जिसके पास मां है वह किस्मत वाला है

बाल मुकुन्द ओझा

मातृ दिवस प्रत्येक वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस साल मातृ दिवस 8 मई को मनाया जाएगा। मां को खुशियाँ और सम्मान देने के लिए पूरी जिंदगी भी कम होती है। फिर भी विश्व में मां के सम्मान में मातृ दिवस मनाया जाता है। माँ अपना पूरा जीवन अपने बच्चों की देखभाल में लगा देती है चाहें उसके लिए उसे कठोर दुख भी क्यों ना सहना पड़े। ममता ही प्यार की शुरुवात और अंत है। माँए भगवान का दूसरा नाम है । मां का दर्द उन्हें महसूस होता है जिनके पास मां नहीं होती है। हमलोग बड़ी.बड़ी गलती कर देते हैए लेकिन वो क्षमा कर देती है। बेटा उसे घर से भी भगा देते है तो भी वह उसे माफ कर देती है। मां के चरणो में जन्नत है। जिसके पास मां है वह किस्मत वाला है।
हमारे देश में मां को अपने ही घर में प्रताड़ित होने के समाचार निश्चय ही दिल दहलाने वाले है। आश्चर्य की बात तो यह है इन्हें प्रताड़ित करने वाले कोई दूसरे नहीं अपने ही है। जिस माँ के आधा दर्जन बेटे है वे वृद्ध मां को अपने साथ नहीं रखना चाहते। मां अपनी बची खुची जिंदगी बिना . विघ्न बाधा परिवारजनों के साथ काटना चाहते है। जिन बच्चों ने मां की अनदेखी की हैए वो भी याद रखे कि बुढ़ापा उनको भी आएगा। आज जिस मां को वे प्रताड़ित कर रहे है कल उनकी भी यही दशा होने वाली है। आज जमाना बदला है। माँ के वृद्ध होते ही परिवार में उसका सम्मान घट जाता है। बुजुर्ग महिला असम्मान की शिकार हो जाती है। माँ शब्द के विचार बदल जाते है जिस जननी ने हमें जिम्मेदार नागरिक बनाया आज जरूरत इस बात की है कि उसका खोया मान सम्मान बहाल हो। माँ कभी विचारों से वृद्ध नहीं होती। माँ के सार संभाल की आवश्यकता है। आज ऐसे भी बेटे है जिनको मां नहीं सिर्फ उनकी संपत्ति चाहिए और दूसरे वो जिनके लिए उनके माता पिता किसी भी चीज से ज्यादा बड़े हैं जिन्हें संपत्ति नहींए सिर्फ मां बाप चाहिए।
मातृ दिवस मनाने का मूल उद्देश्य समस्त माताओं को सम्मान देना और एक शिशु के उत्थान में उनकी महान भूमिका को सलाम करना है। कोरोना महामारी के दौरान बहुत से लोगों को मां और परिवार की अहमियत का पता चला। कुछ ने इस अहमियत को समझा और कुछ समझ कर भी अनजान बनने का ढोंग करने लगे। इस संकट काल में कहीं पारिवारिक रिश्ते खंडित होते दिखे तो कहीं रिश्तों में मजबूती देखी गई । कोरोना काल में मां के कई रूप देखने को मिले। मीडिया में आने वाली खबरों के मुताबिक अपने बच्चों की जान बचाने के लिए मां अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार हुई । अपने संक्रमित बच्चों को मां ही है जो अकेले छोड़ने को तैयार नहीं थी । अपनी जान की परवाह न कर मां खुद बच्चों के साथ अस्पतालों में रहने के लिए जिद्दोजहद करती दिखाई दी ।
भारत में आदिकाल से माँ को पूजा जाता है। सम्पूर्ण परिवार के लिए माँ वंदनीय होती है। शिशु के लालन पालन से लेकर बालिग होने तक माँ अपनी पूरी शक्ति लगा देती है। माँ का प्यार और दुलार शिशु को ताउम्र मिलता है। किसी संतान के लिए माँ शब्द का मतलब सिर्फ पुकारने या फिर संबोधित करने से ही नहीं होता बल्कि उसके लिए मां शब्द में ही सारी दुनिया बसती है। दूसरी ओर संतान की खुशी और उसका सुख ही माँ के लिए उसका संसार होता है। मां शब्द में प्यारए दुलारए आत्मीयता एवं मिठास छिपी हुई होती है जो अन्य शब्दों में देखने नहीं मिलती। माँ एक देवी की तरह होती है जो अपने बच्चों से कुछ भी वापस नहीं पाना चाहती है। वो अपने बच्चों को केवल जिम्मेदार कर्तव्यनिष्ट और अच्छा इंसान बनाना चाहती हैं। हमारी माँ हमारे लिये प्रेरणादायक और पथप्रदर्शक शक्ति के रुप में है जो हमें हमेशा आगे बढ़ने में और किसी भी समस्या से उभरने में मदद देती है। हमारी माँए पूरा दिन हमारा ख्याल रखती है। हमारी एक.एक सुविधा.असुविधा का हल उसके पास होता है। हमारी कोई भी परेशानी उनके पास छुपी नहीं रहती। माँ का प्यार बेटे के लिए अक्षुण्ण रहता हैए मातृ दिवस की सार्थकता इसी में है कि हम माँ को दुनियां की आदर्श नारी और जननी का दर्जा दें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)

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