रक्षा का पर्व रक्षाबंधन

मंगल व्यास भारती

भाई और बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन 22 अगस्त दिन रविवार को मनाया जायेगा। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखद एवं दीर्घ जीवन की कामना करती हैं। की दृष्टि से आज भी समाज के सभी वर्गों के लोग इस त्योहार को बड़ी खुशी के साथ मनाते हैं। भाई-बहन के स्नेह व प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व त्योहारों में सबसे अनूठा है। हर भाई-बहन की इच्छा होती है कि कम से कम वह रक्षाबंधन के दिन एक-दूसरे से मिलकर अपनी खुशियों, दुख-दर्द को साझा करें। कई कथाएं रक्षा बंधन के पर्व के साथ जुड़ी हुई हैं। जिनमें से रानी कर्णवती-हुमायुं की कथा, चांदबीबी-महाराणा प्रताप की कथा वामन अवतार और राजा बलि की कथा और रमजानी-शाह आलम सानी की कथा अति प्रसिद्ध है। वैसे प्राचीन समय में वैदिक आचार्य अपने शिष्य के हाथ में रक्षा का सूत्र बाँधकर उसे वेद शास्त्र में पारंगत करते थे।
इस त्योहार ने भाई बहिन के पवित्र रिश्ते का रूप धारण कर लिया हैं मगर दिन प्रतिदिन दिखावा बहुत ज्यादा हो गया है। मोली के धागे ने महंगी चांदी सोने की राखी का रूप धारण कर लिया है, जो कि सच में होना नहीं चाहिए। रक्षा का ये पर्व एक मोली के रूप में भी मनाया जा सकता हैं। लेकिन होड़ मची हुई है कि कौन कितनी महंगी राखी लाये। त्योहार मनाये खुशी के साथ साथ समझे कि ये त्योहार मनाने का तरीका असल में कैसा हो। हमारे पुराने रीति रिवाज के ही अनुसार हो जैसे कि हम पूजा अर्चना आदि करते हैं। ये त्योहार विशेष रूप से श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन का मनाते हैं बड़े उत्साह के साथ ब्राह्मण श्रावणी तरपन करके पितरों को खुश करके आशिर्वाद मागते हैं और जनेऊ बदलते हैं। इसका बहुत महत्व माना जाता है। एक मान्यता है की अपने वचन में बंधे भगवान विष्णु दुविधा में पड़ गए और पाताल लोक में राजा बलि के यहां रहने लगे। इधर माता लक्ष्मी विष्णु भगवान का इंतजार कर रही थी।काफी समय बीतने के बाद नारायण नहीं आये। इसी बीच नारद जी ने बताया कि वे अपने दिए वचन के कारण राजा बलि के पहरेदार बने हुए हैं। पुराणों में बताते है माता लक्ष्मी जी ने जब राजा बलि के राखी बांधी तब से त्योहार मनाया जाने लगा। जैसे कि कृष्ण के अंगुली के लगी शीशुपाल वध के समय दौपदी ने अपनी साड़ी का पल्ला फाड़ अंगुली के बांधी तब कृष्ण ने रक्षा का वचन दिया रक्षाबंधन त्योहार पर्व मनाया जाने लगा। इसी से जुडी एक कथा यह भी है कि राणी कर्णवती ने अपनी रक्षा के लिए बादशाह हुमायूं को अपनी रक्षा के लिए राखी बांधी और भाई बनाया तब मुसीबत में राणी कर्णवती की सहायता की। इस प्रकार ये रक्षा का पर्व रक्षाबंधन पड़ा।
आज के दिन हर भाई को यह संकल्प लेना चाहिए की हम हर बहन की रक्षा करेंगे। साथ ही कलाई पर रक्षा सूत्र बंधाते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करे …
येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रोमहाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

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