भारत कोरोना से लड़कर विजयी होगा: PM मोदी

Unlock 1 के 18वें दिन ने फिर दिलाया विश्वास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत कोविड-19 से उत्पन्न संकट की स्थिति में बैठकर हाय तौबा मचाने की बजाय इसे आत्मनिर्भर बनने के एक अवसर के रूप में देखता है। वाणिज्यिक कोयला खनन के उद्घाटन के अवसर पर अपने विचार रखते हुए मोदी ने कहा कि भारत कोरोना वायरस से लड़कर विजयी होगा। उन्होंने कहा, “भारत इसे कोई बड़ी आपदा के रूप में देखकर बैठकर हाय तौबा मचाने के पक्ष में नहीं है। यह कितनी भी बड़ी आपदा हो, भारत इसे एक अवसर के रूप में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने कहा, “भारत कोरोना वायरस से लड़कर विजयी होगा।” उन्होंने कहा कि महामारी ने भारत को आत्मनिर्भर बनने का एक अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने का अर्थ है आयात में कटौती कर विदेशी मुद्रा का गरीबों के कल्याण के लिए प्रयोग करना। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह भी है कि हम घरेलू संसाधनों का उपयोग करें और आयात की बजाय ‘मेक इन इण्डिया’ को बढ़ावा दें। बृहस्पतिवार को उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि वाणिज्यिक खनन के लिए कोयले की खदानों की पहली नीलामी देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “भारत कोविड-19 के इस संकट को अवसर में बदल देगा। इसने भारत को आत्मनिर्भर होना सिखाया है… आयात पर निर्भरता कम करना सिखाया है।”
रोजगार गारंटी योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को प्रवासी श्रमिकों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत करेंगे। कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने गांवों को लौट गए हैं और वहां उन्हें रोजगार की समस्या आ रही है। ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ नाम की यह योजना मुख्य रूप से उन छह राज्यों पर केंद्रित होगी, जहां सबसे अधिक प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौटे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि इस बड़ी ग्रामीण रोजगार योजेना से घर लौटे श्रमिकों को सशक्त किया जा सकेगा और उन्हें 125 दिन का रोजगार मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये 20 जून को ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का शुभारंभ करेंगे। यह अभियान बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के तेलिहर गांव से शुरू किया जाएगा। बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। सीतारमण ने कहा, ‘‘इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा के 116 जिलों में प्रत्येक से 25,000 श्रमिकों को इस अभियान के लिए चुना गया है। इनमें 27 पिछड़े जिले भी शामिल हैं। इन जिलों के तहत करीब 66 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक आएंगे। छह राज्यों के 116 जिलों के गांव इस कार्यक्रम से साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) और कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिये जुड़ेंगे। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सामाजिक नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। यह अभियान 125 दिनों का है जिसमें प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए 25 अलग तरह के कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही इसके जरिये देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा खड़ा किया जाएगा। इसके लिए 50,000 करोड़ रुपये के संसाधन लगाए जाएंगे। सीतारमण ने कहा कि यह 50,000 करोड़ रुपये बजट का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी जिलों में घर लौटे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर रहे हैं। सभी संपत्ति सृजन का हिस्सा होंगे।’’ उन्होंने कहा कि इस योजना का समन्वय 12 अलग-अलग मंत्रालय करेंगे जिनमें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खनन, पेयजल एवं स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि मंत्रालय शामिल हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की 25 योजनाओं को एक साथ लाया जाएगा और ये श्रमिक ग्राम पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और जल संरक्षण परियोजनाओं में काम करेंगे। सीतारमण ने कहा, ‘‘हम 116 जिलों में 25 अलग-अलग कार्यों के लिए पैसा पहले ही डाल देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि इन जिलों के सभी प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मिल सके।’’ यह पूछे जाने पर कि पश्चिम बंगाल को इस अभियान में क्यों नहीं शामिल किया गया, ग्रामीण विकास मंत्री एन एन सिन्हा ने कहा कि जब यह कार्यक्रम तैयार किया जा रहा था उस समय राज्य ने अपने घर लौटने वाले श्रमिकों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया था। उन्होंने कहा, ‘‘कम से कम 25,000 प्रवासी श्रमिकों वाले अन्य जिले के इस अभियान में शामिल होने पर कोई रोक नहीं है। यदि हमें आंकड़ा मिलेगा, तो भविष्य में निश्चित रूप से उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा।’’ इस सवाल पर कि क्या इस कार्यक्रम को 125 दिन से आगे बढ़ाया जा सकता है, सीतारमण ने कहा कि हम उन्हें चार महीने की स्पष्ट रूपरेखा दे रहे हैं। ‘‘आगे चलकर देखते हैं कि कितने श्रमिक रुके रहते हैं। सरकार एक वृहद रूपरेखा लेकर आई है जिसके जरिये उन्हें तत्काल आजीविका उपलब्ध कराई जाएगी।’’ उन्होंने बताया कि बिहार के 32 और उत्तर प्रदेश के 31 जिले इस अभियान का हिस्सा हैं। इस मौके पर श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा, ‘‘आपने पंजाब की खबर सुनी होगी कि श्रमिकों को रेल टिकट भेजकर वापस बुलाया जा रह है।’’ उन्होंने कहा कि जैसे स्थिति सामान्य होगी, चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी।
कोविड-19 जांच की नई दरें लागू
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 जांच के लिए 2400 रुपये का शुल्क तय करने के बाद, सर गंगा राम अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि उनके यहां नई दरें बृहस्पतिवार से प्रभावी हो गई हैं जबकि अन्य निजी प्रयोगशालाओं ने दावा किया कि उन्हें अभी ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को ऐलान किया था कि दिल्ली में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए होने वाली जांच के लिए 2400 रुपये शुल्क देना होगा। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा रविवार को गठित एक उच्च स्तरीय समिति के सुझाव पर हुआ है और यह जांच अब रैपिड एंटीजन पद्धति से की जाएगी। गंगाराम अस्पताल मध्य दिल्ली में कोविड-19 के लिए निर्दिष्ट अस्पताल है और इसकी प्रयोगशाला उन 40 प्रयोगशालाओं में से एक है जिसे दिल्ली सरकार ने जांच करने के लिए अधिकृत किया है। अस्पताल के प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ डीएस राणा ने एक बयान में कहा, ”हम दरों में संशोधन का स्वागत करते हैं और नई दरें आज से लागू कर दी गई हैं। महामारी के मुश्किल वक्त को देखते हुए नई दरें काफी व्यवहार्य हैं।” दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को ट्वीट कर कहा कि शहर में कोविड-19 जांच की दरों को घटाकर 2400 रुपये कर दिया गया है। इस बीच, प्रयोगशाला सुविधा से लैस कुछ निजी अस्पतालों और निजी प्रयोगशालाओं ने कहा कि उन्हें अब तक आदेश नहीं मिला है। अपोलो इंद्रप्रस्थ अस्पताल के अधिकारियों ने संपर्क करने पर कहा कि उन्हें अभी आदेश नहीं मिले हैं। कुछ ने संकेत दिया कि दरों को लेकर कुछ असमंजस है। डॉ. लाल पैथ के डॉ. अरविंद लाल ने दावा किया कि नई दरें सिर्फ उन प्रयोगशालाओं पर लागू होती हैं जिनको सरकार आउटसोर्स कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जो लोग घर पर निजी प्रयोगशाला से जांच की सुविधा लेना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी दरें ही लागू रहेंगी। उन्होंने दावा किया कि ऐसा लगता है कुछ भ्रम की स्थिति है और अभी हमें सरकार से आदेश नहीं मिला है। दिल्ली के स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक, शहर में बुधवार को कोरोना वायरस के संक्रमण के 2,414 नए मामले सामने आए थे जो एक दिन में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद दिल्ली में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 47,000 के पार हो गए। वहीं मृतकों का आंकड़ा 1904 हो गया है।
10 राज्यों ने की मांग
दस से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने गरीबों व प्रवासियों को मुफ्त खाद्यान्न तथा दाल वितरण योजना की अवधि तीन महीने बढ़ाये जाने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना (पीएमजीएवाई) के तहत, सरकार राशन दुकानों के जरिये अप्रैल-जून के लिये प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम खाद्यान्न और प्रति परिवार एक किलोग्राम दाल मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही आठ करोड़ वैसे प्रवासियों को भी मुफ्त अनाज और दाल उपलब्ध कराई जा रही है, जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। यह कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद के लिये घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का हिस्सा है। पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “हमें