नवभारत का निर्माण करते नरेंद्र मोदी

17 सितंबर- जन्मदिन पर विशेष

देवानंद राय

” मैं नरेंद्र दामोदरदास मोदी ईश्वर की शपथ लेता…… यह आवाज जब लोगों ने 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी देश के 15 वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले रहे थे तब सुनी होगी तो यह जरूर लगा होगा कि सालों बाद कोई अपने बीच से निकलकर प्रधानमंत्री जैसे बड़े पद पर पहुंचा है। एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन गया 2014 में यह चर्चा पूरे देश में हर जगह हर चौराहे पर हो रही थी पर वही कुछ ऐसे भी लोग रहे जिन्हें यह समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ ? शायद वह जनता के बदलते रुख और बदलते समय को समझ ही नहीं पाए और वे अब भी नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें लगा कि 2014 की यह जीत भारतीय जनता पार्टी को कोई और विकल्प न होने के कारण मिल गई पर ऐसा नहीं था क्योंकि उस लोकसभा चुनाव के बाद और कई विधानसभा चुनाव हुए जिसमें बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की तब लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाकई राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदलने की तरकीब जानते हैं।

सामान्य जनमानस अगर संघ के कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री की यात्रा को देखता है तो यह एक असंभव सी यात्रा को संभव कर देने जैसा है। 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा जिला के वडनगर ग्राम में जिले में जन्मे नरेंद्र मोदी के माता का नाम हीराबेन मोदी तथा पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था। चाय बेचने वाले बाल नरेंद्र से संघ प्रचारक के युवा नरेंद्र और पूरे देश के नरेंद्र बनने की यात्रा हमें बहुत कुछ सिखाती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना चाहिए और लक्ष्य को नहीं भूलना चाहिए। 1971 में जब वे संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने तो एक युवा के रूप में मैं यह कह सकता हूं कि उन्होंने कभी अपने लक्ष्य को नहीं भूला होगा हां यह जरूर हो सकता है कि उन्हें जब जैसा दायित्व पार्टी और संघ ने दिया उसे बखूबी निभाया पर राजनीति की मुख्यधारा में आने का विचार तो जरूर रहा होगा।मेरा मानना है कि सिर्फ विचारों के संप्रेषण मात्र से देश और समाज को उतना नहीं बदला जा सकता जितना कि अगर हमारे पास विचार के साथ सत्ता का पावर भी हो तो यह स्थिति सोने पर सुहागा जैसा होगा। सौभाग्य से मोदी जी के पास यह दोनों है उनके पास “देश को आगे ले जाने का विजन है, विश्व मंच पर भारत का नेतृत्व करने का क्षमता है देश या विदेश में अपने भाषण शैली से छा जाने का की प्रतिभा है” यही चीजें उन्हें औरों से अलग बनाती है। इस देश में अनेक पीएम हुए पर हर कोई जनता का चहेता नहीं बन पाया और ना वह खुद जनता से जुड़ पाए। पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री, पाकिस्तान के टुकड़े करने वाली इंदिरा गांधी, राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री रहे जो अब भी जनता के चहेते बने हैं। पर वर्तमान प्रधानमंत्री जनता के चहेते भी हैं और जनता से जुड़े हैं। आज सोशल मीडिया के युग में वे हर सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म से जुड़े हैं तो वहीं रेडियो के द्वारा मन की बात से और अधिक सुदूर क्षेत्र में जुड़ने का मौका मिला। पत्रों का जवाब देना जन्मदिन पर लोगों को संदेश भेजना यह निश्चित तौर पर उन्हें विशिष्ट बनाती है। जन धन योजना, आधार से जोड़ने तथा मन की बात इन तीनों को संक्षेप में “जैम” कहा गया इन कार्यक्रमों ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया तो वही विश्व योगा दिवस मनाना तथा अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस क्या गठन करना उन्हें वैश्विक मंचों पर बड़ा सम्मान दिलाया तथा वर्तमान समय में क्वाड की चर्चा ने उन्हें पूरे विश्व में कूटनीति तथा राजनीति का गुरु मान लिया है। आज पूरा भारत आजादी के 75वें वर्षगांठ के कार्यक्रम में उत्सव मनाता नजर आ रहा है। हर हफ्ते हर महीने से संबंधित कुछ न कुछ कार्यक्रम हो रहे हैं, लोगों को आजादी के अपनेपन का एहसास कराता भूले स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारियों को याद दिलाने का यह अनूठा कार्यक्रम है। आज सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में नया भारत, न्यू इंडिया, ब्रांड इंडिया की बात चल रही है पर यह नया भारत है क्या ? नया भारत वो भारत है जो अपने भीतर भारत के 5000 साल पुराने महान सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान रखे हैं तो नए जमाने के टेक्नोलॉजी के नॉलेज पावर से भी लैस है जो “ना तो आंख झुका के बात करता है, ना आंख उठा कर बात करता है, यह आंख में आंख डाल कर बात करता है” जो पंचशील को भी मानता है और हमारी तरफ आंख उठाने पर जबरदस्त पंच भी मारता है। यूं ही नहीं कोई नरेंद्र मोदी बन जाता संघर्ष की भट्टी में तपना पड़ता है फिर चेहरे पर तेज आता है जो औरों को स्वत: ही अपनी और आकर्षित कर लेता है। राष्ट्रीय युवा संसद में जब मैं अपने प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए विज्ञान भवन में उनसे मिला तब उनके चेहरे का तेज और आभामंडल को बेहद करीब से देख और समझ पाया था। नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही देश हित को सर्वोच्च स्थान पर रखा याद करें 26 मई 2014 को जब उन्होंने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली तो शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्ष क आमंत्रित करके एक नया कूटनीतिक संदेश दिया तो वही 30 मई 2019 को जब उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री का शपथ लिया तो बिम्सटेक देशों के प्रमुखों को बुलाया। अब भारत लुक ईस्ट नीति के जगह एक्ट ईस्ट नीति पर कार्य कर रहा है। हमारे प्रधानमंत्री को विश्व के कई देशों के द्वारा वहां के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है जिसमें 2016 में सऊदी के सर्वोच्च सम्मान आर्डर ऑफ अब्दुल अजीज तथा अफगानिस्तान के स्टेट ऑर्डर ऑफ गाज़ी अमीर अमानुल्लाह खान 2018 में फिलीस्तीन के सर्वोच्च सम्मान ग्रांड कॉलर ऑफ फिलिस्तीन 2018 में यूनाइटेड नेशन ने उन्हें चैंपियन चैंपियन आफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित किया तो इसी वर्ष सियोल पीस प्राइज से भी सम्मानित हुए तथा 2019 में यूएई के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर आफ जायेद तथा 2019 में ही रूस के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर आफ सैंट एंड्रयू से भी सम्मानित किया गया और 2019 में  बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के द्वारा ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड से सम्मानित हुए तथा 2020 में अमेरिका के लीजन ऑफ मेरिट सम्मान से सम्मानित किया गया।एक प्रधानमंत्री के अलावा वे एक कवि,लेखक तथा सामाजिक चिंतक भी है। उन्होंने बचपन में सामाजिक भेदभाव पर “पीलू फुल” नाटक लिखा था तथा गुजराती में उन्होंने उनका काव्य संग्रह ‘आंख आ धन्य छे’ तो वही हिंदी में “सामाजिक समरसता” और “साक्षी भाव” जैसी पुस्तके लिखें तथा “एग्जाम वॉरियर्स” पुस्तक जो वर्तमान समय में युवाओं के बीच काफी प्रसिद्ध है जो युवाओं को परीक्षा के दबाव से निजात दिलाने में काफी सहायता करता है।

