लालकिले से मोदी का प्रचंड भारत

विष्णुगुप्त

नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जो राष्ट्रीय उत्सव को भी अवसर में बदल देते हैं ,जागरूकता में बदल देते हैं, अपने नागरिक नागरिकों को कर्तव्य परायण के लिए प्रेरित करते हैं, अपने दुश्मनों को, अपने विरोधियों को कड़े और सबककारी संदेश देने से भी नहीं झुकते हैं। खासकर देश के दुश्मनों को साफ और कड़े शब्दों में ललकारते हैं , संदेश देते हैं कि अब भारत बदल चुका है, यह नया भारत है, नए भारत में गुलामी के प्रतीकों की कोई जगह नहीं है, शक्ति के धोस देने वाले को कड़ा जवाब मिलेगा ,भारत में कड़ा जवाब दिया भी है।इसके फलस्वरूप भारत की महिमा ,भारत की शक्ति ,भारत की संप्रभुता दुनिया में शक्तिशाली तौर पर उपस्थित है।
इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी नरेंद्र मोदी अपने देश के नागरिकों को कर्तव्य परायण, विकास, उन्नति और लक्ष्य प्राप्ति का संदेश देने से नहीं चूके। लाल किले के प्राचीर से उनका जो संबोधन हुआ उनकी जो घोषणाएं हुई , वे मील के पत्थर के समान है। देश के विकास और उन्नति में सहायक हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से कौन-कौन सी घोषणाएं की हैं, कौन-कौन सी ऐसी बातें की हैं, जिसकी चर्चा होनी चाहिए, जिसकी पड़ताल होनी चाहिए, देशभक्ति ,देश की उन्नति की कसौटी पर तोलने की जरूरत होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई एक घोषणाएं नहीं की हैं, बल्कि अनेक घोषणाएं की हैं ,अनेक महत्वपूर्ण बातें की हैं ,जिनमें प्रमुख है, सैनिक स्कूल में पढ़ेगी बेटियां, मातृभाषा को मिलेगी प्राथमिकता, नई शिक्षा नीति बनेगी रोजगार उन्मुख ,सुविधाओं तक पहुंच ही नहीं बल्कि संपूर्ण लफ्ज़ प्राप्त किया जाएगा, छोटे किसानों को मिलेगी प्राथमिकता ,कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिकों की सलाह होगी प्रमुख ,नागरिकों के जीवन में सरकार का हस्तक्षेप होगा कम ,नॉर्थ ईस्ट को पूरे भारत से जोड़ा जाएगा, जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव होंगे, नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोषणा, विखंडन दिवस को स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा, देशभर में 75 बंदे मातरम एक्सप्रेस चलेंगे ,कैशलेस और स्वच्छता का पालन करें नागरिक आदि। इनके अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण बातें की है।
अखंड भारत का प्रश्न एक बार फिर पुनर्जीवित करने का पराक्रम नरेंद्र मोदी ने दिखाया है । भारत विखंडन की मजहबी और फिरंगी सोच पर चाबुक चलाया है । 14 अगस्त 1947 को मजहब के आधार पर फिरंगियों ने भारत विखंडन की नींव रखी थी और मजहब के आधार पर पाकिस्तान का निर्माण किया था ।अखंड भारत में विश्वास रखने वाले लोग, अखंड भारत के लिए बलिदान करने वाले लोग मजहब के आधार पर भारत विखंडन को कभी स्वीकार नहीं किया था । अखंड भारत के लिए सक्रियता और अभियान हमेशा से जारी रहा है। अब हर 14 अगस्त को स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। स्मृति दिवस के माध्यम से वर्तमान में भारत विखंडन की सोच रखने वाले समूहों और राजनीति पर प्रहार किया जाएगा। इसके साथ ही साथ राष्ट्रवाद को और भी शक्तिशाली बनाया जाए जाएगा।
छोटे किसानों की प्राथमिकता देने की नीति के पीछे कौन सा कारण है और इसमें निहित लक्ष्य क्या है? क्या यह राजनीति से प्रेरित नीति है? क्या यह नीति किसान आंदोलन को कमजोर और भ्रमित करने का काम तो नहीं करेगी? आज देश में तथाकथित किसान किस प्रकार से आंदोलित हैं, किसानों के नाम पर यूनियन चलाने वाले तथाकथित लोग किस प्रकार से हिंसा और अलगाव तथा उफान पैदा कर रहे हैं ,यह भी जगजाहिर है। स्थापित तथ्य है कि तथाकथित किसान आंदोलन से देश के विरोधियों, देश के दुश्मनों, देश के जिहादी तत्वों को भी प्रपंच फैलाने, भारत की छवि को खराब करने का अवसर दिया गया है। नरेंद्र मोदी किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए किसानों को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए ,किसानों को उपज का वास्तविक मूल्य देने के लिए, नए कृषि कानून बनाए हैं। इन कृषि कानूनों की प्रतिक्रिया जिहादी रही है, नकारात्मक रही है ,वह उफान वाली रही हैं। नकारात्मक जिहादी और खतरनाक प्रतिक्रिया देने वाले कोई आम किसान नहीं है, छोटे किसान नहीं है बल्कि वे बड़े किसान हैं ,किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले हैं, समृद्धि लूटने वाले हैं, छोटे किसानों का अधिकार छीनने वाले हैं, छोटे किसानों को मिलने वाले अवसर पर डाका डालने वाले हैं।
छोटे किसानों को प्राथमिकता देकर नरेंद्र मोदी तथाकथित बड़े राजनीतिक बाज और खालिस्तान, जिहाद समर्थक गिरोह को अलग-थलग करना चाहते हैं। छोटे किसानों को ही नहीं बल्कि सभी किसानों को अभी ₹6000 प्रति साल मिल रहे हैं। उर्वरक पर भी नरेंद्र मोदी की सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई है ।उर्वरक पर सब्सिडी बढ़ने से ना केवल छोटे किसानों बल्कि बड़े किसानों को भी राहत मिली है। छोटे किसानों को प्राथमिकता किस तरह से मिलेगी, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है की किसानों को मिलने वाली प्रति साल ₹6000 की राशि में बढ़ोतरी होगी । खासकर छोटे किसानों को अलग से नगद राशि देने की योजना मोदी सरकार के पास हो सकती है। छोटे किसानों को समय पर उर्वरक ,समय पर लागत मूल्य, समय पर बिजली ,समय पर डीजल की जरूरत पूरी होनी चाहिए। अगर सरकार ऐसा करने में सफल होती है तो फिर छोटे किसानों की समस्याएं, कठिनाइयां काफी कम हो सकती है। छोटे किसान अगर आर्थिक रूप से मजबूत हुए तो फिर देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत रहेगी और नरेंद्र मोदी की सत्ता की मजबूत सक्रिय और गतिमान रहेगी।
भारत को एकता के सूत्र में बांधने ,भारत को मजबूत करने के लिए नरेंद्र मोदी कोई एक नहीं बल्कि 75 वंदे मातरम एक्सप्रेस चलाने की घोषणा की है। रेलवे को भारत के लोकतंत्र की पहिया कहा जाता है । रेलवे को भारत के लोकतंत्र का पहिया क्यों कहा जाता है? रेलवे को भारत के लोकतंत्र का पहिया इसलिए कहा जाता है कि आम लोग इसके साथ जुड़े हुए हैं ,भारत को गतिशील करने में, भारत को सक्रिय रखने में ,भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में ,भारत की जनता को की जरूरतों को पूरा करने में ,भारतीय रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है । भारत की जनसंख्या जिस तरह से पढ़ रही है उस तरह से भारत की रेल व्यवस्था सुदृढ़ नहीं है। दुनिया की तुलना में भारतीय रेल अभी भी पिछड़ा हुआ है, पुरातन स्थिति में है ,जीर्ण शीर्ण अवस्था में है। जनता को लुभाने वाली योजनाओं और रियासतों के कारण भारतीय रेलवे का कायाकल्प नहीं हो पाया है। भारतीय रेलवे हमेशा घाटे की ओर बढ़ रही है, सुविधाएं कम हो रही हैं ,गतिशीलता कम हो रही है ,भारतीय रेलवे के परिचालन में गुणवत्ता की कमी है ,वैज्ञानिकता की कमी है। नरेंद्र नरेंद्र मोदी ने रेलवे को सुधारने, रेलवे को जन मुख बनाने में अपनी भूमिका झोकना चाहते हैं। भारतीय रेलवे का कायाकल्प करने की उनकी कई योजनाएं हैं। उन्हें मालूम है कि भारतीय रेलवे का कायाकल्प नहीं किया गया तो फिर भारतीय रेलवे भारत की जनता का बोझ ढोने में विफल होगी।
कोई एक नहीं बल्कि 75 बंदे मातरम एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने का एकमात्र खास लक्ष्य भारतीय रेल यात्रियों की समस्याओं को दूर करना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है। जब देशभर में 75 बंदे मातरम एक्सप्रेस रेल चलेगी तो उससे भारत की जनता को कितना लाभ होगा यह भी जाना समझा जा सकता है। वन्दे मातरम् एक्सप्रेस के चालन में प्राथमिकता होगी। रेल मंत्रालय वंदे मातरम एक्सप्रेस के चालन में विशेषज्ञता हासिल करेगा ।