योग शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान का सशक्त साधन

संजीव ठाकुर

योग एक आत्म केंद्रित शारीरिक क्रिया तथा प्रक्रिया है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता भी नहीं होती ना किसी महंगी सहायक सामग्री की भी। इसीलिए योग एक रोग निवारक उपाय के रूप में धीरे धीरे व्यापक जन समर्थन प्राप्त करता जा रहा है।
योग प्रक्रिया में किसी अनावश्यक धन खर्च की आवश्यकता भी नहीं है और इसमें किसी विशेषज्ञ अथवा स्पेशलिस्ट व्यक्ति को भारी धन खर्च कर उस से ज्ञान लेने की आवश्यकता भी नहीं है। इसीलिए योग रोग निवारक उपाय की तरह ग्रामीण तथा शहरी भारत आदिवासियों महिलाओं के साथ युवाओं, विद्यार्थियों ,गर्भवती माताओं, किशोरियों आदि में नित नई बीमारियों के उन्मूलन में अत्यधिक उपयोगी साबित भी होता जा रहा है।
योग से न सिर्फ शरीर एवं मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है बल्कि इससे आर्थिक लाभ प्राप्त होने लगे हैं ।योग से अर्थव्यवस्था सुधारने की क्षमता भी बढ़ती आंकी गई है। योग से अर्थव्यवस्था को सुधारने में अग्रणी भूमिका निभाने में बहु उपयोगी है। योग गुरुओं के रूप में नए रोजगार का अवसर ग्रामीण टूरिज्म, योग टूरिज्म, विदेशी मुद्रा की प्राप्ति व्यक्ति की उत्पादन क्षमता में बढ़ना और योग सामग्री का नया बाजार विकसित धीरे-धीरे होने लगा है। योग के प्रचार प्रसार होने तथा इसके लाभों को जन जन तक पहुंचाने के परिणाम स्वरुप आम लोगों में योग के प्रति रुचि बढ़ने लगी है ।फल स्वरूप स्कूल कालेजों तथा अन्य कॉरपोरेट सेक्टर के संस्थानों में योग शिक्षकों की मांग बढ़ने की संभावना बलवती हो गई है। बाबा रामदेव, अयंगर स्वामी, सतगुरु स्वामी ,विक्रम योगी जैसे गुरुओं की तरह अन्य योग के गुरुओं की मांग बेरोजगारी को कम करने में सहायक होगी तथा युवाओं को रोजगार का सतत एवं स्थापित रोजगार प्राप्त होगा। योग के प्रचार प्रसार बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन अर्थ लाभ की प्रक्रिया शुरू होना शुरू होगी तथा ग्रामीण पर्यटन के इजाफे के साथ साथ अन्य क्षेत्र में समग्र रूप से रोजगार बढ़ने की संभावना दिखाई देने लगी है। योग के अवसर शहर के प्रदूषण से दूर ग्रामीण क्षेत्रों की प्राकृतिक छटा के मध्य योग केंद्र स्थापित होने के साथ-साथ यह धन लाभ की योजनाओं को भी सृजित करते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक तथा राजनयिक प्रयत्न के फल स्वरुप संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इसे वैश्विक मान्यता प्रदान करने के लिए 21 जून को प्रतिवर्ष वैश्विक योग दिवस मनाने की महत्वपूर्ण शुरुआत की गई। यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात है कि भारत के इस संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बनाने हेतु प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र संघ में सबसे शीघ्रता से प्रस्ताव स्वीकृत किया गया और विश्व के सभी देशों पर का पक्षों ने जिस पर आम सहमति दर्शाई थी। योग वैश्विक स्तर पर चर्चित एवं प्रसिद्ध होने से पश्चिम से लेकर पूरब तक योग की महत्ता पर लोगों ने इसे अपने जीवन का अंग बना कर इसे वरीयता प्रदान करना शुरू कर दिया है। अब हर वर्ष 21 जून को न सिर्फ भारत में बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ एवं अन्य देशों में भी वैश्विक योग दिवस के रूप में योग प्रक्रिया तथा प्रक्रिया का प्रदर्शन तथा योग क्रिया की जाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के