खंडित भारत की अखंडता के लिए पहला बलिदान श्रद्धेय मुखर्जी का था- जगत प्रकाश नड्डा

डॉ मुखर्जी 11 मई को दिल्ली से अरेस्ट हुए थे और 23 जून 1953 को उनकी रहस्यमई तरीके से मृत्यु हुई

नई दिल्ली। भारत की एकता-अखंडता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र के नाम समर्पित करने वाले महान राष्ट्रभक्त श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आज भारतीय जनता पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली भाजपा प्रदेश कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली भाजपा प्रभारी  श्याम जाजू, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  आदेश गुप्ता, सासंद  मीनाक्षी लेखी, वरिष्ठ नेता  विजय कुमार मल्होत्रा, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन, प्रदेश महामंत्री  कुलजीत सिंह चहल, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ मोनिका पंत व प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित थे। मंच का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष  राजीव बब्बर ने किया। जगत प्रकाश नड्डा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर लिखित पुस्तक श्यामा  प्रसाद मुखर्जी, हिज डेथ इन डिटेंशन- ए केस फॉर इंक्वायरीज  का भी विमोचन किया। दिल्ली भाजपा सह प्रभारी  तरुण चुघ, केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन, नेता प्रतिपक्ष  रामवीर सिंह बिधूड़ी, पूर्वी दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  विजय गोयल, पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष व सांसद मनोज तिवारी, सांसद  रमेश बिधूड़ी,  प्रवेश साहिब सिंह, हंसराज हंस,  गौतम गंभीर, राष्ट्रीय मंत्री सरदार आर पी सिंह,  महेश गिरी, दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष व विधायक विजेंद्र गुप्ता दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय अपने-अपने क्षेत्र के वर्चुअल पॉइंट से इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।
डॉ. मुखर्जी को याद करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि एक  देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे का नारा देकर जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास हेतु धारा 370 और 35ए को समाप्त करने की प्रेरणा का बीजारोपण करने वाले जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का लाभ उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ रही है। कोरोना संक्रमण ने हम सब लोग के सामने बहुत बड़ी चुनौती की स्थिति लेकर आई थी कि लॉकडाउन में लाखों कार्यकर्ता काम कैसे करेंगे, जनसेवा से कैसे जुड़ेंगे? आज मुझे संतोष है इस बात का कि भारतीय जनता पार्टी अकेली पार्टी है जिसके लाखों कार्यकर्ताओं ने इस संक्रमण काल में डिजिटल टूल का लाभ उठाते हुए करोड़ों लोगों की सेवा की है और पार्टी को मजबूत बनाया है। यह साझा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है कि 8 लाख से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं ने पिछले 3 महीने में 29 करोड़ फूड पैकेट्स और 5 करोड़ राशन किट बांटा। महिला मोर्चा, महिला मंडल, सेल्फ हेल्प ग्रुप, एनजीओ ने महिला मोर्चा के नेतृत्व में अपने हाथों से बनाए हुए 5 करोड़ फेस मास्क वितरित किया है।
उन्होंने  कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर उनको श्रद्धांजलि देने के लिए और उनके दृष्टिकोण को आत्मसात करते हुए पार्टी को कैसे आगे मजबूत किया जा सकता है इसके चिंतन करने के लिए अवलोकन करने के लिए हम सब लोग एकत्रित हुए हैं। मैं दिल्ली प्रदेश को इसके लिए बधाई देता हूं कि उन्होंने बलिदान दिवस को इस वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से मनाने का तय किया। संक्रमण कितना भी हो हम नहीं रुकेंगे हम नहीं डिगेंगे और हम चलते रहेंगे अपने पथ पर। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक संभ्रांत परिवार से कोलकाता में शिक्षाविद् परिवार में उनका जन्म 1901में हुआ, वह एक होनहार विद्यार्थी थे जिन्होंने 16 साल की उम्र में मैट्रिकुलेशन कर ली, 20 साल में ग्रेजुएशन कर, 22 साल की उम्र पोस्ट ग्रेजुएशन की और बांग्ला में भी पोस्ट ग्रेजुएशन की। फिर इंग्लैंड चले गए और 3 साल में वहां से बैरिस्टर की डिग्री लेकर लौटे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी डॉक्टर मुखर्जी 33 साल की उम्र में ही कोलकाता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बने। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक बहता प्रवाह थे। जब जनसंघ की स्थापना की गई तो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। कोई पद उनका लक्ष्य नहीं था। जब कोई पद उनके लक्ष्य में अड़ंगा बना तो उन्होंने वो पद त्याग दिया। नेहरु लियाकत समझौते में ये तय हुआ कि दोनों देश अपने वहां अल्पसंख्यकों की चिंता करेंगे। डॉ. मुखर्जी जी ने कहा था कि भारत में मुस्लिम पूरे सम्मान से रह रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते से देश का हित नहीं है और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। आजादी के बाद सारा असम, पंजाब का बहुत बड़ा हिस्सा जाने वाला था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने बहुत बड़ा आंदोलन कर बंगाल, पंजाब और असम को बचाया।
