कोरोना से जूझ रही अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

डॉ मोनिका ओझा खत्री

महंगाई के तांडव और कोरोना से जूझ रही अर्थव्यवस्था के बावजूद देशवासियों को खुशखबरी सुनने को मिल रही है की विकास दर में तेजी से सुधार हो रहा है। वहीँ माह अगस्त 21 के जीएसटी राजस्व के आंकड़ों से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार तेजी से हो रहा है। विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों का विश्लेशण करें तो देश में आर्थिक विकास की गति अब रफ़्तार पकड़ने लगी है।
भारत सरकार के सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वर्ष की जून तिमाही में किसी भी तिमाही के मुकाबले विकास की दर सबसे तेज रही। अप्रैल से जून, 2021 तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 20.1 फीसद पर रही। वहीँ जीएसटी के मोर्चे पर भी अच्छी खबर मिल रही है। भारत का सकल जीएसटी राजस्व संग्रह लगातार दूसरे महीने एक लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा है, जो अगस्त 2021 में 1,12,020 करोड़ रुपये था, क्योंकि महामारी के दूसरी लहर के बाद आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, अगस्त 2021 का राजस्व पिछले साल के इसी महीने में जीएसटी राजस्व से 30 प्रतिशत से अधिक है।
वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की इकोनॉमी में 24.4 फीसद का संकुचन दर्ज किया गया था। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में जीडीपी 32.38 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपये पर रही थी। इस वृद्धि की वजह लो बेस इफेक्ट बताया जा रहा है। यही वृद्धि दर यदि अगली तिमाही में भी जारी रहती है तो निश्चित ही विकास दर की सामान्य स्थिति को प्राप्त कर लिया जायेगा। जीडीपी की यह वृद्धि मंदी से बाहर निकलने का साफ़ संकेत है। कोरोना महामारी के बावजूद विनिर्माण कार्यों में तेजी ने इस वृद्धि की राह को आसान बनाया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 49.6 प्रतिशत, निर्माण गतिविधियों में 68.3 प्रतिशत और व्यापार, होटल तथा संचार समेत सेवा क्षेत्र में 34.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कृषि क्षेत्र में आलोच्य तिमाही में शानदार 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि पिछले साल 2020-21 की इसी तिमाही में इसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।सांखियकीय कार्यालय ने अपने बयान में कहा, ‘‘स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी 2021-22 की पहली तिमाही में 32.38 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो 2020-21 की इसी तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपये थी। यह 20.1 प्रतिशत वृद्धि है जबकि 2020-21 की पहली तिमाही में उससे पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले 24.4 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। कृषि एकमात्र क्षेत्र है जिसमें ‘लॉकडाउन’ के बीच पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि हुई थी। इस वृद्धि के साथ भारत इस साल दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते पर है।
अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 31 अगस्त को कहा कि भारत में आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं क्योंकि कोरोना प्रतिबंध धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। मूडीज ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था की राह पर लौट रहा है। पहली तिमाही में तेज विकास दर से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि 2021 में भारत 9.6 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल कर लेगा। यह दुनिया के अन्य बड़े देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। मूडीज ने कहा, “भारत में, दूसरी लहर के जवाब में लागू किए गए प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील के साथ आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के उत्तरोत्तर फिर से खुलने से विकास में और तेजी आई है। मूडीज ने कहा कि टीकाकरण की गति देश की आर्थिक सुधार में भी अहम भूमिका निभाएगी।
विदेशी निवेशकों ने कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। मोदी सरकार बनने के बाद एफडीआई नीति में सुधार, निवेश के लिए बेहतर माहौल और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदम उठाने का परिणाम है कि वे कोरोना काल में भी भारत में जमकर निवेश कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में अबतक भारतीय बाजारों में 7,245 करोड़ रुपये डाले हैं। दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से ठीक नहीं है।
(लेखक पूर्णिमा यूनिवर्सिटी, जयपुर के बीबीए की विभागाध्यक्ष है)

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