पश्चात योग द्वारा बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति भी होने लगी है तथा इससे फॉरेन एक्सचेंज भी मजबूत होने लगा जिसके फलस्वरूप योग्य के प्रति पश्चिम के लोगों में बढ़ते आकर्षण ने ही बाबा रामदेव देव जैसे योग गुरु को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। और यही कारण है कि बड़ी संख्या में विदेशी यात्री भी योग सीखने भारत आते हैं तथा भारत की पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने लगे हैं। इससे हमारे देश का विदेशी मुद्रा का संचयन धीरे धीरे बढ़ने लगा है। योग के प्रसिद्ध होने के साथ-साथ इसके अनेक केंद्र भारत तथा विदेशों में खुलने से भारत सरकार को विदेशी मुद्रा से भारी आर्थिक लाभ होना भी सुनिश्चित होने लगा है। अतः योग सिर्फ रोग निवारक ना होकर मानसिक, शारीरिक क्षमता को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की स्थिति को सुधारने में सहायक हो गए हैं। इसके साथ ही योग प्रक्रिया के प्रचार प्रसार से योग से संबंधित समस्त सामग्रियों की मांग बढ़ने के साथ-साथ अनेक रोजगार के अवसर में वृद्धि हुई है।
योग वर्तमान में ही नहीं ऐतिहासिक रूप से भी वेदों में भी योग तथा शारीरिक क्रियाओं का विस्तृत वर्णन है।अतः हमें शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी सुधार लाने की आवश्यकता होगी। देश में लगभग सभी स्कूलों कॉलेजों में अब योग शिक्षकों की तथा योग कक्षाओं की अनिवार्यता की जाने वाली है। जिससे देश की आने वाली पीढ़ी तथा देश के आने वाले नागरिक भी स्वस्थ मानसिक एवं शारीरिक क्षमता के साथ अपने रोजगार अवसरों में अपना 100% योगदान प्रदान करेंगे, जिससे भारत में उत्पादक क्षमता में बढ़ने की आशा की जा सकती है। योग से शारीरिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ कार्यकुशलता भी विशेषज्ञता के साथ वृद्धि करती रहती है। योग के लिए केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों को बहुआयामी तथा पंचवर्षीय योजनाओं के साथ कार्य योजना तैयार कर किसके कौशल विकास को बढ़ावा देकर तथा कृषि विकास, उद्योग विकास का लघु एवं मध्यम उद्योग की स्थापना के साथ योग को ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार सृजित करने की आवश्यकता होगी। योग की प्रक्रिया तथा इसकी योगिक क्रियाओं से ग्रामीण भारत में बीमारी, कुपोषण, गरीबी पिछड़ेपन, भ्रष्टाचार, अल्प विकास जैसी बुराइयों से बाहर निकलना खुलकर योग को प्रचारित प्रसारित करते हुए आय के साधन का बड़ा स्रोत बनाने की परम आवश्यकता है। दूसरी तरफ केवल सरकारी प्रयासों से ही यह संभव न होकर आम जनता और आम नागरिकों को भी इसमें अथक मेहनत करनी होगी। योग को प्रसारित करने के लिए बड़ी संख्या में रोजगार मूलक प्रशिक्षकों की बड़ी संख्या तैयार करनी पड़ेगी तथा योग को शारीरिक विकास विभाग के लाभ से जोड़कर इसका स्वरूप गैर धार्मिक बनाना होगा यह से इसमें संबंधित विवाद रहित कर समाज के सभी वर्ग मैं यह प्रचारित प्रसारित कर समाज की अर्थव्यवस्था के लिए सार्थक लाभ की तरह बहु उपयोगी हो सके तब ही इसकी संपूर्ण सार्थकता होगी। योग की प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक तौर पर सशक्त एवं मजबूत विकसित परंपरा रही है अतः योग के इस महत्व और परंपरा को चिकित्सा अर्थव्यवस्था विदेशी मुद्रा की प्राप्ति में अधिकाधिक लाभ उठाने का साधन बनाना होगा।
(लेखक चिंतक एवं स्तम्भकार हैं)

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