इस देश में प्रधानमंत्री आते जाते रहेंगे पर वर्तमान समय में नरेंद्र मोदी जी ने न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में जो अपनी धाक जमाई है उसे कोई भारतीय भूल नहीं सकता जब  विदेशी धरती पर लोग मोदी मोदी के नारे लगाते हैं और जब हाउडी मोदी कार्यक्रम में एनआरजी स्टेडियम में अमेरिका के मंत्री, संसद एक पंक्ति में खड़े होकर उनसे मिलने की प्रतीक्षा करते हैं तो ऐसा लगता है कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हो चला हैजब भारत चीन विवाद पर सीमा पर जाकर हमारे जवानों का हौसला बढ़ाते हैं तो ऐसा लगता है कि हमने सही व्यक्ति के हाथों में सत्ता सौंपी है 2020 के टोक्यो पैरा ओलंपिक खेलों में जब अन्य देशों के खिलाड़ी इस बात पर आश्चर्य करते हैं कि भारत का प्रधानमंत्री खिलाड़ियों से फोन पर बात करता है तो निश्चित तौर पर यह नए भारत का नया रूप देखने को मिलता है। उम्मीद है कि वह ऐसे ही भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन करते रहेंगे तथा देश में और अधिक जनकल्याणकारी योजनाओं को चलाएंगे। प्रधानमंत्री जी आपको जन्मदिवस  की  ढेर सारी बधाइयां।
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