इन दो योजनाओं के विस्तार के लिये 10 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं। हम मामले पर विचार कर रहे हैं और उसके आधार पर ही मंत्रिमंडल को प्रस्ताव आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जायेगा।” उन्होंने कहा कि असम, कर्नाटक, पुडुचेरी, तमिलनाडु, राजस्थान, पंजाब, केरल, मिजोरम, छत्तीसगढ़ उन राज्यों में हैं, जिन्होंने योजना अवधि विस्तार की मांग की है। पासवान ने कहा कि केंद्रीय भंडार में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। उन्होंने राज्य सरकारों से मानसून से पहले अग्रिम में अनाज उठाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को समय पर वितरण सुनिश्चित करने की अपील की है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डी वी प्रसाद ने कहा कि पीएमजीएवाई के तहत प्रवासियों को मुफ्त अनाज का वितरण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि वितरण सभी राज्यों में जारी है, लेकिन बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में थोड़ा धीमा है। इससे पहले, पासवान ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष गेहूं खरीद रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने कहा कि भंडारण के बारे में भी चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि अभी भंडारण क्षमता आठ करोड़ टन से अधिक अनाज रखने की है, जबकि वार्षिक आवश्यकता छह करोड़ टन की है। उन्होंने कहा कि भंडारण की चिंता केवल पंजाब और हरियाणा में है, जहां से अधिकतम अनाज की खरीद की जाती है, लेकिन यह एक छोटी अवधि की समस्या है।
रथ यात्रा पर न्यायालय की रोक
उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इस साल पुरी में 23 जून से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा और इससे संबंधित गतिविधियों पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। न्यायालय ने कहा कि ‘‘अगर हम इसकी अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।’’ प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुये इस साल पुरी में रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर हम इस साल रथ यात्रा आयोजित होने देंगे तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।’’ पीठ ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम आयोजित नहीं हो सकता। जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल दुनिया भर के लाखों श्रद्धालु शामिल होते है। यह रथ यात्रा महोत्सव 10 से 12 दिन चलता है जो 23 जून को शुरू होने वाला था और रथ यात्रा की वापसी ‘बहुदा जात्रा’ की तारीख एक जुलाई निर्धारित है। इस महोत्सव के लिये भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिये लकड़ी के तीन विशाल रथ बनाये जाते हैं और पुरी में नौ दिनों के दौरान श्रृद्धालु इसे दो बार तीन किलोमीटर से ज्यादा दूर तक खींचते हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘रथ यात्रा के लिये इतनी बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं के एकत्र होने से उत्पन्न खतरे को देखते हुये हम सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों के मद्देनजर प्रतिवादियों को इस वर्ष रथ यात्रा का आयोजन करने से रोकना उचित समझते हैं।’’ पीठ ने कहा के संविधान का अनुच्छेद 25 (1) लोक व्यवस्था और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुये सभी को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, उसके अनुरूप आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। पीठ ने कहा, ‘‘तदनुसार, हम निर्देश देते हैं कि ओडिशा के मंदिर शहर या राज्य के किसी अन्य हिस्से में इस साल कहीं भी रथ यात्रा का आयोजन नहीं होगा। हम यह भी निर्देश देते हैं कि इस दौरान रथ यात्रा से संबंधित कोई भी पंथनिरपेक्ष या धार्मिक गतिविधि का आयोजन नहीं किया जायेगा।’’ इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले गैर सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर रथ यात्रा की अनुमति दी गयी तो बड़ी संख्या में लोग एकत्र होंगे जिस वजह से उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का बहुत ज्यादा खतरा बना रहेगा। केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें इस मसले पर जवाब देने के लिये कल तक का वक्त चाहिए। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह प्रतिवादियों को 23 जून से शुरू होने वाला महोत्सव करने से रोक रही है और याचिका पर नोटिस जार कर रही है। नोटिस का जवाब चार सप्ताह में दाखिल करना होगा। