संग्रहालय कराता है पृथ्वी मानव और पर्यावरण का दिग्दर्शन

बाल मुकुंद ओझा

 

अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हर साल 18 मई को मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को संग्रहालय और धरोहरों के प्रति जागरूक करना है। संग्रहालय या म्यूजियम एक ऐसा संस्थान है है जो समाज की सेवा और विकास के लिए जनसामान्य के लिए खोला जाता है। इसमें पृथ्वी, मानव और पर्यावरण की विरासतों के संरक्षण के लिए उनका संग्रह, शोध, प्रचार या प्रदर्शन किया जाता है जिसका उपयोग शिक्षा, अध्ययन और मनोरंजन के लिए होता है। संग्रहालय की समाज के विकास में अहम भूमिका हैए क्योंकि संग्रहालय में ही हमारे इतिहास के दर्शन होते हैं।

आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में 18 मई अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय संग्रहालय ;नई दिल्लीद्ध, राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय ;नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरुद्ध, इलाहाबाद संग्रहालय ;प्रयागराज, भारतीय संग्रहालय ;कोलकाता, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल ;कोलकाता, सालार जंग संग्रहालय ;हैदराबाद और साइंस सिटी और राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद ;भारत भर में 24 स्थानों परद्ध के अंतर्गत आने वाले केंद्र इस पूरे सप्ताह में अनेक कार्यक्रमों के जरिये लोगों को संग्रहालयों की महत्ता से अवगत करने के लिए विशेष पहल कर रहे हैं।
ऐसा ही एक अनूठा और नायब संग्रहालय देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री संग्रहालय के नाम से बनाया गया है। यह संग्रहालय में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित है। संभवत: यह देश और दुनिया का एक मात्र संग्रहालय है जो आजादी के बाद के भारत के 75 साल के सुनहरे सफर की कहानी सुनाता है। प्रधानमंत्री संग्रहालय में देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यों का प्रदर्शन होगा।

यह संग्रहालय स्वतंत्रता के बाद देश के प्रधानमंत्रियों के जीवन और उनके योगदान के माध्यम से लिखी गई भारत की गाथा का वर्णन करता है। भारत के संविधान को भी प्रधानमंत्री संग्रहालय में जगह दी गई है। संग्रहालय में देश के 14 पूर्व प्रधानमंत्रियों के जीवन की झलक के साथ.साथ राष्ट्रनिर्माण में उनका योगदान दर्शाया गया है। संग्रहालय का मकसद नई पीढ़ी को पहले के प्रधानमंत्रियों की जीवनशैली और उनके कार्यों से परिचय कराना हैण् इसके जरिए प्रधानमंत्रियों के उन कार्यों के बारे में जानकारी दी गई है जिन्होंने देश के विकास में अहम भूमिका निभाई है। संग्रहालय में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सहित गुलजारी लाल नंदाए लाल बहादुर शास्त्रीएइंदिरा गांधीए मोरारजी देसाईए चौधरी चरण सिंहएराजीव गांधीए विश्वनाथ प्रताप सिंहए चंद्रशेखरए नरसिंह रावए अटल बिहारी वाजपेयीए एचडी देवगौडाए इंद्रकुमार गुजरालए मनमोहन सिंह को शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री संग्रहालय को तीन मूर्ति भवन में बनाया गया है। पहले इसे नेहरू संग्रहालय भवन के नाम से जाना जाता था।
इस संग्रहालय की लागत करीब 271 करोड़ रुपये आई है। इसे 2018 में मंजूरी मिली थी और चार साल के भीतर ये बनकर तैयार हो गया। इसका निर्माण 15ए600 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में हुआ है। इस म्यूजियम में 43 गैलरी है और करीब 4 हजार लोगों के एक साथ घूमने की व्यवस्था है। संग्रहालय भवन की डिजाइन उभरते भारत की कहानी से प्रेरित है। इसे नेताओं के हाथों का आकार दिया गया है। डिजाइन में टिकाऊ और ऊर्जा संरक्षण के इंतजाम किए गए हैं।
संग्रहालय में भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान के निर्माण तक की कहानी बहुत ही रोचक ढंग से प्रदर्शित की गई है। संग्रहालय में यह भी दिखाया गया है हमारे प्रधानमंत्रियों ने किस प्रकार विभिन्न चुनौतियों से देश को उबारा और देश की चौतरफा प्रगति सुनिश्चित की। संग्रहालय का हर कोना देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत है। दर्शक अपने पसंदीदा प्रधानमंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाने के साथ ही वीडियो भी बनवा सकते हैं। यहां पर पोखरण परमाणु परीक्षण को एलईडी स्क्रीन पर देखना और झटकों को महसूस करना दर्शकों के लिए रोमांचक होगा।
प्रधानमंत्री संग्रहालय में युवाओं को सूचना आसान और रोचक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी.आधारित संचार सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। होलोग्राम, वर्चुअल रिएलिटी, ऑग्मेंटिड रिएलिटी, मल्टी टच, मल्टीमीडिया, इंट्रेक्ट्विक कियोस्क, कंप्यूटराइज काइनेटिक स्कल्पचर, स्मार्टफोन एप्लीकेशन, इंट्रेक्टिव स्क्रीन जैसी टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस संग्रहालय को सजीव बनाया गया है। संग्रहालय में महत्वपूर्ण पत्राचारए कुछ व्यक्तिगत वस्तुओंए उपहार और यादगार वस्तुएंए सम्मानए पदकए स्मारक टिकटए सिक्के आदि भी प्रदर्शित किए गए हैं। दूरदर्शनए फिल्म डिवीजन, संसद टीवी, रक्षा मंत्रालयए मीडिया हाउस, भारतीय और विदेशी प्रिंट मीडियाए विदेशी समाचार एजेंसियोंए विदेश मंत्रालय आदि संस्थानों के माध्यम से जानकारी एकत्र की गई।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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