पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है प्लास्टिक

बाल मुकुन्द ओझा

वर्तमान में बंदिश के बावजूद हर जगह उपलब्ध होने वाली पॉलीथिन पूरे जीव-जगत पर संकट खड़ा कर रही है। फिर भी लोग इसके उपयोग से गुरेज नहीं कर रहे हैं। यह पर्यावरण के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है, इस पर न तो सरकार गंभीर हो रही और न ही आम लोग। गली-कूचों से लेकर हर ओर पॉलीथिन फेंके पड़े रहते हैं, लेकिन इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली में हर रोज 690 टन, चेन्नई में 429 टन, कोलकाता में 426 टन के साथ मुंबई में 408 टन प्लास्टिक कचरा फेंका जाता है। प्लास्टिक न केवल इंसानों, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के लिए भी खतरनाक है, लेकिन प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण सबसे अहम पर्यावरणीय मुद्दों में से एक बन गया है।
पीने के पानी से लेकर खाने की प्लेट तक प्लास्टिक हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन गया है। प्लास्टिक सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प है। इसलिए हमारी रोजमर्रा की चीजें या तो प्लास्टिक से बनी होती हैं या उनके निर्माण में प्लास्टिक की भूमिका होती है। प्लास्ट इंडिया फाउंडेशन के मुताबिक फिलहाल भारत में 1 करोड़ 20 लाख मैट्रिक टन प्लास्टिक की खपत होती है। जिसके 2020 तक 2 करोड़ मैट्रिक टन पहुंचने की संभावना है। अकेले महाराष्ट्र में रोजाना करीब 1800 टन का प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इस कचरे से हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। साथ ही प्लास्टिक हमारी सेहत के लिए भी हानिकारक है। प्लास्टिक के कणों से कैंसर होने का खतरा रहता है। साथ ही प्लास्टिक बैग में खाना रखने से हानिकारक तत्व जाने काभी खतरा होता है।
केन्द्रीय पर्यावरण नियन्त्रण बोर्ड के एक अध्ययन के मुताबिक एक व्यक्ति एक साल में 6 से 7 किलो प्लास्टिक कचरा बिखेरता है। इस प्लास्टिक कचरे से नालियां बंद हो जाती है, धरती की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है, भूगर्भ का जल अपेय बन जाता है, रंगीन से कैंसर जैसे असाध्य रोग हो जाते हैं। आज वैश्विक स्तर पर प्रतिव्यक्ति प्लास्टिक का उपयोग जहां 18 किलोग्राम है वहीं इसका रिसायक्लिंग मात्र 15.2 प्रतिशत ही है। प्लास्टिक प्रदूषण मानव जीवन के समक्ष एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुखिया श्री इरिक सोलहिम ने कहा है प्लास्टिक पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। जब बड़ा प्लास्टिक छोटे टुकड़ों में विभाजित होता है तो छोटे टुकड़े धीरे-धीरे समुद्र पहुंच जाते हैं। इन छोटे प्लास्टिक के टुकड़ों को मछलियां खा जाती हैं। हम मछली खाते हैं और यह प्लास्टिक हमारे शरीर में पहुंच जाता है। इस प्रकार प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का जमीन या जल में इकट्ठा होना प्लास्टिक प्रदूषण कहलाता है जिससे मानवों के जीवन पर बुरा प्रभाव पडता है। मानव द्वारा निर्मित चीजों में प्लास्टिक थैली एक ऐसी वस्तु है. जो जमीन से आसमान तक हर जगह मिल जाती है। पर्यटन स्थलों, समुद्री तटो, नदी नालों, खेतों खलिहानों, भूमि के अंदर बाहर सब जगहों पर आज प्लास्टिक के कैरी बैग्स अटे पड़े है। घर में रसोई से लेकर पूजा स्थलों तक हर जगह प्लास्टिक थेलिया रंग बिरंगे रूप में देखने को मिल जाएगी। चावल, दाल,तेल, मसाले, दूध, घी, नमक, चीनी आदि सभी आवश्यकता के सामान आजकल प्लास्टिक-पैक में मिलने लगे हैं। आज प्रत्येक उत्पाद प्लास्टिक की थैलियो में मिलता है जो घर आते आते कचरे में तब्दील होकर पर्यावरण को हानि पंहुचा रहा है। वर्तमान में प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है। दुनिया भर में अरबों प्लास्टिक के बैग हर साल फेंके जाते हैं। ये प्लास्टिक बैग नालियों के प्रवाह को रोकते हैं और आगे बढ़ते हुए वे नदियों और महासागरों तक पहुंचते हैं। चूंकि प्लास्टिक स्वाभाविक रूप से विघटित नहीं होता है इसलिए यह प्रतिकूल तरीके से नदियों, महासागरों आदि के जीवन और पर्यावरण को प्रभावित करता है। प्लास्टिक प्रदूषण के कारण लाखों पशु और पक्षी मारे जाते हैं जो पर्यावरण संतुलन के मामले में एक अत्यंत चिंताजनक पहलू है। आज हर जगह प्लास्टिक दिखता है जो पर्यावरण को दूषित कर रहा है। जहां कहीं प्लास्टिक पाए जाते हैं वहां पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और जमीन के नीचे दबे दाने वाले बीज अंकुरित नहीं होते हैं तो भूमि बंजर हो जाती है। प्लास्टिक नालियों को रोकता है और पॉलीथीन का ढेर वातावरण को प्रदूषित करता है। चूंकि हम बचे खाद्य पदार्थों को पॉलीथीन में लपेट कर फेंकते हैं तो पशु उन्हें ऐसे ही खा लेते हैं जिससे जानवरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यहां तक कि उनकी मौत का कारण भी।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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