टीएमयू का दुनिया को एक और तोहफा, अब स्वदेशी ऑक्सीनेटर !

ऑक्सीनेटर का पोर्टेबल एडिशन आने को तैयार

प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

@ chaltefirte.com                                    मुरादाबाद।  अंग्रेजी की एक मशहूर कोटेशन है, “नीड इज द मदर ऑफ इन्वेंशन”, कोविड काल की काली स्याही का एक उजाला पक्ष भी है।तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एनिमेशन विभाग की सीनियर फैकल्टी  प्रदीप कुमार गुप्ता को मिस्टर आइडिया भी कहा जाए तो भी कोई अतिशयोक्ति न होनी चाहिए। उन्होंने परिवार पर कोविड-19 की सेकेण्ड वेव में उस वक्त दुखों का पहाड़ टूटा, जब उनका छोटा बेटा कोरोना की चपेट में आ गया।शहर में लॉकडाउन। चौतरफा पुलिस का पहरा। अस्पतालों में बेशुमार कोरोना पीड़ित। ऑक्सीजन की भारी किल्लत।ऐसे में होम क्वारंटाइन ही अंतिम विकल्प था। बेटे को ऑक्सीजन की कमी महसूस होने पर मिस्टर आइडिया को एक इन्नोवेटिव आइडिया सूझा और तीन दिन के अथक प्रयासों से घर में ही कुछ मात्रा में ऑक्सीजन बनाने में कामयाब हो गए। हालांकि उनके बेटे को ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं हुई, लेकिन एक इन्नोवेटिव विचार जन्म ले चुका था। उन्होंने अपने दीगर इन्नोवेटिव सहयोगियों के साथ टीम बनाकर इस मशीन के विकास को जारी रखा।100 दिन की कडी मेहनत, पचास असफलताओं के बाद उन्होंने इस ऑक्सीजन जनरेटर का एक कामर्शियल प्रोटोटाइप बना दिया। यह उपकरण समाज और दुनिया के लिए एक वरदान साबित  होगा ख़ास बात यह है, ऑक्सीनेटर पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसकी कीमत भी विदेशी कॉन्संट्रेटर की तुलना में एक चौथाई है, जहां इम्पोर्टेड कन्संट्रेटर 50,000/- से 1,50,000/- रुपए के बीच आते है वहीं यह ऑक्सीनेटर मात्र 15-20 हजार रुपए के बीच में बन जाएगा। यह मशीन अस्थमा, न्यूमोनिया और कोरोना के होम क्वारंटाइन मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगी । इसका रख-रखाव सस्ता और आसान है।यह उपकरण पानी के इलेक्ट्रोलीसिस के सिद्धांत पर काम करेगा। फिलहाल इसका प्रोटोटाइप तीन लीटर प्रति मिनट की दर से सत्तर प्रतिशत ऑक्सीजन बनाता है लेकिन इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। इस मशीन के कार्मिशयल उत्पादन के लिए कई कम्पनियां इच्छुक हैं।

इस स्वदेशी ऑक्सीनेटर के विकास में उनकी टीम के सदस्यों अनुभव गुप्ता, अर्चना रविंद्र जैन, अंकित कुमार , अरुण कुमार पिपरसेनिआ,  नवनीत कुमार विश्नोई , विनीत सक्सेना, ज्योति रंजन और संदीप सक्सेना का सक्रिय सहयोग रहा है। टीम ने इस आविष्कार के पेटेंट के लिए भारत के बौद्धिक सम्पदा  विभाग में आवेदन किया ।  पेटेन्ट विभाग ने इस पेटेंट आवेदन को प्रकाशित भी कर दिया । उम्मीद की जाती है, पेटेन्ट विभाग शीघ्र ही इसका परीक्षण कर पेटेन्ट जारी कर देगा।

प्रदीप कुमार गुप्ता अब इस ऑक्सीनेटर के पोर्टेबल एडिशन को विकसित करने में जुट गए हैं। यह पोर्टेबल ऑक्सीनेटर मरीज को घर से अस्पताल ले जाने में प्राणरक्षक की भूमिका अदा करेगा। बैटरी से चलने वाला यह ऑक्सीनेटर हल्का होगा और एक बार की चार्जिंग में करीब 4 घंटे चलने में सक्षम होग। इसके अतिरिक्त इसे कार के मोबाइल चार्जर पोर्ट के जरिए भी चलाया जा सकेगा।

उनका मानना है कि समस्याओं को देखने से लक्ष्य नहीं दिखाई देता, लेकिन लक्ष्य को  केन्द्रित करने से समाधान  मिलते हैं। वह लम्बे समय से इनोवेशन और इन्वेंशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनके सभी इन्नोवेशन जन सामान्य से जुड़ी समस्याओं से ताल्लुक रखते हैं। उनके आविष्कार अत्यंत सरल तकनीकों पर आधारित हैं। उन्होंने एक बिजली पैदा करने वाला गेट बनाया, जिसे केंद्र सरकार के नेशनल रिसर्च एंड डवलपमेंट कारपोरेशन – एनआरडीसी ने चयनित कर उसके पेटेंट के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त वे पेडल इलेक्ट्रिक जनरेटर, कचरे से ईंटे तथा इंडोर सोलर स्टोव का विकास भी कर चुके हैं। उनको मोबाइल प्रोजेक्टर को टॉयकोथॉन – 2021 के फाइनल राउंड के लिए चयनित किया जा चुका है।उनके पास एक दर्जन से अधिक इन्नोवेटिव आइडियाज हैं, जिन पर वह आने वाले वर्षों में कार्य करते रहेंगे।

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