प्रधानमंत्रियों के जीवन दर्शन का अनूठा संग्रहालय

बाल मुकुंद ओझा

संग्रहालय या म्यूज़ियम एक ऐसा संस्थान है जिसमें हमारे जीवन की विरासतों के संरक्षण के लिए उनका संग्रहए शोधए प्रचार या प्रदर्शन किया जाता है जिसका उपयोग शिक्षाए अध्ययन और मनोरंजन के लिए होता है। संग्रहालय की समाज के विकास में अहम भूमिका हैए क्योंकि संग्रहालय में ही हमारे इतिहास के दर्शन होते हैं। ऐसा ही एक अनूठा और नायब संग्रहालय देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री संग्रहालय के नाम से बनाया गया है। यह संग्रहालय में देश के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को किया। संभवतरू यह देश और दुनिया का एक मात्र संग्रहालय है जो आजादी के बाद के भारत के 75 साल के सुनहरे सफर की कहानी सुनाता है। प्रधानमंत्री संग्रहालय में देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यों का प्रदर्शन होगा। यह संग्रहालय स्वतंत्रता के बाद देश के प्रधानमंत्रियों के जीवन और उनके योगदान के माध्यम से लिखी गई भारत की गाथा का वर्णन करता है। भारत के संविधान को भी प्रधानमंत्री संग्रहालय में जगह दी गई है। संग्रहालय में देश के 14 पूर्व प्रधानमंत्रियों के जीवन की झलक के साथ.साथ राष्ट्रनिर्माण में उनका योगदान दर्शाया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि पीएम संग्रहालय के जरिए सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि दी जा रही है। संग्रहालय का मकसद नई पीढ़ी को पहले के प्रधानमंत्रियों की जीवनशैली और उनके कार्यों से परिचय कराना हैण् इसके जरिए प्रधानमंत्रियों के उन कार्यों के बारे में जानकारी दी जाएगी जिन्होंने देश के विकास में अहम भूमिका निभाई है। संग्रहालय में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सहित गुलजारी लाल नंदाए लाल बहादुर शास्त्रीएइंदिरा गांधीए मोरारजी देसाईए चौधरी चरण सिंहएराजीव गांधीए विश्वनाथ प्रताप सिंहए चंद्रशेखरए नरसिंह रावए अटल बिहारी वाजपेयीए एचडी देवगौडाए इंद्रकुमार गुजरालए मनमोहन सिंह को शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री संग्रहालय को तीन मूर्ति भवन में बनाया गया है। पहले इसे नेहरू संग्रहालय भवन के नाम से जाना जाता था।
इस संग्रहालय की लागत करीब 271 करोड़ रुपये आई है। इसे 2018 में मंजूरी मिली थी और चार साल के भीतर ये बनकर तैयार हो गया। इसका निर्माण 15ए600 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में हुआ है। इस म्यूजियम में 43 गैलरी है और करीब 4 हजार लोगों के एक साथ घूमने की व्यवस्था है। संग्रहालय भवन की डिजाइन उभरते भारत की कहानी से प्रेरित है। इसे नेताओं के हाथों का आकार दिया गया है। डिजाइन में टिकाऊ और ऊर्जा संरक्षण के इंतजाम किए गए हैं।
संग्रहालय में भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान के निर्माण तक की कहानी बहुत ही रोचक ढंग से प्रदर्शित की गई है। संग्रहालय में यह भी दिखाया गया है हमारे प्रधानमंत्रियों ने किस प्रकार विभिन्न चुनौतियों से देश को उबारा और देश की चौतरफा प्रगति सुनिश्चित की। संग्रहालय का हर कोना देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत है। दर्शक अपने पसंदीदा प्रधानमंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाने के साथ ही वीडियो भी बनवा सकते हैं। यहां पर पोखरण परमाणु परीक्षण को एलईडी स्क्रीन पर देखना और झटकों को महसूस करना दर्शकों के लिए रोमांचक होगा।
प्रधानमंत्री संग्रहालय में युवाओं को सूचना आसान और रोचक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी.आधारित संचार सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। होलोग्रामए वर्चुअल रिएलिटीए ऑग्मेंटिड रिएलिटीए मल्टी टचए मल्टीमीडियाए इंट्रेक्ट्विक कियोस्कए कंप्यूटराइज काइनेटिक स्कल्पचरए स्मार्टफोन एप्लीकेशनए इंट्रेक्टिव स्क्रीन जैसी टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस संग्रहालय को सजीव बनाया गया है। संग्रहालय में महत्वपूर्ण पत्राचारए कुछ व्यक्तिगत वस्तुओंए उपहार और यादगार वस्तुएंए सम्मानए पदकए स्मारक टिकटए सिक्के आदि भी प्रदर्शित किए गए हैं। दूरदर्शनए फिल्म डिवीजनए संसद टीवीए रक्षा मंत्रालयए मीडिया हाउस ;भारतीय और विदेशीद्धए प्रिंट मीडियाए विदेशी समाचार एजेंसियोंए विदेश मंत्रालय आदि संस्थानों के माध्यम से जानकारी एकत्र की गई।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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