मोदी है तो मुमकिन है

17 सितंबर-जन्मदिन पर विशेष

बाल मुकुन्द ओझा

देश और दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 71 वर्ष के हो गए। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक 21 साल का बेमिसाल सफर पूरा करने वाली यह शख्सियत नरेन्द्र दामोदर दास मोदी आज ग्लोबल लीडर के रूप में अपनी पहचान कायम करने में सफल हुए है। देश में बहुत से लोग नरेंद्र मोदी में सरदार पटेल की छवि देखते है। दोनों ही गुजराती है और अपने अपने क्षेत्र के बेहद प्रभावशाली शासक। सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया तो मोदी ने कश्मीर में एक ध्वज, एक निशान और एक संविधान का जनसंघ के पितृ पुरुष का सपना साकार किया। मोदी ने अनेक ऐतिहासिक कार्यों को अंजाम देकर मोदी है तो मुमकिन है की अपनी छवि बनाई।
मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। मोदी ने बचपन में वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता की मदद की। बाद में वह बस स्टैंड के पास अपने भाई के साथ एक चाय स्टॉल चलाने लगे। बताया जाता है जब मोदी 8 साल के थे तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए। कहा जाता है मोदी पर कलम चलना खांडे की धार पर चलने के सामान है। लाल बहादुर शास्त्री के बाद नरेंद्र मोदी देश के ऐसे प्रधानमंत्री है जो एक साधारण परिवार से निकलकर सर्वोच्च पद पर आसीन हुए। मोदी की कहानी एक चाय वाले से शुरू होती है। इस दौरान उन्होंने देश के जनजीवन की बारीकियों को नजदीकी से देखा। शंकर सिंह वाघेला से सियासत के गुर सीखे। पहले आडवाणी और फिर मुरली मनोहर के रथ पर कृष्ण की भांति सारथि के रूप में सवार होकर देश की राजनीति के ताने बाने को बुना। अभिमन्यु की भूमिका का निर्वहन किया मगर चक्रव्यूह को तौड़ने में सफल हुए। संघ के एक विनम्र स्वयं सेवक की तरह देश की नब्ज को पहचानने में सफल हुए। कभी साईकिल तो कभी स्कूटर पर बैठ कर गांव गांव का भ्रमण किया। आम आदमी के सुख दुःख में अपनी भागीदारी दी। उनके साथ मिल बैठकर लोगों की समस्याओं से रूबरू हुए। फिर एक दिन केशु भाई की नैय्या डगमगाई तो आडवाणी की सलाह पर वाजपेयी ने मोदी को सीधे गुजरात की गद्दी सौंप दी। आजाद भारत में ऐसे उदहारण मिलने मुश्किल है।
मोदी ने पहली बार सन 2001 में विधान सभा चुनाव लड़ा और राजकोट से विधायक बने। उसके बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। दरअसल उस समय केशुभाई पटेल का स्वास्थ्य खराब हो गया था और दूसरी तरफ उपचुनाव में भाजपा राज्य की कुछ विधानसभा सीटें हार गई थी। जिसके बाद बीजेपी की राष्ट्रीय लीडरशिप ने केशुभाई पटेल के हाथ से नेतृत्व की बागडोर मोदी को थमा दी। इस भांति उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार सौंपा गया। मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 13 साल तक शासन किया। गुजरात में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ग्रहण की थी। मोदी 2001 से 2014 तक प्रधानमंत्री बनने तक गुजरात के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला।
जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की और से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मेदवार घोषित किया गया। जहा कई लोगो ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था। वहीँ कई लोगो का मानना था की मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी को लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर एतिहासिक जीत दिलवाई। नरेंद्र मोदी ने 2014 में और फिर 2019 में भारतीय जनता पार्टी की प्रभावशाली जीत का नेतृत्व किया। मोदी के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि वह पहली बार विधायक के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसी तरह वह पहली बार सांसद के रूप में सीधे भारत के प्रधान मंत्री बने।
प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अनेक गरीब कल्याण और विकास की योजनाओं का सञ्चालन किया जिनमें स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री उज्जवाला योजना , प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, गरीब कल्याण योजना, गरीब कल्याण योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के अलावा नमामि गंगे, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना, सर्व शिक्षा अभियान, स्टैंड अप इंडिया आदि मुख्य है। कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने, अल्पसंख्यकों की कुप्रथा तीन तलाक का खात्मा, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक, गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान और नागरिकता संशोधन कानून का ऐतिहसिक फैसला मोदी सरकार की विशेष उपलब्धि है।
अनेक वैश्विक संस्थाओं ने भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को देश और दुनिया का शानदार नेता और काबिल प्रधानमंत्री घोषित कर उनके कार्यों की भूरी भूरी सराहना की। मोदी में गजब का आत्मविश्वास है। प्रखर और कुशल वक्ता के रूप में उनकी राष्ट्रीय पहचान है। लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में उन्होंने अपने नेता अटल बिहारी को भी पीछे छोड़ दिया है। भाजपा के लगभग सभी नेताओं ने उनके करिश्माई नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है जिनमें वरिष्ठ नेता भी शामिल है।
ऐसा भी नहीं है मोदी ने अपनी जीवन यात्रा में केवल सफलता के सोपान ही तय किये है। कुछ राजनीतिक टीकाकारों का कहना है आर्थिक मोर्चे सहित नोटबंदी, बेरोजगारी, कालेधन की वापसी, बढ़ती महंगाई और किसान आंदोलन जैसे मुद्दे मोदी की लोकप्रियता में पैबंद का काम करते है।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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