चीन से तनाव के बीच खुद को और मजबूत करने में जुटी सेना

50 KM की मारक क्षमता वाले गोला-बारूद खरीदने की तैयारी

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ तनाव के हालात बने हुए हैं। इस बीच भारत सरकार सेना को हर मोर्चे पर मजबूत करने में जुटी हुई है। सेना को इमरेंसी के हालात के लिए खुद को तैयारी करने के लिए हरी झंडी दे दी गई है। सरकार के आदेश के बाद अब सेना भी खुद को और मजबूत करने में जुट गई है। 50 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले गोला और बारूद का ऑर्डर देने के लिए प्लानिंग कर रही है।
इस उत्कृष्ट गोला-बारूद को सेना ने पिछले साल अपनाया था। पहाड़ों में आबादी को नुकसान पहुंचाए बिना दुश्मन पर निशाना साधने में यह असरदार है।
रक्षा सूत्रों ने एएनआई के हवाले से बताया है कि अब वित्तीय ताकतें फिर से सशस्त्र बलों को दे दी गई हैं और अल्ट्रा लाइट तोप द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गोला-बारूद के लिए बार-बार आदेश देने की योजना है, जिसे ऊंचाई वाले पहाड़ों पर आसानी से तैनात किया जा सकता है।
पिछले साल के आदेशों के बाद, सेना ने अक्टूबर समय सीमा तक अमेरिका से गोला-बारूद खरीदना शुरू कर दिया था। अब जब चीन ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ लगे पोस्ट पर भी अपनी तोपें रखी हैं। इसके बाद सेना के उप प्रमुखों को भी इसकी कमी महसूस हुई है। उस कमी को दूर करने के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रियाओं के तहत आवश्यक हथियार प्रणालियों का अधिग्रहण करने के लिए प्रति प्रोजेक्ट 500 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां दी गई हैं।
पूर्वी लद्दाख में चीनी की हरकतों और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ-साथ वहां बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को तैनात करने के बाद सरकार द्वारा इस शक्ति को फिर से सेना को देने की आवश्यकता महसूस की गई थी। उड़ी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमलों के बाद सशस्त्र बलों को भी ऐसी ही वित्तीय शक्तियां दी गई थी।

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