स्वामिनारायणअक्षरधाम के सृजनकर्ता प.पू. प्रमुख स्वामीजी महाराज के जन्म शताब्दी महोत्सव का शंखनाद

@ chaltefirte.com               दिल्ली I विश्व प्रसिद्ध दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के सर्जक परम पूज्य प्रमुखस्वामीजी महाराज का शताब्दी महोत्सव अति भव्यता से मनाया गया I अक्षरधाम परिसर में आयोजित इस विराट महोत्सव में  ८००० से भी अधिक गणमान्य अथिति उपस्थित थे I

“दूसरो के भले में ही हमारा भला है”, ऐसे हृदयस्पर्शी संदेश की लौ फैलाने वाले श्रद्धेय प.पू. प्रमुख स्वामीजी महाराज के जन्म शताब्दी महोत्सव के क्रम में आज दिल्ली स्थित स्वामिनारायण अक्षरधाम में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था I इसमें, विशिष्ट विद्याविद, प्रतिष्ठित पत्रकार, विद्वान् संपादक, लोकप्रिय राजनेता, सम्मानित वकील एवं न्यायाधीश, भारत सरकार तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारीगण और मीडिया क्षेत्र से जुड़े प्रसिद्ध कलाकारों, ने विशेष रूचि दिखाते हुए, आयोजन को शोभायमान किया I

दिल्ली का स्वामिनारायण अक्षरधाम , यमुना के तट पर बना एक आध्यात्मिक महालय है I यह अभिनव संस्कृति-तीर्थ भारतीय कला, प्रज्ञा ,चिंतन और मूल्यों का अद्वितीय परिसर है I आज, इस महान वात्सल्यमूर्ति संत के सद्गुणों की स्मृति में प्रस्तुत कार्यक्रम,  “प्रमुखस्वामी महाराज का अद्वितीय सर्जन तथा उससे मानव  जीवन परिवर्तन की गाथा” का शुभारम्भ भारतीय संस्कृति के अनुसार दीप-प्रज्वलन से हुआ I संस्था के वरिष्ठ सद्गुरु संत पू. ईश्वरचरण स्वामीजी ने   माननीय अतिथियों की श्रद्धास्पद उपस्तिथि में कार्यक्रम का उद्घाटन किया I मंच पर विराजमान थे बी.ए.पी.एस. के वरिष्ठ संतगण- पू. धर्मवत्सल स्वामीजी, पू. आत्मस्वरूप स्वामीजी, पू. आनंदस्वरूप स्वामीजी, पू. अक्षरवत्सल स्वामीजी, पू. ब्रह्मविहारी स्वामीजी और पू. भद्रेशदास स्वामीजीI अपने स्वागत प्रवचन में पू. धर्मवत्सल स्वामीजी ने अवगत करवाया कि अक्षरधाम के भव्य निर्माण का आधार केवल परम पूज्य प्रमुख स्वामी महाराज की अद्वितीय गुरुभक्ति थी I समारोह को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली अक्षरधाम के प्रभारी संत पू. मुनिवत्सल स्वामीजी ने प.पू. प्रमुख स्वामीजी महाराज के जीवन चरित्र और कार्यों पर एक सुंदर प्रस्तुतीकरण द्वारा प्रकाश डाला I साथ ही, पू. अक्षरवत्सल स्वामीजी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को सांझा किया। अतिथि-समुदाय से बजती हुई तालियों की ध्वनि ने इस युगविभूति के चरणों में अपना शत-शत नमन अर्पित किया I इसके पश्चात्, पू. आत्मस्वरूप स्वामीजी ने “अक्षरधाम का प्रदान” विषय पर प्रमुख स्वामीजी महाराज के अभूतपूर्व योगदान का उल्लेख किया। उनके शब्दों में यह केवल एक स्मारक अथवा इमारत नहीं है अपितु यह स्थल जीवन परिवर्तन का केंद्र बिंदु है।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में जीवन-परिवर्तन की कुछ सवेंदनशील वास्तविक घटनाओं को प्रस्तुत किया गया I इन साधारण विपदाग्रस्त मनुष्यों के हाथ प.पू. प्रमुख स्वामीजी महाराज ने थामे तो उनकी हस्त-रेखाओं में “आनंद और केवल आनंद” ही लिखा गया I कठिनतम परिस्थितियों में भी इन भक्तों द्वारा धर्म-नियमों के सहज पालन का वृतांत देखकर अथितिगण भावविभोर हो उठे I