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें हाल ही में पता चला कि शब्द जुगरनॉट भगवान जगन्नाथ से संबंधित है जिसका अर्थ एक बल से है जिसे रोका नहीं जा सकता। इस पर मेहता ने कहा, ‘‘लेकिन आपने आज इसे रोक दिया है।’’ पीठ ने अपने आदेश में इस तथ्य का जिक्र किया है कि इसे लेकर कोई विवाद नहीं है कि 23 जून, 2020 से होने वाले वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव में 10 से 12 लाख श्रृद्धालु हिस्सा लेते है और यह आयोजन 10 से 12 दिन चलता है। इस मामले में एक हस्तक्षेपकर्ता के वकील ने कहा कि ओडिशा सरकार पहले ही एक अधिसूचना जारी कर चुकी है कि 30 जून तक कोई भी सार्वजनिक समागम नहीं होगा। शीर्ष अदालत ने ओडिशा स्थित एक गैर सरकारी संगठन ओडिशा विकास परिषद की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में 10 से 12 दिन चलने वाली रथ यात्रा को इस साल रद्द करने या फिर इसे स्थगित करने का अनुरोध किया था। इस आयोजन में दुनिया भर के लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा, भारतीय विकास परिषद नाम के संगठन के सुरेन्द्र पाणिग्रही ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के नौ जून के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर कर रखी है। इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि वह कोविड-19 के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुये रथ यात्रा महोत्सव आयोजित करने के बारे में निर्णय ले।
वेतन समय पर देने के निर्देश
केन्द्र ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 मरीजों के इलाज में शामिल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन का समय पर भुगतान करने के निर्देश दिये और इस आदेश का अनुपालन नहीं करने वाले अस्पतालों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केन्द्र से कहा था कि वह कोविड-19 के मरीजों का उपचार कर रहे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन का भुगतान करने और उन्हें आवश्यक पृथक-वास उपलब्ध कराने के लिये राज्यों को निर्देश दे। शीर्ष अदालत के इस निर्देश के एक दिन बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का यह आदेश आया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, ‘‘सरकार ने अदालत को बताया था कि आवश्यक निर्देश जारी किये जायेगे। यह निर्देश दिये जाते है कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित होगा कि कोविड-19 से संबंधित ड्यूटी कर रहे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन का भुगतान समय पर किया जाये।’’ आदेश में कहा गया है, ‘‘राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा और उल्लंघन होने पर इसे आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अपराध के रूप में लिया जायेगा और इसके अनुसार दोषी अस्पतालों, संस्थानों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।’’ शीर्ष् अदालत एक निजी चिकित्सक आरूषि जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोविड-19 के खिलाफ जंग में पहली कतार में खड़े होकर इसका मुकाबला कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा या फिर वेतन में कटौती की जा रही है अथवा इसके भुगतान में विलंब किया जा रहा है। यही नहीं, इस चिकित्सक ने 14 दिन के पृथक-वास की अनिवार्यता खत्म करने संबंधी केन्द्र के नए दिशानिर्देश पर भी सवाल उठाये थे।
दिल्ली-एनसीआर को अपनानी होगी साझा रणनीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महामारी से निपटने के वास्ते बृहस्पतिवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए संयुक्त रणनीति अपनाने पर बल दिया और कहा कि इस कार्य में गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे उपनगरों को दिल्ली से अलग नहीं किया जा सकता। दिल्ली और एनसीआर में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा करने के लिए अधिकारियों के साथ की गई बैठक में शाह ने अपने विचार व्यक्त किए। शाह ने ट्वीट किया, “दिल्ली-एनसीआर की संरचना को देखते हुए कोरोना वायरस महामारी के विरुद्ध सभी संबंधित विभागों को एक होकर एक रणनीति पर काम करना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में आज मैंने दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र तथा दिल्ली-एनसीआर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात कर यथाशीघ्र एक रणनीति विकसित करने पर चर्चा की।” गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार शाह ने कहा कि दिल्ली और एनसीआर करीब से जुड़े हुए हैं इसलिए एनसीआर में सभी संबंधित अधिकारियों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। सूत्र ने कहा, “महामारी से निपटने के वास्ते