कोरोना के दुष्परिणाम – स्कूली बच्चे हुए मोटापे के शिकार

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना के बाद स्कूल जा रहे बच्चे कई तरह की शारीरिक समस्याओं की गिरफ्त में हैं। इस दौरान गलत खानपान और बदलती हुई जीवनशैली के चलते ज्यादातर बच्चे मोटापे का शिकार हो गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार स्कूली बच्चे आपस में इसी बहस में उलझ कर एक दूसरे पर टिप्पणियां और छींटाकशी करने से नहीं चूक रहे है। कोरोना काल में घर में रहने पर बच्चों के वजन बढ़ गए हैं। इसलिए स्कूल जाने के बाद उनके दोस्त उनपर कमेंट कर दे रहे हैं। बच्चे दोस्तों की छींटाकशी से परेशान हैं। सीबीएसई के मनोदर्पण पोर्टल पर कक्षा छह से 12 तक के छात्रों की ऐसी कई शिकायतें आ चुकी हैं।
कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर हमला किया है। दो साल तक स्कूलों की आंख मिचौली के दुष्परिणाम मोटापे और अन्य व्याधियों के रूप में अब हमारे सामने आ रहे है। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए स्कूल बंद कर दिए गए थे । शारीरिक गतिविधियां न होने के चलते बच्चों में मोटापा का असर देखने को मिला है। बच्चे घर के अंदर होने उनका पेट बाहर निकल रहा है। हालाँकि स्कूलों को खोल दिया गया है पठन पाठन का कार्य सुचारु हो गया है। मगर अभिभावक अभी भी डरे सहमे से अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे है। कोरोना का डर अभी भी मंडरा रहा है। ऑनलाइन क्लास के दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों की आंखों में ड्राइनेस बढ़ने के साथ मोटापे का भी शिकार हुए हैं। हर तीसरा बच्चा इन बीमारियों से प्रभावित हो रहा है। मोबाइल और कंप्यूटर से जूझ रहे बच्चों की आंखों में ड्राइनेस की समस्या सामने आई है। बच्चों में मोटापा घर कर गया है। मोबाइल एडिक्शन तो कई गुना तक बढ़ चुका है।

कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर हमला किया है। दो साल तक स्कूलों की आंख मिचौली के दुष्परिणाम मोटापे और अन्य व्याधियों के रूप में अब हमारे सामने आ रहे है। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए स्कूल बंद कर दिए गए थे । शारीरिक गतिविधियां न होने के चलते बच्चों में मोटापा का असर देखने को मिला है।

स्कूली बच्चों को लेकर तरह तरह की ख़बरों के बीच जीवन शैली में हो रहे परिवर्तन और शारीरिक कसरत से दूर होने के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना महामारी ने पिछले दो साल से बच्चों को घरों में कैद कर रखा । स्कूलों पर ताले जड़े होने से बैठे ठाले बच्चे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के शिकार होकर अनेक अनचाही बीमारियों के शिकार हो गए । इनमें मोटापा सबसे प्रमुख है। बढ़ता मोटापा बच्चों में न केवल डायबीटीजए हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को आमंत्रण दे रहा हैए बल्कि उनके करियर और सोशल लाइफ में भी मुसीबत बन रहा है। बच्चों के बदलते रहन सहन से उनके स्वास्थ्य पर कई प्रकार के खतरे मंडराने लगे है। अब मोबाइलएवीडियो गेमएटीवी आदि ने जैसे बच्चों को अपने आगोश में ले लिया है। कम उम्र में मोटापा बहुत ही जल्दी बच्चों में डायबीटीज और हार्ट से संबंधित कई घातक बीमारियों को जन्म दे सकता है। टीन एज एक ऐसी अवस्था है जिसमें बच्चों के शरीर को संवारा जा सकता है। इस उम्र में जरा सी भी लापरवाही बच्चे की पूरी जिंदगी पर असर डाल सकती है। माता पिता और अभिभावकों की अनदेखी से बच्चों का भविष्य बजाय सुधरने के बिगड़ने की और अधिक बढ़ रहा है। जिसका खामियाजा अन्ततोगत्वा देश को ही भुगतने पड़ेगा।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोजाना दो घंटे से ज्यादा टीवी देखने पर बच्चों में हाई बीपी का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। जॉर्जिया यूनिवर्सिटी ;स्पेनद्ध और साओ पाउलो ;ब्राजीलद्ध के रिसर्चर्स ने पाया कि लगातार टीवी देखने की आदत हाई बीपी की आशंकाओं को और भी बढ़ा सकती है। दो साल के आंकड़ों पर आधारित इस सर्वे में 2 साल से 10 साल के 5ए221 बच्चों को शामिल किया गया। इंटरनैशनल जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इसके नतीजे दर्शाते हैं कि दो साल की स्टडी के दौरान 1000 बच्चों में से 110 बच्चों में हाई बीपी की समस्या पाई गई। हाई बीपी जीवन में कभी न कभी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। रिसर्च ने कहाए ये आंकड़े सभी के लिए चौंकाने वाले हैं। सर्वे के नतीजे यह भी दर्शाते हैं कि कुछ बच्चों में जहां दिक्कतें कुछ ही समय में शुरू हो जाती हैं वहीं कुछ को काफी देर में नुकसान का पता चलता है। एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया कि बच्चों को रोज कम से कम एक घंटा शारीरिक श्रम की आदत जरूर डालें। इतना ही नहीं एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा कि अगर रोज 60 मिनट फिजिकल एक्टिविटी नहीं की गई तो इससे हाई बीपी की समस्या 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)

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