क्योंकि यह नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। अगर बंदे मातरम एक्सप्रेस के चालन में विशेषज्ञता हासिल हुई, गुणवत्ता हासिल हुई तो फिर नरेंद्र मोदी इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करेंगे। देशभर में पहले से ही राजधानी एक्सप्रेस गरीब रथ आदि नाम से विशेष रेलगाड़ियां चल रही हैं पर इन रेलगाड़ियों में भी अब समस्याएं विकराल कर ली हुई है। वंदे मातरम एक्सप्रेस में नई सुविधाओं और गुणवत्ता से पूर्ण होने पर ना केवल भारत की जनता खुश होगी बल्कि विदेशी पर्यटक ,विदेशी लोग जो भारत आते हैं उनके बीच में भी भारत की छवि चमकेगी । इसलिए उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी की सरकार वंदे मातरम एक्सप्रेस के परिचालन में विशेषज्ञता की उपलब्धि को हासिल करेगी।
पूर्वोत्तर भारत को पूरे भारत से जोड़ने की उनकी घोषणा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पूर्वोत्तर के राज्य हमारे लिए कितने प्रमुख हैं, हमारी सुरक्षा के लिए कितने प्रमुख हैं ,यह भी स्पष्ट है ।पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा बांग्लादेश, म्यानमार भूटान और चीन से मिलती है। चीन हमारा किस प्रकार का दुश्मन है, चीन से हमारी सुरक्षा को कितना खतरा है ,चीन हमारी भूमि पर किस प्रकार से गिद्ध दृष्टि लगाए बैठा हुआ है ,यह भी उल्लेखनीय है । हम अगर अपने देश की सुरक्षा चाहते हैं, अपने देश के दुश्मनों को आंख में आंख मिला कर जवाब देना चाहते हैं तो फिर हमें अपनी सुरक्षा की कमियों को दूर करना चाहिए। अपनी सुरक्षा की जरूरतों को भी पूरी करनी चाहिए। अभी तक पूर्वोत्तर राज्यों का जितना विकास होना चाहिए था, जितना उत्थान होना चाहिए था जितनी सुरक्षा की तकलीफ उनके पास होनी चाहिए थी, सीमा पर जितनी सुविधाएं होनी चाहिए थी, वह नहीं है। भारत के विभिन्न सरकारें उदासीन रही हैं ,उनमें सीमा सुरक्षा का भाव नहीं रहा है ।इसी कारण पूर्वोत्तर के राज्यों पर ध्यान कम गया है । नरेंद्र मोदी की सरकार पूर्वोत्तर के राज्यों पर विकास की एक नई किरण लेकर के आई है। पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने की नीति के पीछे सीमा क्षेत्र में सुविधाओं का विकास करना है ।पड़ोसी देशों से लगने वाली हमारी भूमि अब सड़कों से जुड़ेगी, हवाई मार्ग से जुड़ेगी । अगर नरेंद्र मोदी की सरकार पूर्वोत्तर में सुरक्षा और विकास की एक नई धारा बहाने में सफल हुई तो फिर चीन के नापाक इरादों को असफल बनाया जा सकता है ,इसके अलावा पूर्वोत्तर के अभावग्रस्त, साधनों से वंचित लोगों को भी अवसर मिलेगा और उनकी जिंदगी सुधरेगी, उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
नरेंद्र मोदी चीन और पाकिस्तान को सख्त संदेश देना भूल जाएंगे,यह कैसे संभव हो सकता था? नरेंद्र मोदी की राजनीतिक सफलता के पीछे देश के दुश्मनों को ललकारना, देश के दुश्मनों को आंख में आंख मिलाकर जवाब देना और शक्तिशाली भारत का प्रदर्शन करना रहा है। चीन पाकिस्तान को नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया है और कहां है कि भारत अब किसी से डरता नहीं ,भारत को किसी से डरने की जरूरत भी नहीं है, भारत को अब किसी के सामने हाथ पसारने की जरूरत नहीं है , भारत अपनी सुरक्षा को खुद करने के लिए सक्षम है । चीन और पाकिस्तान हमारा स्थाई दुश्मन है। चीन और पाकिस्तान हमारा पड़ोसी हैं ।भारत ना तो अपना पड़ोसी बदल सकता है और ना पड़ोसी पाकिस्तान और चाइना की हिंसक, उपनिवेश मानसिकता को बदल सकता है। लेकिन भारत अपनी सुरक्षा को मजबूत कर, अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत कर, अपने इरादे को मजबूत कर चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों को सबक दे सकता है, चुनौती दे सकता है और एहसास करा सकता है कि यह गुलामी काल या फिर पुरातन काल का भारत नहीं है, यह नया भारत है जो अपनी सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगा। नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की वीरता को शब्द देते हुए कहा कि हमने सीमा की सुरक्षा की चुनौतियों को सक्षम बनाया है ,जवाब दिया है। खासकर उन्होंने सैनिक स्ट्राइक को रेखांकित किया है। और कहां की सैनिक स्ट्राइक से देश के दुश्मनों को एक सबक मिला है ,एक संदेश मिला है अब भारत छोड़ेगा नहीं । इसीलिए भारत को छेड़ो नहीं ।