पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली

बाल मुकुन्द ओझा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पृथ्वी को नुकसान पहुंचाने में भारतीयों की कोई भूमिका नहीं है और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। नॉर्डिक राष्ट्र की अपनी यात्रा के दौरान डेनमार्क में बसे भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा जलवायु को नुकसान पहुंचाने में भारत की भूमिका नगण्य है और पृथ्वी को नुकसान पहुंचाने में भारतीयों की कोई भूमिका नहीं है।
भारत के प्रधान मंत्री की चिंता जायज है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन को लेकर देश और दुनिया में बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है क्योंकि बदलती जलवायु न केवल इंसानों पर असर डाल रही है इससे अन्य पेड़.पौधों और जीव.जंतुओं पर भी असर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन यानी ग्लोबल वार्मिंग सरल शब्दों में कहें तो हमारी धरती के तापमान में लगातार बढ़ोतरी होना है। ग्लोबल वार्मिंग जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन में वृद्धि के कारण पृथ्वी के वायुमंडल के तापमान में वृद्धि को दर्शाता है। कोयले और तेल जैसे जीवाश्म ईंधन को जलाने से हमारे वातावरण में कार्बनडाइ ऑक्साइड अधिक होता है। इन ग्रीनहाउस गैसों में से अधिकांश पृथ्वी के वायुमंडल में अधिक गर्मी का कारण बनती हैं। इससे पृथ्वी गर्म होती है। यानि जब सर्दी पड़नी चाहिए थी तब गर्मी हो रही है। तापमान में बदलाव आ रहा है। दुनियाभर में सैकड़ों वर्षों से जो औसत तापमान बना हुआ थाए वह अब बदल रहा है। भारत की बात करें तो इस वर्ष मई . जून में पड़ने वाली तेज़ गर्मी मार्च से ही शुरू हो गई। बताया जाता है एक बार जब ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने लगती है तो वो ज्यादा मात्रा में सूर्य की ऊर्जा को सोखने लगती है उसके चलते वैश्विक तापमान में वृद्धि होने लगती है इसी को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। आज इसके चलते ने केवल धरती के बल्कि समुद्रों के तापमान में भी वृद्धि हो रही है।
जलवायु आंदोलन के समर्थकों का कहना है विश्व के राष्ट्र इस आसन्न खतरे को कमतर आंक रहे है और निकट भविष्य में यही उन पर भारी पड़ने वाला है। जब पूरी मानवता संकट में पड़ जाएगी तब जिम्मेदार चेतेंगे और तब तक चिड़िया खेत चुग जाएगी। यह भी कहा जा रहा है पहले कोरोना महामारी और अब रूस . यूक्रेन के युद्ध से अर्थव्यवस्था के साथ जलवायु परिवर्तन पर गहरी चोट हुई है। तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है जो जलवायु के लिए किसी महा तबाही से कम नहीं है।
प्रधान मंत्री मोदी का स्पष्ट तौर पर कहना है हमने अपनी धरती मां को बचाने की चुनौती ली हैं। वर्ष 2070 तकए हमने नेट जीरो लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत अपनी जलवायु कार्रवाई को पूरा करने में सक्षम रहा है। नेट जीरो का अर्थ है कि सभी देशों को जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए कार्बन के उत्सर्जन में तटस्थता लानी है। मोदी ने कहाए उपयोग करो और फेंकने की मानसिकता ग्रह के लिए नकारात्मक है। उपभोग उन्मुख दृष्टिकोण से बाहर निकलना आवश्यक है और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। मोदी ने कहा कि वैश्विक जलवायु कार्रवाई अभी तक सफल होती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि दुनिया अपने रास्ते पर रुक गई है लेकिन भारत हर एक भारतीय के प्रयासों के कारण अपने लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन के सम्बन्ध में संयुक्त राष्ट्र का भी यही मानना है भारत के पास न केवल 2070 तक नेट.जीरो कार्बन उत्सर्जन की क्षमता हैए बल्कि यह जलवायु परिवर्तन से संबंधित लक्ष्यों को पूरा करने में दूसरे देशों की सहायता भी कर सकता है। का उल्लेख कियाए जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ष्ने पिछले साल ब्रिटेन के ग्लासगो में कॉप.26 की बैठक में पंचामृत की घोषणा की थी। पंचामृत वैश्विक उत्सर्जन की समस्या को हल करने में भारत के योगदान को दिखाता हैं। ये पंचामृत हैं. भारत की गैर जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता वर्ष 2030 तक 500 मेगावाट हो जाएगीए वर्ष 2030 तक भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का 50 फीसदी की पूर्ति अक्षय ऊर्जा स्रोत से करेगाए वर्ष 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौतीए भारत की अर्थव्यवस्था में कार्बन सघनता वर्ष 2030 तक 45 फीसदी घट जाएगीए भारत वर्ष 2070 में निवल.शून्य के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)