शिक्षक दिवस पर गुरु को शत-शत प्रणाम

देवानंद राय

गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर:।

गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:॥
भारतीय संस्कृति में गुरु का बड़ा महत्व है उनको तो ईश्वर से ऊंचा स्थान दिया गया है इसीलिए कबीर दास की ये पंक्तियां सबके जबान पर रहती है।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय।।
 यह पंक्तियां जीवन में गुरु के महत्व को वर्णित करने के लिए काफी हैं। हमारे देश में शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है राष्ट्र के निर्माता माने जाने वाले राष्ट्र के निर्माता कहे जाने वाले शिक्षकों का सम्मान देने के लिए यह दिवस समर्पित है। 5 सितंबर भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस भी है।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन करीब 4 दशकों तक एक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे इसलिए उनके जन्मदिवस पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाना शुरू हुआ ऐसा कहा जाता है कि 1962 में जब डॉक्टर राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ छात्र उनका जन्मदिन मनाने के उद्देश्य से उनके पास पहुंचे थे तब उन्होंने यहां यह सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को अध्यापन के प्रति उनके समर्पण के लिए शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाए और तब से यह शिक्षक दिवस अपने देश में मनाने की परंपरा शुरू हुई। अपने देश में गुरु को सम्मान देने की परंपरा बहुत पुरानी है हमारे पुरातन ग्रंथों में संदीपनी गर्ग मुनि द्रोणाचार्य जैसे अनेक महान गुरुओं का उल्लेख मिलता है।बदलते समय के साथ गुरुओं के रोल में भी बदलाव आया है आज किसी भी प्रश्न का तुरंत उत्तर पाने के लिए हम गुरु के पास ना जाकर गूगल के पास जाते हैं वर्तमान समय में ही है गूगल महाराज ही सबसे बड़े गुरु है। इस डिजिटल युग के प्रभाव से शिक्षक अब केवल उपदेशक बन गए हैं और ज्ञान का स्रोत गूगल इस कारण प्राचीन गुरु-शिष्य के मूल्यों का लगातार कम होता दिख रहा है। यहां तक कि कोरोना काल में आनलाइन कक्षाओं में भी गुरुओं के प्रति अनादर की घटनाएं सामने आई है तो वही हाल ही ऑनलाइन परीक्षा में एक शिक्षक द्वारा छात्रा को अश्लील मैसेज करने की भी घटना सामने आई है। यह बतलाता है कि हम अपने पुरानी संस्कृति और सभ्यता को आधुनिकता के नाम पर कैसे भूलते जा रहे हैं और गुरु शिष्य के सम्मान को भूलते जा रहे हैं।हमारे यहां पर गुरु को आदर दिया जाता है क्योंकि आने वाले कल का निर्माण आज गुरु की दी हुई शिक्षाओं पर निर्भर होता है लेकिन आज समाज पतन की ओर अग्रसर है क्योंकि शिक्षा के उद्देश्य में बच्चों में सामाजिक मूल्यों का विकास निहित नजर नहीं आता। आज शिक्षा को व्यवस्थाएं और धन आर्यन का माध्यम बना दिया गया है। शेक्सपियर के शब्दों में कहें तो जिंदगी एक रंगमंच है तो शिक्षक उस नाटक का बैकग्राउंड म्यूजिक है जो दिखता तो नहीं परंतु उसके होने से नाटक में जान आ जाती है, ठीक वैसे ही जीवन में शिक्षक हर वक्त हमारे साथ नहीं होती परंतु उनकी दी हुई शिक्षा हमेशा हमारे साथ होती है और हमें सफलता की ओर ले जाती है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने एक बार ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कहा था कि शिक्षा और मानव इतिहास का संपूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है। यहां पर मुक्ति का अर्थ यह है कि मानव जाति को गरीबी असमानता शोषण और जातिगत भेदभाव से मुक्ति मिले किसी भी श्रेष्ठ और स्वस्थ समाज के निर्माण का केंद्र शिक्षक ही होता है क्योंकि समग्र विकास की पहली और अनिवार्य तक शर्त ही शैक्षणिक विकास है और शैक्षणिक विकास शिक्षक के माध्यम से ही हो सकता है क्योंकि जिन गलतियों को माता-पिता नहीं देख पाते शिक्षक अपनी बारीक नजर से एक शिशु के एक बालक के उन गलतियों को देख सकता है, उन्हें दूर कर सकता है और एक बेहतर नागरिक बना सकता है। जो देश का जो आगे चलकर देश का भविष्य बनता है।शिक्षक विद्यार्थी और शिक्षा में वह खड़ी है जिससे समाज के अन्य सभी कड़ियां जुड़ी रहती है। यदि इनमें से  शिक्षक रूपी कड़ी कमजोर होती है तो समाज का बिखरना तय है। ज्ञान ही व्यक्ति को एक सही जीवन जीने का आधार देती है। वर्तमान समय की आवश्यकता यह भी है कि शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान ही ना दे बल्कि एक बेहतर चरित्र निर्माण भी करें, ताकि राष्ट्र निर्माण में नैतिकता की भी भूमिका सुदृढ़ हो शिक्षा सूरज की तरह होता है जो हमारे भीतर और समाज के अंधकार को दूर कर देता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहा करते थे कि मानव विकास का पता नहीं होता उसके लिए सचेत होकर प्रयास करना पड़ता है और वास्तविकता यही है कि गुरु के ज्ञान के बिना लक्ष्य  की प्राप्ति संभव नहीं है अर्थात बिना शिक्षक के हम कुछ मंजिल तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो सकते गुरु का ज्ञान और आशीर्वाद दोनों का होना परम आवश्यक है।
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