टोक्यो पैरा ओलंपिक बना भारत का गोल्डन पैरा ओलंपिक

देवानंद राय
याद करे कुछ साल पहले भारत ओलंपिक में एक-एक पदक के लिए तरस जाया करता था। गोल्ड मेडल तो दूर की  कौड़ी थी पर भारत के हालिया प्रदर्शन ने पूरे दुनिया को चौंका दिया है और हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने पूरे देश का दिल जीत लिया है। पैरा ओलंपिक खेलों में तो हमने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 19 मेडल जीते हैं जिसमें एक नहीं दो नहीं कुल पांच स्वर्ण पदक जीते है। इस देश में गोल्ड मेडल जीतना दुनिया जीतने के बराबर ही है तो वही ओलंपिक सिर्फ अब खेल नहीं रह गया है। यह पूरे दुनिया में एक प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का ही नतीजा है जिसने भारत का नाम पूरे विश्व में ऊंचा कर दिया और हम सिर्फ गोल्ड मेडल ही नहीं जीते बल्कि इस पैरा ओलंपिक खेलों में हमने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की।जिसमें अवनी लेखरा आ का राइफल शूटिंग में गोल्ड मेडल शामिल है तो वहीं कुछ खेलों में हमने नए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए, कुछ खेलों में हमने एशियाई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया तथा दो पैरा ओलंपिक रिकॉर्ड भी बनाए।
टेबल टेनिस में तो भाविना पटेल ने पहली बार सिल्वर मेडल जीत तो वही तीरंदाजी में तो हम पहली बार कांस्य पदक लेकर आए। भारत जिस प्रकार से विविधताओं का देश कहा जाता है उसी प्रकार हमारे मेडल में विविधता आ रही है। हम नौ अलग-अलग खेलों में मेडल लेकर आए हैं, जाहिर है कि आने वाले समय में देश में अन्य खेलो और अन्य लोगों के लिए रास्ता खुलेगा जिस प्रकार से लोग गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा जैवलिन थ्रो अर्थात भाला फेंक की ओर आकर्षित हुए हैं और पैरा ओलंपिक के गोल्डन ब्वॉय सुमित अंतिल ने भी जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीता है। निश्चित तौर पर लोग जैवलिन थ्रो के तरफ आकर्षित होंगे और इस खेल में जाना चाहेंगे। हमारे दिव्यांग खिलाड़ियों ने यह दिखा दिया कि वह किसी से कम नही है।यहां पर प्रधानमंत्री जी की वह बात सही है जब उन्होंने वर्तमान में गौतमबुद्धनगर के डीएम एल वाई जी सुहास से बात की तो सुहास जी ने कहा कि जब वह इंडोनेशिया के  जाकर्ता से एशियाई पैरा यूथ खेलों में कांस्य पदक जीतकर वापस आए थे तो जब उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आपने तो जिंदगी की जंग जीत ली है यह तो एक खेल है ऐसे शब्द वाकई में किसी दिव्यांग को बहुत प्रेरित करते हैं। एक दिव्यांग अपने आपको जाने अनजाने चाहे न चाहे खुद को कोसता जरूर होगा कि भगवान ने उसे ऐसा क्यों बनाया ? परंतु उनमें से ही कुछ लोग अपनी इस कमजोरी को कमजोरी ना मानकर अपने संघर्ष के दम पर उसी के सहारे दुनिया में नाम कमाते हैं भारत का नाम बढ़ाते हैं।
दिसंबर 2016 के अपने मन की बात रेडियो संबोधन में कहा था कि शारीरिक रूप से अशक्त लोगों के पास एक ‘दिव्य क्षमता’ है और उनके लिए ‘विकलांग’ शब्द की जगह ‘दिव्यांग ’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए यहां पर एक बात और भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जी ने ओलंपिक तथा पैरा ओलंपिक के दोनों के खिलाड़ियों को खेल से जाने से पहले हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि बिना दबाव में आकर खेलने की निश्चित तौर पर यह एक बहुत बड़ा मोटिवेशन रहा होगा उन सभी के लिए और यही कारण है कि सभी ने बेहतर प्रदर्शन किया कई बार ऐसा होता है कि हमारे ऊपर प्रदर्शन का दबाव हावी हो जाता है जिस कारण हम बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं ओलंपिक के में प्रदर्शन का दबाव हमारे स्टार खिलाड़ियों पर दिखा था टोक्यो ओलंपिक से हमें गोल्डन ब्वॉय के रूप में नीरज चोपड़ा मिले थे परंतु पैरा ओलंपिक में तो कई गोल्ड मेडलिस्ट है जो यह बतलाता है कि हमारे पैरा ओलंपिक खिलाड़ियों का जज्बा जुनून और सामर्थ्य में कहीं कोई कमी नहीं है वह बस पोडियम पर तिरंगा को सबसे ऊंचा लहराता देखना चाहते थे। हमारे पैरा ओलंपिक खिलाड़ी शारीरिक रूप से कमजोर या अपूर्ण भले हों परंतु मानसिक रूप से उतने ही मजबूत और उनके जीतने के जीत के हौसले से परिपूर्ण हैं। दिव्यांग शब्द का प्रयोग दिसंबर 2016 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा विकलांग शब्द को हटाकर किया गया। इस पैरा ओलंपिक में सभी ने अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन से पूरे देश का दिल जीत लिया परंतु इनमें से भी कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को न केवल देश को बल्कि पूरी दुनिया को एक नई राह दिखाईद्वारा 39 साल की उम्र में जब लोग कहते हैं कि अब और कुछ नया नहीं हो सकता तो सिंहराज अडाना जैसे लोग कहते हैं आओ कुछ नया करो ! 39 साल की उम्र में ओलंपिक में एक नहीं दो पदक जीतकर इतिहास रचने वाले सिंहराज जिन्होंने राइफल शूटिंग में कांस्य पदक तथा सिल्वर मेडल जीता है, उन्होंने बतला दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, वही अवनि लेखरा देश की पहली महिला बन गई जिन्होंने पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीता तथा वे देश की पहली महिला भी हैं जिन्होंने एक ही पैरा ओलंपिक में दो मेडल जीते हैंद्वारा टोक्यो पैरा ओलंपिक भारत का गोल्डन पैरा ओलंपिक बन चुका है। इस पैरा ओलंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। अपने देश में कभी लोग पैरा ओलंपिक का पी भी नहीं जानते थे, आज पूरा देश इन सभी पैरा ओलंपियन का सम्मान कर रहा है। समाज में जो दिव्यांग होंगे खुद को इन से जोड़ रहे होंगे उनसे प्रेरणा ले रहे होंगे। दिव्यांग खिलाड़ियों ने पूरे देश को बता दिया कि वह किसी से कम नहीं है।
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