तालिबान और पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को लेकर तनाव

(तालिबान ने पाकिस्तान को दी धमकी

संजीव ठाकुर

आतंकवादी जितने भी संगठन हैं वह कभी एक होकर नहीं रह सकते हैंl पाकिस्तान के प्रतिबंधित तहरीके तालिबान पाकिस्तान सहित अन्य संगठनों द्वारा अमेरिका के विरुद्ध तालिबान सरकार बनाने में कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध लड़ा था। अब यही संगठनों ने11 पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी है।पाकिस्तान ने तालिबान को स्पष्ट रूप से धमकाकर कहा है कि इस तरह की आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तान बर्दाश्त नहीं करेगाl पाकिस्तानी  न्यूज़ एजेंसी द न्यूज़ एक्सप्रेस  ट्रिब्यून के अनुसार तालिबान सरकार को स्पष्ट रूप से सख्त शब्दों में आतंकवादी समूहों के खिलाफ कड़ी और सख्त कार्रवाई करने को कहां है अन्यथा तालिबान को परिणाम भुगतने की धमकी तक दे डाली हैl उधर इस्लामाबाद एजेंसियों के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में सीमा पर कई हमलों से लगभग एक दर्जन पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने और इस्लामाबाद सरकार की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराने के बाद आतंकवादी समूह को पाकिस्तान की सीमा से लगे क्षेत्रों से हटाने के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया हैl तालिबान ने भी पाकिस्तान को धमकी दी है की पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा जैस ए मोहम्मद जैसे संगठनों को काबू में रखने के लिए पाकिस्तान को कहा है कि इनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखें अन्यथा वह भी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
पाकिस्तान और तालिबान मूलत आतंकवादी समर्थक देश हैं। अमेरिका को तालिबान से 20 साल के शासन के बाद हटाने के लिए तत्कालीन अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ एकजुट होकर युद्ध लड़ा था ,और पाकिस्तान पर तालिबान समर्थक आतंकवादी संगठन में पाकिस्तान और तालिबान के साथ अफगानी सरकार और अमेरिकी सैनिकों के विरुद्ध कंधे से कंधा मिलाकर जंग लड़ी थी। पर आतंकवादी सदैव आतंकवादी होते हैं और अपना मूल चरित्र भूल नहीं सकते हैं। अब पाकिस्तान तथा तालिबान की सीमा पर तहरीक ए इस्लाम पाकिस्तान जो कि पाकिस्तान ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है जिसने पाकिस्तान के ही एक दर्जन सैनिकों को घात लगाकर मार दिया था। आतंकवादियों को लेकर अब खुद तालिबान तथा पाकिस्तानी सरकारें आमने सामने हो गई हैं। पाकिस्तान द्वारा तालिबान की आतंकवादियों पर की जा रही गतिविधियों से संतुष्ट नहीं है उनके आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि आतंकवादी समूह को खत्म किया जाना चाहिए या इस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए कि यह फिर हमारी सेनाओं के लिए खतरा न बन सकें। पिछले दिनों पाकिस्तान सीमा पर आते हुए आतंकवादी हमलों में काफी वृद्धि हुई है, सीमा पर उत्तरी वजीरिस्तान में शनिवार को सीमा पार से आए आतंकवादी हमले में 3 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे जवाब में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और खोस्त प्रांतों में कथित तौर पर आतंकवादी ठिकानों को खत्म करने के लिए जबरदस्त हवाई हमले किए थे। जिसे तालिबानी सरकार काफी नाराज दिखाई दी है। पिछले वर्ष जब पाकिस्तान समर्थित तालिबान आतंकवादियों ने अफगानिस्तान में सत्ता संभाली थी तब पाकिस्तान की उम्मीदें तालिबान से बहुत बढ़ गई थी, वह चाह रही थी कि तालिबान भी पाकिस्तान के साथ एकजुट होकर भारत का कश्मीर में पुरजोर विरोध करें, पर तालिबान ने ऐसा कोई वादा नहीं निभाया , वह कश्मीर के मामले में भारत का विरोधी नहीं हुआ है, इसके अलावा पाकिस्तान के विरुद्ध आतंकवादी संगठनों पर भी तालिबान सरकार ने कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की है। जिससे पाकिस्तान सरकार काफी नाराज दिखाई दे रही है। तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की किसी भी तरह मदद नहीं करने से पाकिस्तान काफी खफा हो गया है।
इस तरह आतंकवादियों को पनाह देने वाले दोनों देश पाकिस्तान और तालिबान का नतीजा यह तो होना ही था। क्योंकि दोनों देख पूरे विश्व में आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों की श्रेणी में प्रथम पंक्ति में शुमार किए गए हैं। दोनों देशों के आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर उन पर वैश्विक प्रतिबंध रोपित किए गए थे।
भारतीय संदर्भ में यह कहना लाजमी है कि पाकिस्तान तथा तालिबान से भारत के अधीन कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों से भारत सर्वाधिक प्रभावित रहा है, और वह लगातार संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान का इस तरह गतिविधियों में लिप्त होने का पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत कर विरोध जताते आया है।
अब तालिबानी आतंकवादियों के विरोध के कारण पाकिस्तान की स्थिति विचित्र एवं असमंजस वाली हो गई है। पाकिस्तान की स्थिति वर्तमान में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बहुत खस्ताहाल हो गई है। राजनैतिक तौर पर भी पाकिस्तान में 1 वर्ष के लिए अस्थाई शहबाज सरकार स्टेपनी की तरह कार्य कर रही है, शरीफ सरकार ममें नौ दल शामिल है वहां प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को खुद नहीं मालूम कि उसकी सरकार कितने दिन तक चल पाएगी। ऐसी स्थिति में तालिबान से उसका विरोध उसे और बुरी हालत में रसातल में पहुंचा रहा है, भारत अंदरूनी तौर पर बहुत मजबूत होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी शक्तिशाली हो चुका है, और उसे विश्व के अनेक देशों का समर्थन प्राप्त है जबकि पाकिस्तान को केवल चीन का आर्थिक गुलाम होने के कारण थोड़ा बहुत समर्थन प्राप्त है।

(लेखक चिंतक एवं स्तम्भकार हैं)

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