पू. भद्रेशदास स्वामीजी ने  प्रमुखस्वामीजी के विशेष संदेशों और विश्व के प्रतापी नेताओं द्वारा उनके आदर  में कहे अथवा लिखे गए अनमोल वचनों से सबका परिचय करवाया I इससे अक्षरधाम की सांप्रदायिक संवादिता के परिचायक की भूमिका का उद्घोष हुआ । गणमान्य समाज के समक्ष खड़े इस विराट अक्षरधाम का आज संपूर्ण परिचय सबको मिला ।

बालक तो प.पू. प्रमुख स्वामीजी के ह्रदय के सबसे समीप थे I अपने प्यारे ‘बापा’ से सीखे जीवन मूल्यों का रंगारंग प्रदर्शन इन बालकों ने नाटक और नृत्य के  माध्यम से किया I इन बालकों के आत्मविश्वास को देखकर, यह सुनिश्चित हुआ कि समाज और देश का भविष्य धर्म-परायण हाथों में होगा I

 पू. आनंदस्वरूप स्वामीजी ने प.पू. प्रमुखस्वामीजी की अंतराष्ट्रीय उपलब्धियों से मान्य अथितियों को अवगत करवाया Iइस प्रवचन के द्वारा सभी को एक विश्वव्यापी संगठन के प्रमुख की अहंशून्यता का बोध हुआ। पाँच व्यक्तियों ने प.पू. प्रमुखस्वामीजी से हुए अपने साक्षात्कार के सुखद अनुभवों का वर्णन किया जिससे वातावरण की श्रद्धा सुरभि में वृद्धि का आभास हुआ I अन्य मान्य व्यक्तियों ने भी अपनी श्रद्धामय प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं I  सभी प्रवचनों के समायोजन के रूप में पू. ईश्वरचरण स्वामीजी ने प्रासंगिक उद्बोधन द्वारा प.पू. प्रमुखस्वामीजी महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए I

प्रमुखस्वामी महाराज ने अक्षरधाम के उद्घाटन प्रसंग पर जो आशीर्वाद दिए थे उसकी स्मृति शब्द थे- “हमने जो यह अक्षरधाम बनाया है वह किसी को दिखाने के लिए नहीं । स्पर्धा के लिए नहीं । अपनी बड़ाई दिखाने के लिए नहीं , किंतु गुरु योगी जी महाराज के संकल्प को पूर्ण करने के लिए और भगवान स्वामीनारायण को अंजलि देने के लिए बनाया है । और यह सबके कल्याण के लिए है “Iसंस्था के वर्तमान गुरु एवं प्रमुख पू. महंतस्वामी महाराज ने वीडियो आशीर्वचन में बताया कि अक्षरधाम का निर्माण करके प्रमुखस्वामी महाराज ने हम सब पर बहुत बड़ा उपकार किया है हमारे भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाया है I

सभा का समापन अक्षरधाम के शिखरों से लेकर परिसर की सीमा तक फैले प्रकाश के बीच प.पू. प्रमुख स्वामीजी की जय जयकार और आरती के आलौकिक शब्दों से हुआ Iअंत में आगामी दिसम्बर मास में अहमदाबाद में आयोजित प्रमुखस्वामी महाराज के शताब्दी महोत्सव का आमंत्रण सभी को दिया गया I महाप्रसाद के बाद सभा की समाप्ति हुई I

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