एक्सप्रेस हाईवे बना भ्रष्टाचार का हब

बाल मुकुंद ओझा

राजस्थान में हर कदम पर भ्रष्टाचार की कहानियां सुनी जा सकती है। लोग चौक चौराहे से लेकर गली नुक्कड़ और चाय पान की थडियों पर प्रदेश में दिन प्रतिदिन बढ़ रही रिश्वत खोरी की चर्चा चटखारे लेकर कर रहे है। प्रदेश की राजधानी में ऐसी ही एक चाय की दुकान पर कुछ लोग अख़बार हाथ में लेकर अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया के हाल ही में रंगेहाथ पकडे जाने की चर्चा में मशगूल थे। इन पंक्तियों के लेखक ने भी ये चर्चा सुनी जो वाकई बहुत दिलचस्प और रोचक थी। एक सज्जन कह रहा थाए कलेक्टर की पहुँच सत्ता के उच्च गलियारों में थी और रिश्वत का पैसा ऊपर तक जाता था। वहीँ दूसरा व्यक्ति कह रहा था सारे आईएएस औरआईपीएस चोर हैए इनके घरों पर छापे मार कर देखो करोड़ों की दौलत मिल जाएगी। एक ने कहा गहलोत ईमानदार है इसलिए भ्रष्टाचारी पकडे जा रहे है। इस नुक्कड़ वार्तालाप का यही निचोड़ देखा गया की लोग अब प्रदेश में पनप रहे भ्रष्टाचार की चर्चा सरेआम करने लगे है।
जी हांए यहाँ हम बात कर रहे है राजस्थान में भ्रष्टाचार की। राजस्थान में भ्रष्टाचार लगातार सुरसा के मुंह की तरह फैलता ही जा रहा है। हालाँकि भ्रष्टाचार के विरुद्ध राजस्थान एसीबी लगातार छापामारी कर रही है। ताज़ा घटना अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया के ट्रैप से शुरू होती है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तजस्थान से गुजरने वाला दिल्ली.मुंबई एक्सप्रेस.वे भ्रष्टाचार का हब बन गया है। राजस्थान में हाईवे की एंट्री के साथ ही अफसरों ने घूसखोरी के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं। 374 किमी निर्माण का यह हाइवे अलवरए भरतपुरए दौसाए सवाई माधोपुरए टोंकए बूंदी और कोटा से गुजरना है। हाइवे निर्माण की इस रिश्वतखोरी में अब तक प्रदेश में एक आईएएसए एक आईपीएस और 3 आरएएस पकडे जा चुके हैं। लगभग तीस कंस्ट्रक्शन कंपनियां भारतमाला प्रोजेक्ट के इस एक्सप्रेस.वे का निर्माण कर रही हैं। सम्बंधित जिलों के अफसर जमीन अवाप्ति से लेकर काम सुचारु और निर्बाध करने के नाम पर मासिक वसूली ले रहे हैं। अभी 160 किमी तैयार हुआ है। इसमें 5 अफसर पकड़े गए। जनवरी 2021 में एसीबी ने दौसा में आरएएस पिंकी मीणा व पुष्कर मित्तल को गिरफ्तार किया। दोनों ने एक्सप्रेस.वे के निर्माण में अड़चन नहीं करने के लिए कंपनी से घूस मांगी थी। मित्तल 5 लाख की घूस लेते ट्रैप हुआ। पिंकी ने दस लाख रुण् की मांग की थी। फरवरी 2021 दौसा के तत्कालीन एसपी मनीष अग्रवाल भी गिरफ्तार हुए । हाईवे बना रही कंपनी से 4 लाख रुण् मंथली ली। कंपनी पर चल रहे कुछ केस को रफा.दफा करने के एवज में भी 10 लाख रुण् लिए। दलाल नीरज मीणा ने एसपी के नाम पर कंपनी से 38 लाख उठाए। बाद में नीरज व गोपाल सिंह पकड़े गए। इसी भांति मार्च 2021 में कोटा में एसडीएम के सूचना सहायक दीपक रघुवंशी व दलाल एकांत को एक लाख रुण् लेते पकड़ा गया । उन्होंने यह राशि अधिग्रहीत जमीन की मुआवजा राशि जारी करने के एवज में किसान से मांगी थी।
अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया को एसीबी ने रिश्वत के मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया था। इसके साथ एक आरएएस अधिकारी अशोक सांखला और दलाल नितिन को भी धरा गया था। एसीबी ने पहाड़िया के कलेक्टर निवास की तलाशी ली तो महंगी शराब की तीन दर्ज़न बोतलें मिली हैं। जिनकी कीमत करीब एक लाख रुपए है। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर आवास से एक्सआर 21 और जानी वॉकर समेत टीचरए बैग पाइपरए ओल्ड मॉन्क जैसे ब्रांड की बोतलें मिली हैं। एसीबी का कहना है कि पूर्व कलेक्टर शराब पीकर फर्म के अधिकारियों को मंथली देने के लिए भी धमकाता था। पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया का ट्रांसफर 14 अप्रैल को ही हो गया था। इसके बाद भी वे 10 दिन से कलेक्टर बंगले में थे। प्रदेश में पहाड़िया दूसरे आईएएस हैंए जो बतौर कलेक्टर रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्त में आए हैं। इससे पहले 23 दिसंबर 2020 को बारां कलेक्टर इंद्रसिंह राव पेट्रोल पंप की एनओसी के बदले पीए के जरिए घूस लेते पकड़े गए थे।
उल्लेखनीय है राजस्थान में भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप ले लिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा राजस्थान प्रशासनिक सेवा और राज्य सेवा के बहुत से प्रमुख अधिकारी या तो जेलो में बंद है अथवा जमानत पर बाहर आकर बहाल होकर अपनी अफसरी का लुत्फ उठा रहे है जो यह साबित करता है उनकी सरकार में कितनी भारी घुसपैठ है। सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की उनके रुतबे पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है और उनके द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सिर्फ शिष्टाचार है। जिनसे करोड़ों रूपयों की धन राशि बरामद हुई है वे भी जनता को सरेआम ठेंगा दिखा रहे है। इससे यह साफ जाहिर होता है भ्रष्टाचार ने इस राज्य में अपनी जडे मजबूती से जमा ली है। जनता के खून पसीने की कमाई को हड़प करने का जरिया भ्रष्टाचारियों ने अपना लिया है। यह तो भ्रष्टाचार की एक बानगी है। सच तो यह है कि भ्रष्टाचार ने अपना दामन चहुंओर फैला रखा है। राजस्वए तहसीलए कलेक्ट्रेटए जेडीएए स्थानीय निकायए सिंचाईए जलदायए रसदए सड़कए पंजीयन जैसे दर्जनों कार्यालय हैं जहां बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं होता। जब तक मुट्ठी गर्म न की जाए तब तक कोई काम ही नहीं होता।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)

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