कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक महत्वपूर्ण

कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस- 28 अप्रैल

बाल मुकुंद ओझा

विश्वभर में 28 अप्रैल को कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा यह दिन व्यावसायिक दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। कार्यस्थल पर स्वस्थ मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण हैए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ीए काम से संबंधित चोट इत्यादि से बचा जा सके।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 25 सितंबर 2015 को सतत विकास लक्ष्यों हेतु एजेंडा स्वीकार किया गया था जिसमें सतत विकास लक्ष्य 8 को शामिल किया गया। सतत विकास लक्ष्य 8 के अनुसार समावेशी और स्थायी आर्थिक विकासए पूर्ण और उत्पादक रोजगार तथा सभी के लिए सभ्य काम शामिल हैं। इसका लक्ष्य श्रम अधिकारों की सुरक्षा और सभी कामगारों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। संयुक्त राष्ट्र के इस लक्ष्य में प्रवासी श्रमिकए महिला प्रवासी और अनिश्चित रोजगार वाले लोग शामिल हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा एवम स्वास्थ की देखभाल की जिम्मेदारी कारखानेंए अस्पतालए सरकार की होती है यह उनका दायित्व है। क्योंकि कर्मी स्वस्थ होगे तो ही फैक्ट्री या संस्थान की प्रगति होगी। निमार्ण कार्यस्थल पर कर्मियों को हैलमेट उपलब्ध कराना कंपनी की जिम्मेदारी है। जूट के कारखनेए कोयलाए अभ्रक आदि खादानों में कार्य कर रहे कर्मी कई प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते है। विश्व भर में हर वर्ष 31 करोड़ से अधिक कर्मी कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों से प्रभावित होते हैं और हर रोज हजारों लोग मौत का ग्रास बन जाते है।
निश्चय ही कार्यस्थल पर स्वास्थ्य मानकों को बनाए रखना हम सब के लिए जरुरी है। मगर बहुत बार ऐसा देखा गया है इन मानकों की पालना नहीं की जाती जिससे संभावित दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है और कई बार श्रमिक काम करते हुए घायल अथवा मृत्यु का शिकार हो जाते है। श्रमिक अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैंए लेकिन उनकी सेहत का ख्याल तक नहीं रहता। श्रमिकों को निर्माण सहित अन्य कार्यों में लगाने के लिए हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर सहित सुरक्षा के अन्य उपाय भी करने आवश्यक हैए लेकिन इसका पालन नहीं होता है। विशेषकर सीवर लाइन के निर्माण और सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की पालना नहीं होने से दुर्घटनाओं की ख़बरें आये दिन पढ़ने को मिल जाती है। ऐसा देखा जाता है सीवर लाइन का काम कर रहे श्रमिकों के पास हेलमेट बॉडी प्रोटेक्टर आदि उपकरण नहीं होते है। सुरक्षा मानकों की पालना नहीं करने पर हाथ से नालों की सफाई करते हुए सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई है। 2020 में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की संस्था राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने डराने वाले आंकड़े बताए थे। उसने कहा था कि 2010 से मार्च 2020 तक सीवर सफाई के दौरान 631 लोगों की मौत हुई। आंकड़ों के अनुसारए 2019 में सीवर की सफाई के दौरान 110 लोगों ने जान गंवाई। इसी तरह 2018 में 68 और 2017 में 193 मौतें हुईं। मैनुअल स्‍कैवेंजिंग एक्‍ट 2013 के तहत सीवर में सफाई के लिए किसी भी व्‍यक्ति को उतारना पूरी तरह गैर.कानूनी है। एक्‍ट में इस पर रोक का प्रावधान है। किसी खास स्थिति में अगर व्‍यक्ति को सीवर में उतारना ही पड़ जाए तो उसके लिए कई तरह के नियमों का पालन जरूरी है। मसलनए जो व्‍यक्ति सीवर की सफाई के लिए उतर रहा हैए उसे ऑक्सिजन सिलेंडरए स्‍पेशल सूटए मास्‍कए सेफ्टी उपकरण इत्‍यादि देना जरूरी है। अमूमन इन नियमों की अनदेखी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने मैला ढोने और बिना किसी यंत्र के सीवेज चैंबर की सफाई के मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि दुनिया में ऐसा कोई दूसरा देश नहीं है जो लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में भेजता हो।
भारत का संविधान नागरिकों के अधिकारों के लिए विस्तृत प्रावधान प्रदान करता है। सरकार कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य जोखिमों के प्रबंधन के लिए सभी आर्थिक गतिविधियों को विनियमित करने और प्रत्येक कामकाजी पुरुष और महिला के लिए सुरक्षित और स्वस्थ काम करने की स्थिति सुनिश्चित करने के उपाय प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार मानती है कि श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का उत्पादकता और आर्थिक और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रोकथाम आर्थिक गतिविधियों का एक अभिन्न अंग है क्योंकि काम पर उच्च सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि नए और मौजूदा उद्योगों के लिए अच्छा व्यावसायिक प्रदर्शन।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)

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