आओ मनाएं आजादी का अमृत महोत्सव

देवानंद राय

आज आजादी के 75 साल हो रहे हैं पर इस आजादी के मायने हर किसी के लिए अलग है आज का युवा जो इस देश की सबसे बड़ी शक्ति है जिससे पूरे दुनिया में भारत की युवा शक्ति के नाम से जाना जाता है उसके लिए यह आजादी कुछ कर गुजरने को प्रेरित करती है तो वही जो बुजुर्ग हैं उनके लिए यह आजादी एक सपने जैसा है क्योंकि उन्होंने इस देश को गुलामी का दौर देखा था जहां अपनी माटी, अपना वतन होते हुए भी हम गुलाम थे तो उनके लिए हर 15 अगस्त उस गुलामी से मुक्त होकर खुले आकाश में खुली सांस लेने का आनंद जैसे है।एक बच्चे के लिए यह आजादी तिरंगे को लेकर गली में दौड़ने से लेकर हर बार उसे सलाम करने जैसा है उसे लगता है कि वह तिरंगा लेकर दौड़ता है तो लोग देखते हैं और जब-जब वह तिरंगे को सलाम करता है तो उसे लगता है मानो उसे कोई ताकत दे रहा हो एक वयस्क के लिए आजादी मिला-जुला जैसा है इसका कारण है कि शायद जिन सपनों को वह आजादी के बाद देखा था उनमें से कुछ पूरे हुए कुछ खो गए। पर देस प्रेम अब भी सबके लिए सबके मन में एक समान है। महिला के लिए आजादी उसकी खुद की आजादी और सम्मान है जो उसे तौलती है आजादी से पहले मिले उसके अधिकारों से और अब मिले अधिकारों और हिस्सेदारी से।