उन्होंने  कहा कि डॉ. मुखर्जी जी शुरुआत से जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने की बात का विरोध किया। लेकिन नेहरू जी और शेख अब्दुल्ला के बीच तब खिचड़ी पक रही थी। तब अस्थाई प्रावधानों के साथ अनुच्छेद 370 लगाया गया। लेकिन शेख अब्दुल्ला के इरादे कुछ और थे और नेहरु जी इसका समर्थन कर रहे थे जिसके कारण हिंदुस्तान और कश्मीर का संविधान अलग हो गया था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए परमिट के खिलाफ भी लड़े थे और नारा था- एक देश में एक निशान, एक विधान और एक प्रधान होगा। जिसके बाद देश में जगह-जगह आंदोलन और प्रदर्शन शुरू हुआ, एक प्रजातांत्रिक लड़ाई शुरू हुई लेकिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार कर उन्हें कश्मीर ले जाया गया और उनको जेल में डाल दिया गया। डॉ मुखर्जी 11 मई को दिल्ली से अरेस्ट हुए थे और 23 जून 1953 को उनकी रहस्यमई तरीके से मृत्यु हुई। खंडित भारत की अखंडता के लिए पहला बलिदान श्रद्धेय मुखर्जी का था। वह व्यक्ति नहीं उन्मुक्त विचार थे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान के बाद उसकी जांच की मांग की गई। जवाहर लाल नेहरू ने जांच क्यों नहीं कराई, ये भी बहुत बड़ा रहस्य है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष  ने कहा कि भाजपा ने यह तय किया था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे। आज मोदी जी के नेतृत्व में परिस्थितियां बदली, राजनीति की संस्कृति बदली, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में उभरते हुए दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी और जनादेश के साथ केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। कांग्रेस के दशकों के शासनकाल में देश में जितने कार्य नहीं हुए उससे कहीं अधिक कार्य मोदी सरकार ने केवल 6 सालों में करके दिखाया है। यह मेरा सौभाग्य है कि संसद में धारा 370 और 35ए को निरस्त करने के लिए मत देने का अवसर मिला। 5 अगस्त को संसद में अनुच्छेद 370 समाप्त हो गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के विचारों और बलिदान की लड़ाई को अंजाम देने का काम, मोदी जी की इच्छाशक्ति और अमित शाह जी की रणनीति से हो सका। जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मोदी जी के नेतृत्व में भारत को जोड़ने का काम किया है। कश्मीर की जनता कभी से धारा 370 नहीं चाहती थी बल्कि विकास चाहती थी, वह देश के मुख्यधारा में शामिल होना चाहती थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी किसी को को पद से नहीं विचारों से जुड़ना चाहिए, अगर वह विचारों से जुड़े रहेंगे तो उन्हें अनेक पद मिलते रहेंगे।उन्होंने अपने भाषण का समापन में कहा कि  कोरोना का समय है अपना विशेष ध्यान रखें, रिस्पेक्ट एवरीबॉडी बट सस्पेक्ट एवरीबॉडी, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें, बार बार साबुन से हाथ साफ धोएं, सैनिटाइजर का उपयोग करें और स्टे सेफ।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी के यशस्वी राष्ट्रीय अध्यक्ष  जगत प्रकाश नड्डा का स्वागत करते हुए कहा कि बलिदान दिवस के अवसर पर हमें माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के नेतृत्व में मैंने विद्यार्थी परिषद का काम किया है और उनकी ओजस्वी भाषण को, उनकी कार्यशैली को, उनकी सरलता को नजदीक से देखा है। कोरोना संक्रमण के कारण उत्पन्न हुए संकट के समय में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से प्रेरणा लेकर उनके आह्वान पर पूरे देश में 29 करोड़ से भी ज्यादा फूड पैकेट्स, राशन का वितरण किया है।
आज के दिन तमाम भाजपा कार्यकर्त्ता व् पदाधिकारीगण अपने अपने स्थानों पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के वलिदान को याद करते देखे गये। इसी क्रम में लक्ष्मी नगर से विधायक अभय वर्मा ने भी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
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