दिल्ली-एनसीआर के लिए गृह मंत्री ने संयुक्त रणनीति अपनाने पर बल दिया।” शाह ने कहा कि कोविड-19 की जांच की संख्या बढ़ाने और संक्रमितों का इलाज करने की जरूरत है। गृह मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि एनसीआर में आने वाले जिले, दिल्ली में कोविड-19 की जांच कराने के लिए 2400 रुपये मूल्य निर्धारित करने पर विचार कर सकते हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि शाह ने बैठक में यह भी कहा कि एक विशेषज्ञ समिति ने दिल्ली में कोविड-19 के मरीजों के लिए इलाज और बिस्तर की दर तय की है और इसे बातचीत के बाद एनसीआर में आने वाले जिलों में लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) द्वारा मान्यता प्राप्त त्वरित एंटीजन प्रक्रिया से जांच करना बेहतर होगा जिससे जांच करने की क्षमता में वृद्धि होगी और रोग का जल्दी पता चल सकेगा। वक्तव्य में कहा गया कि शाह ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों के अधिकारियों को कोविड-19 के इलाज के लिए उपलब्ध बिस्तर, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, आईसीयू और एम्बुलेंस के बारे में जानकारी और इन संसाधनों की संख्या बढ़ाने की योजना 15 जुलाई तक केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपने का निर्देश दिया ताकि एनसीआर में महामारी से निपटने की साझा रणनीति बनाई जा सके। एक अन्य सूत्र ने बताया कि शाह ने आश्वासन दिया है कि एनसीआर में आने वाले जिलों में महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार सभी प्रकार की सहायता मुहैया कराएगी। शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव, एनसीआर जिलों के वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य तथा गृह मंत्रालयों और आईसीएमआर के अधिकारी मौजूद थे।
रोज 15 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक वापस आ रहे
कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये जारी लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र छोड़कर वापस जाने वाले प्रवासी श्रमिकों में से 15 हजार मजदूर रोजना वापस लौट रहे हैं क्योंकि प्रदेश में उद्योगों में काम बहाल होना चरणबद्ध तरीके से शुरू हो गया है। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में औद्योगिक गतिविधि बंद हो जाने के कारण प्रवासी श्रमिकों ने राज्य से पलायन शुरू कर दिया था। मंत्री ने बयान जारी कर कहा, ‘कम से कम 15 हजार श्रमिक मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, रायगढ़ एवं राज्य के अन्य हिस्सों में हर रोज आ रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि औसतन मुंबई, ठाणे, और नवी मुंबई में करीब 11 हजार 500 श्रमिक रोज आ रहे हैं जबकि चार हजार से पांच हजार श्रमिक रोजाना गोंदिया, नंदुरबार, कोल्हापुर, नागपुर एवं पुणे लौट रहे हैं। मंत्री ने बताया कि हालांकि, महाराष्ट्र और प्रवासी श्रमिकों के राज्यों के बीच फिलहाल बहुत कम गाड़ियां चल रही हैं। जब औद्योगिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर शुरू होगी तो प्रवासियों के वापस आने की संख्या और बढ़ जाएगी। देशमुख ने कहा, ‘उचित सावधानी बरती जाएगी।’ उन्होंने कहा कि आने वाले प्रवासी श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है और उन्हें घर में एकांतवास में भेजा जा रहा है।
उप्र सरकार से रिपोर्ट तलब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी और निजी अस्पतालों में गैर कोविड-19 मरीजों के लिए ओपीडी खोलने के संबंध में राज्य सरकार को एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिये बृहस्पतिवार को कहा है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में करेगी। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने ऑल इंडिया पीपुल फ्रंट, विशाल टंडन और विनायक मिश्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया। इन याचिकाकर्ताओं ने 31 मार्च, 2020 को जारी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी है। राज्य सरकार ने 31 मार्च, 2020 को एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें इस राज्य में अस्पतालों और नर्सिंग होम को ओपीडी में नियमित मामलों को देखने से रोक दिया गया था और केवल गैर कोविड मरीजों के गंभीर मामलों को देखने को कहा गया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि चूंकि यह बीमारी वैक्सीन आने तक बनी रहने की संभावना है, इसलिए कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एक अलग ढांचागत सुविधा की व्यवस्था करना आवश्यक है।
याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया कि गैर कोविड मरीजों के इलाज पर रोक वाली सरकारी अधिसूचना रद्द की जाए और राज्य सरकार को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एक अलग व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही नियमित मामलों के लिए ओपीडी की सुविधा खोली जाए। राज्य के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने 16 जून, 2020 को जारी अधिसूचना की एक प्रति अदालत के समक्ष पेश की जिसमें राज्य सरकार ने मरीजों की कोविड-19 की जांच करने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी खोलने की अनुमति देने का निर्णय किया है। इसी तरह, निजी क्लिनिकों में भी कुछ शर्तों के साथ ओपीडी की अनुमति दी गई है। अपर महाधिवक्ता ने सूचित किया कि इस अधिसूचना में आगे इस बात का उल्लेख है कि तीसरे चरण में सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी चालू करने पर विचार किया जाएगा जो राज्य में कोरोना महामारी की स्थिति पर निर्भर करेगा।
बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर डेढ़ लाख करने के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून के अंत तक कोरोना वायरस संक्रमण की जांच क्षमता बढ़ाकर 25 हजार प्रतिदिन तथा बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर डेढ़ लाख करने के बृहस्पतिवार को निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने टीम-11 की बैठक में जून, 2020 के अन्त तक कोविड अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या को बढ़ाकर डेढ़ लाख किए जाने के निर्देश दिए हैं। अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कोरोना वायरस के रोगियों के लिए 1,01,236 बिस्तर मौजूद हैं। प्रदेश में एल-1 के 403, एल-2 के 75 व एल-3 के 25 केंद्र बनाये गये हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 20 जून, 2020 तक जांच क्षमता को बढ़ाकर 20 हजार जांच प्रतिदिन किए जाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं तथा माह के अन्त तक 25,000 जांच प्रतिदिन किये जाने के निर्देश दिये हैं। अवस्थी ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में एक दिन में अब तक का सर्वाधिक 16, 546 जांच की गयीं। वर्तमान में प्रदेश कोविड-19 की जांच में देश में पांचवे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि जांच क्षमता को बढ़ाते हुए प्रदेश को पहले स्थान पर लाये जाने का प्रयास किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मार्च, 2020 में केजीएमयू (किंग जार्ज मेडिकल यूनीवर्सिटी) में एकमात्र प्रयोगशाला में एक दिन में केवल 60 जांच की जा रही थीं। वर्तमान में प्रदेश में 23 राजकीय प्रयोगशालाएं एवं 11 निजी क्षेत्रों में जांच का कार्य प्रारम्भ किया गया है।
रैपिड एंटीजन पद्धति के जरिये जांच
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में निरूद्ध क्षेत्रों के आसपास स्थित 169 केन्द्रों में बृहस्पतिवार को रैपिड एंटीजन पद्धति के जरिये कोविड-19 के लिए जांच शुरू की। एक अधिकारी ने बताया कि एंटीजन जांच में कुल 341 टीम शामिल हैं और इस जांच से 30 मिनट के भीतर रिपोर्ट मिल जायेगी। केन्द्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि केन्द्र की योजना राष्ट्रीय राजधानी में बनाये गये 169 नये जांच केन्द्रों में छह लाख रैपिड एंटीजन कोविड-19 जांच करने की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘आज दो महत्वपूर्ण बातें हुई। दिल्ली में कोविड-19 की जांच की दरों को घटाकर 2,400 रुपये कर दिया गया है और रैपिड-एंटीजन जांच शुरू हो गई है। मुझे उम्मीद है कि लोगों को अब जांच कराने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।’’ एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कई केन्द्रों पर सुबह नौ बजे से जांच शुरू हो गई थी। ऐसे लोग जिनमें हल्के लक्षण हैं या लक्षण नहीं है, वे अपनी जांच करवा सकते हैं। दक्षिणपूर्व दिल्ली की सनलाइट कॉलोनी में स्थित एक केन्द्र में जांच कराने आये लोगों ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक घंटा लगा। दिल्ली में बुधवार को कोरोना वायरस के 2,414 नये मामले सामने आने के बाद कुल मामलों की संख्या 47 हजार के पार पहुंच गई है जबकि इस महामारी से मृतकों की संख्या 1,904 हो गई है।
कर्नाटक में कोरोना वायरस से 12 और की मौत
