पूर्णिमा विश्व विधालय में समकालीन परिदृश्य और शिक्षा प्रणाली पर बेबीनार आयोजित

जयपुर। पूर्णिमा विश्व विधालय में मंगलवार को समकालीन परिदृश्य और शिक्षा प्रणाली पर आयोजित बेबीनार में विषय विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा की कोविड-19 से पैदा हुए संकट ने शिक्षा का पूरा परिदृश्य ही बदल दिया है। इसके कारण देश में डिजिटल शिक्षा का चलन तेजी से बढ़ा है। शिक्षण प्रक्रिया में तकनीक और प्रौद्योगिकियों का भी प्रयोग हो रहा है, जिससे छात्रों के समक्ष रोजगार की चिंता नहीं रहेगी। बेबीनार को सम्बोधित करते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो प्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा की शिक्षण और प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य व्यक्ति को सफल जीवन जीने के लिए सशक्त बनाना तथा स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए सर्वश्रेष्ठ योगदान देना है। इसमें शिक्षक और शिक्षार्थी की भूमिका सबसे प्रभावी साबित हो सकती है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए अपनी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा पौराणिक ग्रंथों में मानवता को सबसे बड़ी शिक्षा और धर्म बताया गया है। प्रो त्रिपाठी ने वैश्विक महामारी के दौरान ‘विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ने वाले प्रभाव’ के बारें में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह लॉक डाउन के चलते विद्यार्थियों से लेकर शिक्षण संस्थानों को कठिनाईओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा हमें डिजिटल प्लेटफार्म पर इन चुनौतियों का सामना करना होगा तभी अपने उद्देश्यों की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा, ष्महामारी का शिक्षा पर पहले से ही गहरा प्रभाव पड़ा है क्योंकि दुनिया में लगभग सभी जगह शिक्षण सस्थाएं बंद हैं। यह हमारे जीवनकाल में सभी शिक्षा प्रणालियों के लिए सबसे बड़ा झटका है जिसका हमें मिलजुल कर मुकाबला करना होगा।
पूर्णिमा विश्व विधालय के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ मनोज गुप्ता ने विश्वविधालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। डॉ दिव्य प्रकाश, एचओडी, सिविल इंजीनियरिंग ने बेबीनार के आयोजन के बारे में बताया। प्रश्नोत्तरी का संयोजन डॉ मोनिका ओझा खत्री ने किया। उप कुलपति डॉ एस सी पाधी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विश्व विधालय के निदेशक राहुल सिंह सहित राजधानी के विभिन्न विश्व विधालय के शिक्षक और विधार्थी भी उपश्थित थे।

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