कौन है बीजेपी में बगावत की स्क्रिप्ट का राइटर !

      खैर, स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह के  मंत्री पद छोड़ने के दौरान दोनों की एक जैसे हाव-भाव और राज्यपाल आनंदीबेन को लिखे पत्र की भाषा में एकरूपता काफी कुछ कह रही है  दोनों ने ही अपने इस्तीफे का कारण दलितों-पिछड़ों की अनदेखी बताया है। दारा सिंह चौहान ने एक कदम आगे बढ़कर इसे पिछडों-दलितों के आरक्षण से भी जोड़ दिया। ऐसे में स्वामी कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने भी भाजपा सरकार पर अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ों के आरक्षण से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरक्षित पदों पर सामान्य लोगों की भर्ती की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों में ऐसा ही किया है। सरकारी संस्थानों को निजी क्षेत्र में दिया जा रहा है। इसका सीधा असर दलितों-पिछडों के आरक्षण पर पड़ेगा। सांसद पुत्री संघमित्रा के पिता द्वारा अभी भाजपा न छोड़ने के सवाल पर कहा कि अभी इंतजार करिए धार देखिए और धार की वार देखिए। 14 को सब साफ हो जाएगा।
राज्यपाल को भेजे अपने इस्तीफे वाले पत्र में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि महोदय, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मंत्रिमंडल में श्रम एवं सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वाहन किया है किंतु दलितों, पिछड़ों, किसानों बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से मैं इस्तीफा देता हूं।
उधर,दारा सिंह चौहान  द्वारा राज्यपाल को भेजे त्यागपत्र में दारा सिंह ने लिखा, मैंने पूरे मनोयोग से अपने विभाग की बेहतरी के लिए काम किया, लेकिन योगी सरकार की पिछड़ों, वंचितों, दलितों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के साथ-साथ पिछड़ों और दलितों के आरक्षण के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे आहत होकर मैं उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहा हूं।
राज्यपाल को भेजे अपने इस्तीफे में मंत्री ने कहा, महोदय, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मंत्रिमंडल में श्रम एवं सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वाहन किया है किंतु दलितों, पिछड़ों, किसानों बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से मैं इस्तीफा देता हूं।
 बहरहाल बीजेपी आलाकमान अब सचेत हो गया है. और वह हर उस नेता से बात कर रहा है जो नाराज लग रहा है, जिसके पार्टी छोड़ने की चर्चा है. वैसे जानकारों का कहना है कि अभी इसमें और भी तेजी आएगी.जब टिकट के बंटवारे का फैसला हो जाएगा तो कई दलों के नेता टिकट ना मिलने की सूरत में इधर उधर-भाग या   बगावत कर सकते हैं.
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)
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