महंगाई ने दिखाए भाजपा को दिन में तारे

बाल मुकुन्द ओझा

कोरोना और अर्थव्यवस्था की खस्ता स्थिति से उपजे हालात ने दुनियाभर में अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। खाद्य सामग्री और तेल की बढ़ रही कीमतों ने लोगों को दिन में तारे दिखा दिए है। सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रही महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक दुनिया में कोरोना महामारी आने के बाद आम लोगों की आय तेजी से घटी है साथ ही लाखों लोग बेरोजगार हो गए। रिपोर्ट के अनुसार बेहताशा बढ़ी महंगाई का असर भारत, अमेरिका, ब्राजील और नाइजीरिया समेत कई देशों में दिखने लगा है। लोगों ने अपनी आवश्यक जरूरतों में कटौती शुरू करदी।
भाजपा ने अगले साल होने वाले यूपी और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी है। भाजपा की तैयारियों में सबसे बड़ी बाधा महंगाई बनी हुई है। यदि भाजपा ने महंगाई के मोर्चे पर जन राहत के उपाय नहीं किये तो उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। भारत में महंगाई ने आम लोगों विशेषकर मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ कर रख दी है। खाने-पीने के सामान से लेकर डेयरी उत्पाद, रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल तक के दाम आसमान छू रहे हैं। खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई का प्रमुख कारण पेट्रोल व डीजल के दामों का बढ़ना है। पेट्रोल व डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसपोर्टरों ने भी अपना भाड़ा बढ़ा दिया है। जिस कारण खाद्य सामग्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में काफी खर्च आ रहा है। हालाँकि जुलाई माह में राहत भरी खबर आई।.जुलाई के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.59 फीसदी रही। जून के महीने में खुदरा महंगाई दर 6.26 फीसदी और मई में यह 6.30 फीसदी रही थी।
महंगाई की चौातरफा मार से आम आदमी गहरी पीड़ा में है। एक तरफ कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका से आम आदमी भयभीत है तो दूसरी ओर महंगाई कहर बनकर टूट रही है। लाकडाउन के चलते परिवार की आय घट गई है। खाने पीने की सामग्री के साथ पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से आम आदमी हलकान में है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर अब उतार पर है मगर महंगाई मोदी सरकार के काबू से बाहर होती जा रही है। सोयाबीन, पॉम आयल, रिफाइंड तेल आदि के भाव में जबरदस्त उछाल आ गया है। नमक, चायपत्ती, लौंग, हल्दी-धनिया सब कुछ मंहगा हो गया है। माल ढ़ुलाई महँगी होने से खाध पदार्थों के साथ सब्जियां एक बार फिर अपनी तेजी पर है। इसकी वजह से गरीब की रोजी रोटी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगले साल देश के सात राज्यों के विधानसभा चुनाव होने है। यदि महंगाई इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो चुनाव जीतना भाजपा के लिए भारी परेशानी का सबब बन सकता है।
आम आदमी को इससे कोई मतलब नहीं है की सूखा पड़ा है या बाढ़ आरही है, अथवा सरकार की नीतियां सही है या गलत है उसे अपना पेट भरने के लिए दाल रोटी बिना बिना विघ्न बाधा के आसानी से मुहैया हो जानी चाहिए। उसे एयर कंडीशन, या कार बंगला भी नहीं चाहिए। आम आदमी ने नरेंद्र मोदी की बातों पर विश्वास कर मोदी सरकार बनायीं थी। मोदी ने देश के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं चलाकर लोगों का भला किया यह भी मान लेते है। मगर आसमान छूती महंगाई ने उसका जीना हराम कर रखा है। दाल रोटी का निवाला उससे दूर हो मगाया है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के चलते कीमतें कम थीं। मगर कोरोना की दूसरी लहर ने जहाँ आम आदमी को मौत के मुंह में धकेला है वहीँ महंगाई ने उसे दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर किया है। केंद्र या राज्य सरकारों की तरफ से जरुरी चीजों के दाम नियंत्रित करने के कोई प्रभावी प्रयास दृष्टिगोचर नहीं हो रहे है।
पिछले लोक डाउन के मुकाबले खाद्य तेलो, चावल, आटा, दालों आदि की कीमतों में भारी वृद्धि देखने को मिली। पेट्रोल और डीजल पहले से ही आग लगाए हुए है। जिसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ता है। और महँगी होने वाली चीजों का खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ता है। कोरोना के बीच अर्थव्यवस्था के मोर्च पर सरकार को झटका लगा हैं। थोक के साथ खुदरा महंगाई बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा था, जो अब सच साबित हुआ है। वहीं औद्योगिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।

 

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