सतर्क रहें तीसरे लहर की दस्तक

देवानंद राय
कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रान देश में दस्तक दे चुका है देश के कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू भी शुरू हो चुकी है तथा कहीं-कहीं पर प्रतिबंध लगने भी शुरू हो रहे हैं यह समय है हम सभी को सतर्क रहने का जागरूक रहने का और उन गलतियों को भूल कर भी न करने का जिन गलतियों को हमने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किया था पिछले वर्ष भी दिसंबर के इसी महीने से दूसरे लहर की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी जो मार्च-अप्रैल और मई के महीने में विकराल रूप धारण कर लिया था इसलिए आवश्यक है कि हम सभी कोरोना से बचाव के सभी तरीकों का सही ढंग से पालन करें मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाएं और जल्द से जल्द अपना वैक्सीनेशन कराएं। समय इस बात पर अब बहस करने का नहीं है कि किसे दोष दिया जाए और किसके कारण यह लहर फिर आ रही है क्योंकि सबको अपना घर चलाना है सबको अपनी रोजगार को जारी रखना है परंतु जिस तरीके से विदेशों में कोरोना की तीसरी लहर घातक साबित हो रही है उससे हमें सीख लेना होगा और सर्वप्रथम विदेश से आने वाले लोगों की जांच,टेस्टिंग, सैंपलिंग करनी होगी तथा एक युद्ध स्तर चलाकर ऐसे लोगों का वैक्सीनेशन तथा बूस्टर डोज के विकल्प पर ध्यान देना होगा।
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का सबसे पहले पता लगाने वाली और साउथ अफ्रीकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एंजेलिक कोएत्जी ने कहां कि जिन लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज लगवाए हैं उन पर इसका असर कम होगा। पिछले वर्ष हमारी स्वास्थ्य सेवाएं धारा सही हो गई थी बेहतर यही है कि वर्तमान समय में राज्य सरकारों के अस्पतालों में बेड बढ़ाए जा रहे हैं परंतु ऑक्सीजन प्लांट पर कोई खास सक्रियता नहीं दिख रही है इस पर ध्यान देना होगा राजनेताओं को भी इस बात पर ध्यान देना होगा कि सिर्फ नियम बनाकर अगर वह उस नियम का पालन करें और तोड़ने लगे समाज में गलत संदेश जाता है रैलियों में उमड़ रही भीड़ इस बात का सटीक उदाहरण है एक तरफ आप कहते हैं कि सार्वजनिक स्थलों या विवाह कार्यक्रमों में 200 से अधिक लोग नहीं हो सकते वहीं रैलियों में हजारों और लाखों की भीड़ के दावे किए जाते हैं तो हम फिर किस तरीके से पूर्ण कोरोना से जीतने के प्रबंधन सही कर पाएंगे देश के उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय की रैलियों पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं उम्मीद है सरकार इस पर ध्यान देंगी कई विशेषज्ञ तथा डॉक्टर का कहना है कि कोरोनावायरस इतना घातक नहीं है जितना कि पिछला वाला था परंतु हमें अब भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि मुसीबत कभी भी बता कर नहीं आती है इस कारण हमें सिर्फ कोरोना से बचाव के सहज और सरल तरीके जैसे मास्क लगाना सोशल डिस्टेंसिंग को फिर से अपना हाथों को सैनिटाइज करना और खुद वैक्सीन लगाना तथा दूसरों को भी व्यक्ति ने प्रेरित करना ताकि हम सभी भागीदारी के द्वारा इस महामारी से बचा सके। सचेत रहें, सुरक्षित रहें !
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