति छोटे सीमांत भूमिहीन किसानों से होती है। भारत की ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में डेरी-उद्योग की प्रमुख भूमिका है।

हमारे देश में डेयरी फार्मिंग आज एक अत्यंत लाभदायक उद्योग के रूप में स्थापित हो चुका है। देश में दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बहुतायत के साथ घर घर में है। डेयरी फार्मिंग कृषि और पशुपालन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसके तहत दूध और इससे बनी चीजों का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए गाय, भैंस और बकरी और ऊंट जैसे पशुओं को पाला जाता है। डेयरी उद्योग में दूध, मक्खन, चीज, घी, कण्डेंस्ड मिल्क, पावडर, मिल्क, दही, पनीर, छाछ, जैसे कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं। हमारे देश में दूध और दूध उत्पादों का एक बड़ा बाजार है। विशेषज्ञों के मुताबिक दूध और डेयरी उत्पादों के सेवन से कई पुरानी व गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान दूध के हल्के सेवन और बच्चों के जन्म के समय के वजन, लंबाई और हड्डी में खनिज सामग्री के बीच एक सकारात्मक संबंध होता है।
सर्दी हो या गर्मी दूध स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक और संपूर्ण आहार है। यह किसी अमृत से कम नहीं है। दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व इसे एक संपूर्ण आहार बनाते हैं। इंटरनेशनल डेयरी जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग रोजाना कम से कम एक ग्लास दूध पीते हैं वे हमेशा मानसिक और बौद्धिक तौर पर बेहतर स्थिति में होते हैं। शाकाहारी हो या मांसाहारी, बच्चा हो या बुर्जुग सभी वर्ग के लोग दूध सेवन कर सकते हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अनुसार गाय का दूध और उससे बनी चीजें, जैसे पनीर, दही, मक्खन बड़ी मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन प्रदान करते हैं, जो संतुलित आहार के लिए जरूरी हैं। कैल्शियम और प्रोटीन के अलावा दूध में कई तरह के विटामिन पाए जाते हैं। यह विटामिन ए और डी का बेहतर स्रोत है। आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध सबसे अधिक पौष्टिक होता है। दूध आपकी भूख को शांत कर आपको मोटापे से भी छुटकारा दिलाने में बहुत सहायक होता है। दूध अपने आप में एक सम्पूर्ण आहार है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और दिमाग तेज होता है इसीलिए घर के बड़े बुजुर्ग से लेकर डॉक्टर्स तक रोजाना दूध पीने की सलाह देते हैं
भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था क्योंकि यहाँ दूध दही की नदिया बहती थी। दूध हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का जतन रखता है और सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व पहुंचाता है जिसमें कैल्शियम, मैगनिशियम, जिंक, फॉसफोरस, ऑयोडीन, आइरन, पोटेशियम, फोलेट्स, विटामिन ए, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी12, प्रोटीन, स्वस्थ फैट आदि शामिल है। ये बहुत ही ऊर्जायुक्त आहार होता है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराता है क्योंकि इसमें उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन सहित आवश्यक और गैर-आवश्यक अमीनो एसिड और फैटी एसिड मौजूद होता है। भारत का विश्व दुग्ध उत्पादन में 18 प्रतिशत हिस्सा है। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कृषि के बाद डेयरी उद्योग की प्रमुख भूमिका है। भारत में कुल दूध का यहां 17 प्रतिशत से भी ज्यादा उत्पादन किया जाता है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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