मेजर ध्यान चंद जयंती पर उन्हें नमन

राष्ट्रीय खेल दिवस-29 अगस्त

देवानंद राय

आज राष्ट्रीय खेल दिवस है। यह दिवस समर्पित है हाकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद को, जिन्होंने अपने शानदार खेल और प्रतिभा के दम पर हॉकी के खेल में भारत का नाम रोशन किया। मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1950 को इलाहाबाद वर्तमान में प्रयागराज के राठौर परिवार में हुआ था। इनके पिता सोमेश्वर दत्त उन दिनों ब्रिटिश इंडिया सेना में सूबेदार थे, जो खुद एक हॉकी के खिलाड़ी थे। देश में जब हम क्रिकेट का नाम लेते हैं तो हमारे दिमाग में सबसे पहले क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की तस्वीर हमारे दिमाग में आती है तो वैसे ही अपने देश में हाकी का नाम जब लिया जाता है तो हमारे दिमाग में तुरंत तो नहीं धीरे-धीरे मेजर ध्यानचंद की ही छवि आती है पर वर्तमान समय में टोक्यो ओलंपिक में मनप्रीत सिंह की टीम ने जब से कांस्य पदक जीता है ऐसा लगता है कि हां कि के पुराने दिन फिर से वापस आ गए हैं। 

मेजर ध्यानचंद तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले हॉकी टीम के सदस्य रहे जिनमें 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 का लॉन्च एंजेल्स ओलंपिक एवं 1936 का बर्लिन ओलंपिक शामिल है।1936 का ओलंपिक वर्ली लोलम पिक तो हर बार अनिल 1936 का बर्लिन ओलंपिक की कहानी हर भारतीय को याद है जब हिटलर ने मेजर ध्यानचंद को जर्मनी की नागरिकता तथा जर्मन सेना में पद देने की बात कही थी परंतु मेजर ध्यानचंद ने उसे ठुकरा दिया था। वह मैच ही इतना खास था कि हिटलर ने भी उन्हें उठकर सैल्यूट किया और वह पहला मौका था कि जब विदेश में हमारी हॉकी की टीम तिरंगे के लिए खेली थी। कहानी कुछ और थी कि वह मैच 14 अगस्त को होना होने वाला था परंतु बारिश होने के कारण वह मैच 15 अगस्त को हुआ। उस मैच से पहले की रात उन्होंने कमरे में खिलाड़ियों को इकट्ठा करके तिरंगे की शपथ दिलाई थी कि हमें हर हालत में यह फाइनल मैच जीतना है। उस समय चरखे वाला तिरंगा था क्योंकि भारत तो ब्रिटिश झंडे तले ही खेल रहा था। उन्होंने कहा, ‘उस समय विदेशी अखबारों में भारत की चर्चा आजादी के आंदोलन, गांधीजी और भारतीय हॉकी को लेकर होती थी। वह टीम दान के जरिए इकट्ठे हुए पैसे के दम पर ओलिंपिक खेलने गई थी। जर्मनी जैसी सर्व सुविधा संपन्न टीम को हराना आसान नहीं था लेकिन देश के लिए अपने जज्बे को लेकर वह टीम ऐसा कमाल कर सकी।’ वह ध्यानचंद का आखिरी ओलिंपिक था। तीन ओलिंपिक के 12 मैचों में 33 गोल उनके नाम हैं।
क्रिकेट के सर्वकालिक महान क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन तो उनके बारे में कहा करते थे वह तो गोल ऐसे करते हैं जैसे वह रन बना रहे हो और यह एक संयोग ही है कि इन दोनों महान अपने-अपने खेलों में महान खिलाड़ियों का जन्म 2 दिन के अंतराल पर हुआ है। 27 अगस्त को जहां हम क्रिकेट के महान खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन की जन्मशती मनाते हैं तो वहीं 29 अगस्त को हाकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन होता है, जिसे अपने देश में खेल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। विरोधी तो कई बार उनका खेल देखकर इतने परेशान हो जाते थे कि उनका हॉकी तोड़कर चेक करने लगते थे कि इसमें कहीं चुंबक तो नहीं! 400 से अधिक गोल करने वाले मेजर ध्यानचंद को पदम भूषण से भी सम्मानित किया गया था। वह हमेशा एक बात कहा करते थे कि “मेरे देश की जिम्मेदारी नहीं है मुझे आगे बढ़ाने की यह मेरी जिम्मेदारी है मेरे देश को आगे बढ़ाने की।इस बार कि यह जयंती बेहद खास होने वाली क्योंकि इस बार हमने ओलंपिक में भी 41 साल बाद पदक जीता है। उम्मीद है कि इस बार उनकी जयंती पर उन्हें भारत रत्न देकर सम्मानित किया जाए।

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