भूखे पेट सोने वालों की संख्या में कमी नहीं आई

ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर आधारित

बाल मुकुन्द ओझा

दुनियां से जब तक अमीरी और गरीबी की खाई नहीं मिटेगी तब तक भूख के खिलाफ संघर्ष यूँ ही जारी रहेगा। चाहे जितना चेतना और जागरूकता के गीत गालों कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। अब तो यह मानने वालों की तादाद कम नहीं है कि जब तक धरती और आसमान रहेगा तब तक आदमजात अमीरी और गरीबी नामक दो वर्गों में बंटा रहेगा। शोषक और शोषित की परिभाषा समय के साथ बदलती रहेगी मगर भूख और गरीबी का तांडव कायम रहेगा। अमीरी और गरीबी का अंतर कम जरूर होसकता है मगर इसके लिए हमें अपनी मानसिकता बदलनी पड़ेगी। प्रत्येक संपन्न देश और व्यक्ति को संकल्पबद्धता के साथ गरीब की रोजी और रोटी का माकूल प्रबंध करना होगा।

कोरोना महामारी ने देश और दुनिया में अमीरों की संख्या बढ़ाने के साथ गरीबों पर निर्मम प्रहार किया जिसके फलस्वरूप कुछ लोगों के लिए यह महामारी वरदान बनी वहीं लाखों लोग गरीबी के गर्त में फंस गए। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सोमवार को दावोस में आयोजित वार्षिक बैठक में गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने प्रॉफिटिंग फ्रॉम पैन यानि की ‘पीड़ा से लाभ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया है कि कोरोना महामारी के दौरान दुनियाभर में हर 30 घंटे में एक नया अरबपति बना है वहीं यह संभावना जताई कि इसी रफ्तार में 2022 में 10 लाख लोग गरीबी की गर्त में जा सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि महामारी के दौरान 573 नए अरबपति बने हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष दुनियाभर में 263 मिलियन लोग अत्यधिक गरीबी में जा सकते हैं। बढ़ती असमानता और खाद्य कीमतों में तेजी से हुई वृद्धि गरीबी का मुख्य कारण हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के शुरुआती दो वर्षों में अरबपतियों की जितनी आमदनी बढ़ी है वह पिछले 23 सालों के मुकाबले ज्यादा है। दुनिया के अरबपतियों की कुल संपत्ति अब वैश्विक जीडीपी के 13.9 प्रतिशत के बराबर है।

भारत की बात करें तो आजादी के 75 वर्षों के बाद भी हमारा देश अमीरी और गरीबी का खेल खेल रहा है यह हमारे लिए दुर्भाग्यजनक है। देश में अमीरी और गरीबी के हालात पर गौर करें तो पाएंगे अमीर दिन प्रति दिन अमीर होता जा रहा है और गरीब की गरीबी लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस बात को हमने अक्सर सुना है लेकिन ये सच साबित होती दिख रही है। देश में अमीर-गरीब के बीच खाई बढ़ती ही जा रही हैं। इससे लगता हैं कि केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी इसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं आई है।
भारत की गरीबी आज भी आंकड़ों के भ्रम जाल में उलझी हुई है। आजादी के 75 सालों के बाद भारत में गरीब और गरीबी पर लगातार अध्ययन और खुलासा हो रहा है। इसका मतलब है सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी देश में गरीबी कम होने का नाम नहीं ले रही है। आज भी हमारा देश अमीरी और गरीबी का खेल खेल रहा है यह हमारे लिए दुर्भाग्यजनक है। देश में अमीरी और गरीबी के हालात पर गौर करें तो पाएंगे अमीर दिन प्रति दिन अमीर होता जा रहा है और गरीब की गरीबी लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस बात को हमने अक्सर सुना है लेकिन ये सच साबित होती दिख रही है। देश में अमीर-गरीब के बीच खाई बढ़ती ही जा रही हैं। इससे लगता हैं कि केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी इसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं आई है। भारत में आर्थिक विकास का लाभ कुछ ही लोगों को मिल रहा है। यह चिंता की बात है। अरबपति की संख्या में बढ़ोत्तरी संपन्न अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है। यह असफल आर्थिक व्यवस्था का एक लक्षण है। अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ता विभाजन लोकतंत्र को कमजोर करता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
कुछ अन्य आर्थिक सर्वेक्षणों में मोदी राज में भारत में गरीबी घटने की बात कही गयी थी तो हाल ही आये कुछ सर्वेक्षणों में गरीबी बढ़ती बताई जा रही है। कुल मिलकर देखा जाये तो देश की गरीबी आंकड़ों के मायाजाल में फंसी दिखाई दे रही है। मगर यह अवश्य कहा जा सकता है कि पिछले एक दशक में गरीबी उन्मूलन के प्रयास जरूर सिरे चढ़े है। सरकारी स्तर पर यदि ईमानदारी से प्रयास किये जाये और जनधन का दुरूपयोग नहीं हो तो भारत शीघ्र गरीबी के अभिशाप से मुक्त हो सकता है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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