भारत की शक्ति का सम्मान करो। यह सही है कि पहले भारत आतंकवाद का रोना रोता था, दुनिया भर में दया का भीख मांगता था, भारत कहता था कि पाकिस्तान हमें आतंकवाद का शिकार बना रहा है, पाकिस्तान के आतंकवाद से हमको बचाओ पर आज स्थितियां बदली हैं। नरेंद्र मोदी की वीरता के कारण पाकिस्तान आज दुनिया से अलग-थलग पड़ गया है, कश्मीर का राग पाकिस्तान के लिए कोई काम नहीं रहा है, दुनिया के देश पाकिस्तान की कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं है और ना ही पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए तैयार है। नरेंद्र मोदी की प्रशंसा इस बात के लिए होनी चाहिए कि उन्होंने बिना युद्ध किए, अपने लक्ष्य पूरा कर लिए, पाकिस्तान को कंगाल बना दिया आतंकवाद की गर्दन मरोड़ कर रख दी।
नरेंद्र नरेंद्र मोदी ने अप्रत्यक्ष तौर पर आम जनता को भी कर्तव्यों के प्रति आगाह किया है ।जनता के अधिकार हैं पर कर्तव्य भी हैं ।जनता के अधिकार की बात तो होती है पर एक नागरिक का कर्तव्य क्या होना चाहिए, एक नागरिक का दायित्व क्या होनी चाहिए इस पर बहुत ही कम बहाश होती है ।नरेंद्र मोदी ने अप्रत्यक्ष तौर पर जनता से स्वच्छता के लिए, कैशलेस लेनदेन के लिए सहयोग की उम्मीद की है। स्वच्छता जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है ,स्वच्छता एक मजबूत राष्ट्र किस प्रकार से बनाता है, यह भी उल्लेखनीय है ।नरेंद्र मोदी पहले से ही स्वच्छता को लेकर गंभीर रहे हैं ,स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं। स्वच्छता से ना केवल बीमारियों से लड़ने का मंत्र बनाया है बल्कि स्वच्छता आधारित विकास की भी उन्होंने कल्पना की थी। पर्यावरण की रक्षा भी उनकी महत्वपूर्ण कड़ी रही है। खासकर जनता मोदी की स्वच्छता नीति से प्रभावित रही है।
नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोषणा भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है । ऊर्जा के क्षेत्र में इसके गंभीर और सुखद निष्कर्ष निकलेंगे । ऊर्जा आज काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं ।ऊर्जा के क्षेत्र में भारत बहुत ही पीछे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में लग जाता है। आज तक हम पेट्रोल डीजल का विकल्प नहीं खोज पाए। पेट्रोल और डीजल की जरूरतों को पूरा करने में हमारी अर्थव्यवस्था हमेशा दयनीय स्थिति में पहुंच जाती है। हाइड्रो नेशनल मिशन की घोषणा होने से ऊर्जा के क्षेत्र में विकास की एक नई उम्मीद जगी है। पहले से ही सौर ऊर्जा पर सरकार का ध्यान रहा है ।अगर हम ऊर्जा के क्षेत्र में थोड़ा सा भी आत्मनिर्भर हुए तो यह हमारे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा भी उनका मजबूत हुआ है। इस अभियान को उन्होंने आगे बढ़ाया। सैनिक स्कूलों में अब तक आम लोगों की उपस्थिति नहीं होती थी । नरेंद्र मोदी ने अब घोषणा की है कि सैनिक स्कूलों में भारत की बेटियां पढेगी ।भारत की बेटियों को नामांकन मिलेगा। भारत की बेटियां ओलंपिक में किस प्रकार से प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है यह भी जगजाहिर है। बेटियां आज जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं । बेटियों को आगे बढ़ते हुए देखते देखना एक सुखद स्थिति है । नरेंद्र मोदी का भी ध्यान बेटियों के विकास और उन्नति में के क्षेत्र में है।
हम निश्चित तौर पर यह कह सकते हैं की नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश के विकास और सुरक्षा का महत्वपूर्ण खाका खींचा है। भ्रष्टचार और जनसंख्या नियंत्रण पर उनकी चुप्पी नकारात्मक पॉइंट है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

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