महंगाई पर नहीं लगेगी लगाम

बाल मुकुन्द ओझा

देशभर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा महंगाई को लेकर हो रही है। गावं गुवाड़ से लेकर चौक चौराहों पर लोग महंगाई को लेकर बतियाते मिल जायेंगे। लगता है महंगाई पर फ़िलहाल लगाम नहीं लगेगी। अप्रैल महीने में होलसेल महंगाई 9 सालों के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची। देश के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल 2022 महीने में महंगाई दर बढ़ने की मुख्य वजह पेट्रोलियम नैचुरल गैस, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल्स की कीमतों में  तेजी है।यह रूस यूक्रेन युद्ध के कारण ग्लोबल  सप्लाई चेन मे पड़े व्यवधान से बढ़ी है।

खाने-पीने की चीजों, पेट्रोल-डीजल और अन्य उपयोगी वस्तुओं के दाम बढ़ने से होमसेल महंगाई दर 15 फीसदी के पार जा पहुंचा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार खाने-पीने की चीजों और ईंधन के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ रही है। रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें अप्रैल माह में तेजी से बढ़ी जिसके कारण खाने के सामान की महंगाई 8.35 प्रतिशत रही। तेल और बिजली में 38.66 प्रतिशत की महंगाई दर रही जबकि मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 10.85 और तिलहनों की 16.10 फीसदी रही। पेट्रोल डीज़ल खाध तेलों और सब्जियों के साथ साधारण सफेदा आम भी सौ रुपया किलो पर ठहरा हुआ है।
कहा जाता है महंगाई पर किसी का बस नहीं है। महंगाई ने किसी के सिर पर ताज़पोशी की तो किसी के सिर से ताज़ उखाड़ दिया। सब जानते है महंगाई बढ़ने के कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कारण होते है। विभिन्न जीविनोपयोगी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई विशेष कारण भी हैं। इसमें वैश्विक पूंजी बाजार, वैश्विक स्तर पर जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी, सकल घरेलू उत्पाद में उच्च वृद्धि के कारण घरेलू मांग में उछाल और खराब मानसून के कारण फसलों में हुआ नुकसान मुख्य कारणों के तौर पर शामिल किया जाता हैं। इसके बावजूद महंगाई का हमने राजनीतिकरण कर दिया है और इसका खामियाज़ा जनता को उठाना पड़ता है। दूसरी तरफ महंगाई को लेकर कांग्रेस और भाजपा में घमासान शुरू हो गया है।
खाध तेलों में पहले से ही आग लगी है। फरवरी में 140 से 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा सोयाबीन तेल के दाम वर्तमान में 170 रुपये प्रति किलो हो गए है। वहीं मूंगफली और सरसों के तेल में भी महंगाई की आग लगी हुई है। महंगाई की मार ने आम जनता को घेर लिया है। रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इस महाजंग के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चुनाव के दौरान मतदाताओं में महंगाई मुद्दा न बने इसके चलते तेल कंपनियों ने सरकार के दबाव में दाम नहीं बढ़ाए थे। इससे पूर्व मार्च माह की शुरुआत अमूल दूध के दाम में इजाफे से शुरू हुई वहीं पेट्रोलियम कंपनियों ने कमर्शियल और घरेलु एलपीजी सिलेंडर का दाम बढ़ा कर लोगों को महंगाई के तड़के का स्वाद चखा दिया। पेट्रोल और डीजल के बाद अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) भी महंगी हो गई है। वहीँ सरकार का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से अब क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढे है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है।
लगता है महंगाई मोदी सरकार के गले का फांस बन गयी है। चुनावों और जंग से पूर्व भी सरकार की लाख चेष्टा के बाद भी महंगाई पर काबू नहीं पाया जा सका । महंगाई ने जनता जनार्दन को दिन में तारे दिखा दिए है। भारत की राजसत्ता दूसरी बार सँभालने के बाद भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महंगाई से दो दो हाथ करने पड़ रहे है। जन साधारण को फिलहाल महंगाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। हालाँकि भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक लगाम लगाने में मोदी सरकार कामयाब रही है। मगर महंगाई के मोर्चे पर सरकार को आम आदमी के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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