हमारे लिए आजादी के इतने अलग अलग मायने होने के बावजूद हम सब राष्ट्रीय मुद्दों पर देश की आन बान शान पर एक जो हमने पिछले दिनों ही देखा जब पुरुष हॉकी टीम ने 41 साल बाद से जीतने पर पूरा देश एक स्वर में गुणगान कर रहा था तो वहीं महिला टीम के हारने पर पूरा देश गमगीन भी था तो नीरज चोपड़ा के गोल्ड जीतने पर वही देश का दिल गोल्डन गोल्डन हो गया। यह हम सब के लिए सौभाग्य की बात है कि हम स्वतंत्र भारत में खुल कर जी रहे हैं हर तरह का आनंद उठा रहे हैं परंतु हमें अपने क्रांतिकारियों और उन बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए जिनके कारण हम ने यह स्वतंत्रता पायी है हमें अपनी स्वतंत्रता का मोल समझना होगा और हर किसी के लिए यह तय करना होगा कि वह इस देश के लिए क्या कर सकता है क्या दे सकता है।हम जानते हैं कि हमारी आजादी तब तक अधूरी है जब तक इस देश के गरीब को भरपेट भोजन, हर किसी को सर ढकने के लिए छत और हर बच्चे को शिक्षा का इंतजाम नहीं हो जाता तब तक यह आजादी अधूरी मानी जाएगी। परंतु हर देश के लिए एक ऐसा दिन तो अवश्य होता ही है जिस दिन वह अपनी आजादी को मनाता है और फिर नए संकल्प लेता है देश को इस बार इन संकल्पों को भी याद करना चाहिए और इन संकल्पों को पूरा करने के लिए जी जान से लग जाना चाहिए।इतिहास कहता है कि किसी भी देश का स्वतंत्रता दिवस एक खास महोत्सव होने के साथ-साथ खुद का आत्म निरीक्षण करने का भी समय होता है हमने इतने सालों में क्या पाया ? क्या खोया ? जिन लक्ष्यों को हम लेकर शुरू से चले थे क्या उन लक्ष्यों को हमने पाया ? इसका सिंहावलोकन होना चाहिए इतिहास की तरफ नजर उठा कर देखे तो 15 अगस्त 1947 को ही देश में दो धाराएं अलग अलग दिख रही थी एक और प्रधानमंत्री प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जिन्होंने विक्टोरियन अंग्रेजी में प्रसिद्ध ट्रस्टट विद डेस्टिनी का भाषण दिया तो वही पूरा देश महात्मा गांधी को ढूंढ रहा था क्योंकि उस महान कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी कहीं नजर नहीं आ रहे थे महात्मा गांधी उस समय नोआखाली में थे lजहां पर दंगे हुए थे और उन दंगों को रोकने की के लिए गांधी जी वहां पर थे गांधीजी के उस क्षमता को देखकर ही लॉर्ड माउंटबेटन ने उन्हें वन मैन आर्मी कहा था उस दिन गांधी जी ने एक बात कही थी कि आज से गांधी अंग्रेजी भूल गया गांधी जी कहते थे कि हम स्वतंत्र होना चाहते हैं कि भारत का लक्ष्य अन्य रास्तों से भिन्न है हम विश्व को रास्ता दिखाना चाहते हैं उनका कहना था कि भारत एक मात्र देश है जो विश्व को अनेक संकटों से मुक्ति दिला सकता है।आज भारत की 75 मी स्वतंत्रता के वर्षगांठ को देखकर विश्व के कई देश ईर्ष्या में भी होंगे क्योंकि उन देशों ने कभी यह सोचा ही नहीं होगा कि भारत इतनी जल्दी इतनी अधिक प्रगति करेगा और विश्व के विभिन्न मंचों पर अपना धाक जमा लेगा।1962 में जिस चीन से हमने लड़ाई हारी थी आज हम उस चीन को गलवान घाटी से मुंह तोड़ जवाब देते हैं और उसे अपनी सीमा से बाहर खदेड़ कर रख देते हैं। यह अमृत महोत्सव जो इस साल 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था और पूरे देश को यह संकल्प दिलाया यह भी संयोग है कि इस महोत्सव की शुरुआत उसी दिन हुई जिस दिन हमारे आजादी के सबसे बड़े नायक महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा शुरू की थी आजादी का अमृत महोत्सव 15 अगस्त 2022 के 75 सप्ताह पूर्व शुरू हुआ है और 15 अगस्त 2023 तक चलेगाा।जिन विदेशी आक्रांता ने सोने की चिड़िया देश को लूटा और हमारा हमारे गरीबी का मजाक उड़ाया हमने इन मात्र 75 सालों में ही दुनिया के टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर उन को मुंहतोड़ जवाब दिया भारत आज दुनिया की चार सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में से है खाद्यान्न उत्पादन में भारत केवल अपनी जरूरत ही नहीं बल्कि दुनिया आधी दुनिया का भी पेट भर रहा है मिड डे मील सिर्फ भारत का ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भोजन कार्यक्रम है जिसमें रोज 12 करोड़ बच्चों को खाना दिया जाता है हमारा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम मनरेगा दुनिया के लिए एक अनुकरणीय मिसाल बन चुका है। भारत के स्वतंत्रता के इतिहास में तीन महत्वपूर्ण  वर्ष हैं जो हर किसी को याद रहेंगे और याद होनी भी चाहिए। पहला 1757 दूसरा सन अट्ठारह सौ सत्तावन और सन 1957 सन 1757 में प्लासी के युद्ध में जहां पहली बार अंग्रेजों ने लॉर्ड क्लाइव के नेतृत्व में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला  को हराकर अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना की वही 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में आजादी पाने की एक नई जोश और नया लहर दिखा अंग्रेजों ने 1757 से 1947 तक 190 वर्षों तक हिंदुस्तान पर राज किया और देश को जब वह छोड़ कर गए तो सब कुछ लूट चुके थे यहां के उद्योग धंधे कुटीर उद्योगों को नष्ट कर चुके थे पर फिर भी हमने इन 75 सालों में खुद को बदल कर रख दिया। इसको ऐसे समझें सन 1947 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन मात्र 50 मिलीयन टन था जो 2020-21 में 303.34 मिलियन टन हो गया है lआर्थिक विकास और जीडीपी की बात करें तो 1947 में जीडीपी भारत की जीडीपी 2.7 लाख करोड़ थी जो 2020 में बढ़कर 134 लाख करोड़ हो गई यह वृद्धि लगभग 50 गुना के बराबर है भारत वर्तमान में 2.65 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत ने 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का भी लक्ष्य रखा है आज भारत 190 देशों की इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 63वें स्थान पर हैं।हेल्थ सेक्टर की बात करें तो जहां भारत 1947 में भारत में औसत आयु मात्र 31 वर्ष थी जो 2020 में बढ़कर 69.73 वर्ष हो गई है हम पूरे विश्व में वैक्सीन भेज रहे हैं यह भी बदलते हुए भारत की बदली ही पहचान है।एक देश के लिए हमें गर्व होता है कि एक देश अपनी परिस्थितियों को सुधारते सुधारते कैसे सफल होता है और अन्य देशों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनता है एक देश के लिए 75 वर्ष की आयु अधिक नहीं होती पर जब हम इस अवधि में अपने आसपास के देशों के अनिश्चितता देखते हैं तो हमें गर्व होता है कि हमने कैसे परिस्थितियों के साथ खुद को बदलते सुधारते और सफल होते हुए अन्य देशों के लिए एक उदाहरण बने आज भारत की आज भारत इमर्जिंग इकोनॉमीी, हार्डकोर डिप्लोमेसी, और इंडिया सेंट्रिक पॉलिसीज के जरिए पूरे दुनिया में आगे बढ़ रहा है ताकि भारत कॉन्टिनेंटल मैरिटाइम पावर के रूप में स्वीकार किया जाए यही कारण है कि भारत विकासशील अर्थव्यवस्था की परिधि से बाहर आकर उभरती अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है और लंबे समय तक सॉफ्ट डिप्लोमेसी के जगह हार्डकोर डिप्लोमेसी को अपनाया है।अगर हमारे पास 5000 साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व करने के लिए बहुत कुछ है तो हमने जो नया कुछ पाया है उस पर भी गौरवान्वित होने के लिए भी बहुत कुछ है परंतु चुनौतियां भी देश के समक्ष उतनी ही हैं हमें आजादी के 75 वीं वर्षगांठ पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम और नई नए लक्ष्यों को पूरा करें और जो लक्ष्य पूरेे नहीं हैं उनको भी पूरा करें और देश को बेहतर बनाएं। आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं जय हिंद वंदे मातरम !
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