पैरा ओलंपिक खेलों में उभरता भारत

देवानंद राय

भारत इन दिनों खेलों में छाया हुआ है पिछले दिनों संपन्न हुए टोक्यो ओलंपिक में हमने अब तक का शानदार प्रदर्शन किया तो वहीं उसके बाद हुए अंडर-20 एथलेटिक चैंपियनशिप में भी हमारे युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया अभी चल रहे टोक्यो पैरा ओलंपिक में भी हम एक के बाद एक रिकॉर्ड सेट कर रहे हैं टेबल टेनिस में भावना पटेल ने सिल्वर जीतकर एक शानदार शुरुआत की और उन्होंने इस मेडल के साथ एक इतिहास भी रचा वे देश की पहली पैडलर हैं जिन्होंने सिल्वर मेडल जीता है वही हाई जंप में निषाद कुमार ने भी सिल्वर की छलांग लगाई तो सुमित अंतिल ने 68.55 मीटर भाला फेंक कर न सिर्फ स्वर्ण पदक जीता बल्कि वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया तो वही दो बार पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले देवेंद्र झाझरिया ने भी इस बार भाला फेंक में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया सुंदर गुर्जर ने एफ-46 कैटेगरी में भाला फेंकने में कांस्य पदक जीता योगेश कथुरिया ने चक्का फेंक में रजत पदक जीता परंतु जब अवनि ने 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता और वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की तो पूरे देश में खुशी की लहर छा गई और सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह फोटो वायरल होने लगा जो शायद उनके मुख्यमंत्री रहते हुए पैरा ओलंपिक खिलाड़ियों को सम्मान देते हुए थी मरियप्पन थंगवेलू और शरद कुमार ने भी हाई जंप में सिल्वर मेडल दिला कर भारत को मेडल टैली में लंबी छलांग दी है परंतु जब 39 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले सिंहराज में 10 मीटर पिस्टल शूटिंग में कांस्य पदक जीतकर साबित किया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती बस उसे एक सही मंच और सही निर्देशन चाहिए
ये नये भारत की पहचान है जहां हम कभी खेलों में पीछे रहा करते थे आज भारत हर वैश्विक विश्व स्तरीय खेल में अपनी प्रतिभा दिखा रहा है इसके पीछे सरकार के सहयोग और समर्थन काफी बड़ा योगदान है और उससे कहीं ज्यादा इन खिलाड़ियों के जो दिव्यांग होते हुए भी अपने मानसिक शक्ति के बल पर इस तरह के बड़े आयोजनों में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं पैरा ओलंपिक में भारत ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंकाया है और हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने पदक जीतकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर भारत का दिल जीत लिया है हर ओलंपिक हर बार एक नया हीरो देती है 2016 के रियो पैरा ओलंपिक के हीरो स्वर्ण पदक विजेता देवेंद्र झाझरिया थे। तो इस बार अंतिल और अवनी है मरियप्पन थंगावेलू हो या देवेंद्र झाझरिया या फिर अंतिल या वर्तमान में भारतीय पैरा ओलंपिक की अध्यक्ष दीपा मलिक सब की कहानी लगभग एक जैसी है कि इन्होंने खुद को यह भरोसा दिलाया कि वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं विपरीत परिस्थितियों में पले बढ़े और संघर्ष के बल पर दुनिया के सबसे बड़े पैरा पैरा ओलंपिक में जाते हैं और भारत के लिए मेडल जीते हैं तो पूरा भारत बाहें फैलाए उनका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ा होता है। भारत पहली बार पैरा ओलंपिक में दोहरे अंक में पहुंचा है इससे पहले भारत ने 2012 में 1 पदक 2016 में 4 पदक 2021 यानी वर्तमान में अभी भारत के 10 पदक हैं और भारत के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है वहीं कुछ खिलाड़ियों के साथ टेक्निकल फॉल्ट होने के कारण वह पदक से वंचित रह गए अगले ओलंपिक के लिए उन्हें तथा सभी को इस पर ध्यान देना चाहिए।इन सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं उम्मीद है कि भारत अभी और मेडल झोली में डालेगा।

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