आउटकम बेस्ड एजुकेशन में टीएमयू देश में अव्वल

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह ने दिल्ली में रिसीव किया यह प्रतिष्ठित अवार्ड

@ chaltefirte.com            मुरादाबाद।तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। यूनिवर्सिटी ने आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन (ओबीई) में देश में अव्वल स्थान हासिल किया है। इंडियन ऑब्जर्वर पोस्ट की ओर से टीएमयू को आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन इन इंडिया 2020-21 अवार्ड से नवाज़ा गया। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेन्टर में आयोजित लीड ग्लोबल कॉन्क्लेव अवार्ड – 2020-21 में आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन अवार्ड के अलावा पाँच और श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। इस मौके पर यूपीटीयू के भूतपूर्व वीसी एवं आईआईटी (रूड़की) के भूतपूर्व निदेशक डॉ. प्रेमव्रत बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे तो एनबीए के चेयरमैन प्रो. केके अग्रवाल, त्रिनिदाद के राजदूत डॉ.रोजर गोपोल, एआईयू के सेक्रेट्री जनरल डॉ. पंकज मित्तल, मॉरीशस में भारतीय राजदूत अनूप मुद्गल की गरिमाई मौजूदगी रही। टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, एमजीबी अक्षत जैन ने इस अवार्ड को यूनिवर्सिटी की फैकल्टी और स्टुडेट्स को समर्पित करते हुए कहा, आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन अवार्ड से टीएमयू को नई पहचान मिलेगी।
अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि डॉ. प्रेमव्रत ने कहा, एटिट्यूड जीवन की सतत सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आपका एटिट्यूड नकारात्मक है तो चाहें आपमें कितना ही स्किल हो, लेकिन लम्बे समय तक आप सफल नहीं रह सकते हैं। भविष्य में अगर हमें चुनौतियों का सामना करना है तो हमारे स्टुडेन्ट्स को सही एटिट्यूड डवलप करना होगा। प्रो. केके अग्रवाल ने कहा, हमारी शिक्षा प्रणाली आउटकम बेस्ड होनी चाहिए। स्किल्स और क्रिटिकल थिंकिंग पर ज्यादा फोकस करना होगा। आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन अवार्ड प्राप्ति के बाद तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. रघुवीर सिंह ने कहा, यह अवार्ड 2 बरस की कड़ी मेहनत का प्रतिफल है। इस दौरान हमारी यूनिवर्सिटी ने गहन-मंथन के बाद रोडमैप तैयार किया कि हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि न्यू एज़ुकेशन पॉलिसी को कड़ाई से लागू किया जा सके। प्रो.सिंह ने कहा, भविष्य में हमारा फोकस हमेशा आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन पर रहेगा। आउटकम बेस्ड एज़ुकेशन ब्लूम टेक्सोनोमी पर आधारित है। टीएमयू ने 120 प्रोग्राम्स से ज्यादा के लिए पाठ्यक्रमों को आउटकम बेस्ड बनाया। 3000 से अधिक कोर्स के लिए आउटकम निर्धारित किए हैं। ओबीई के क्रियान्वयन के लिए फैकल्टी को सघन ट्रेनिंग दी गई है। वीसी, यानी, मेरी अध्यक्षता में बार-बार आउटकम्स का रिव्यू हुआ। फैकल्टी को आउटकम्स प्राप्ति के लिए कैसे पढ़ाया जाए और कैसे मूल्यांकन हो, इसका भी सघन प्रशिक्षण दिया गया। मुझे इस बात की खुशी है, सभी के अथक प्रयासों से यूनिवर्सिटी में सभी प्रोग्राम्स में आउटकम बेस्ड प्रणाली लागू हो चुकी है। उम्मीद करता हूँ, आने वाले समय में विद्यार्थियों की लर्निंग में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। नतीजतन ये स्टुडेन्ट्स भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहेंगे।

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