कर्नाटक में कोरोना वायरस से बृहस्पतिवार को 12 और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 114 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अपने बुलेटिन में बताया कि राज्य में इस महामारी के 210 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या 7,944 हो गई है। बुलेटिन के अनुसार राज्य में और 179 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। विभाग ने बताया कि राज्य में 18 जून की शाम तक कोविड-19 के मामलों की संख्या 7,944 हो गई है जिनमें से 114 लोगों की मौत हुई है और 4,983 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इस महामारी से जान गंवाने वाले 12 लोगों में से आठ बेंगलुरु शहरी, और कोप्पल, बीदर, विजयपुरा एवं कलबुर्गी से एक-एक मरीज शामिल हैं।
अहमदाबाद में संक्रमित मरीजों की संख्या 17946
अहमदाबाद में कोरोना वायरस संक्रमण के बृहस्पतिवार को 317 नये मामले सामने आने के साथ ही संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ कर 17 हजार 946 हो गयी है जबकि 22 अन्य मरीजों के मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़ कर 1275 पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी। विभाग ने बताया कि अहमदाबाद में जहां 317 लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुयी है वहीं इससे 22 लोगों की मौत हो गयी है। इसमें कहा गया है कि अहमदाबाद में 281 और लोगों को सफल इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी, जिसके साथ ही अब तक संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 12 हजार 561 हो गयी है। विभाग के अनुसार गुजरात में आज कोरोना वायरस संक्रमण के 510 नये मामले सामने आये और 33 लोगों की इससे मौत हो गयी है । इनमें से अहमदाबाद में 317 लोग संक्रमित हुये हैं और 22 की मौत हुयी है।
तमिलनाडु में 49 और संक्रमितों की मौत
तमिलनाडु में कोरोना वायरस के कारण बृहस्पतिवार को 49 और संक्रमितों की मौत हो गई जबकि लगातार दूसरे दिन दो हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में बताया गया है कि बृहस्पतिवार को 26,736 नमूनों की जांच की गई और 2141 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई। बुलेटिन में कहा गया है कि 49 और रोगियों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 625 हो गयी है। बुलेटिन में बताया गया है कि बृहस्पतिवार को 1,017 लोगों को अस्पतालों से छुट्टी दी गई है। इसके बाद संक्रमण से ठीक हुए लोगों की संख्या 28,641 हो गयी। बुलेटिन के मुताबिक, कुल मामले 52,334 हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश में एक दिन में सबसे ज्यादा 604 नए मामले
उत्तर प्रदेश में गुरुवार को कोविड-19 संक्रमण के 604 नए मामले सामने आए। प्रदेश में एक दिन में आने वाले नए मामलों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19 संक्रमित 23 और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही प्रदेश में इस संक्रमण से मरने वालों की तादाद बढ़कर 488 तक पहुंच गई है। इस अवधि में आगरा में चार, मेरठ तथा गाजियाबाद में तीन-तीन, लखनऊ, इटावा और कानपुर में दो-दो तथा फिरोजाबाद, वाराणसी, बुलंदशहर, प्रयागराज, गोंडा, बरेली और झांसी में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून के अंत तक कोरोना वायरस संक्रमण की जांच क्षमता बढ़ाकर 25 हजार प्रतिदिन तथा बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर डेढ़ लाख करने के बृहस्पतिवार को निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने टीम-11 की बैठक में जून, 2020 के अन्त तक कोविड अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या को बढ़ाकर डेढ़ लाख किए जाने के निर्देश दिए हैं। अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,01,236 बिस्तर मौजूद हैं। प्रदेश में एल-1 के 403, एल-2 के 75 व एल-3 के 25 केंद्र बनाये गये हैं। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19 के 604 नए मामले सामने आए हैं। यह प्रदेश में एक दिन में आए मामलों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले बुधवार को 583 मामले सामने आए थे। इसके पूर्व, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के अब तक कुल 15,785 मामले सामने आए हैं जिनमें से 9,638 लोग पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। इस तरह प्रदेश में कोविड-19 के कुल 5,659 रोगी उपचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को 16,546 जांच की गईं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में अब नमूनों की क्रमरहित जांच शुरू की है। किसी के संक्रमित होने का पता चलने या जिसमें बीमारी के लक्षण होते हैं, उनके नमूनों की जांच होती है। स्वास्थ्यकर्मियों की भी जांच की जाती है। निषिद्ध क्षेत्रों की प्रक्रिया से संबंधित आशा कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न लोगों की भी जांच की जाती है। प्रसाद ने कहा कि कुछ जांच इससे अलग भी शुरू की गई हैं। जिन 18 जिलों में बहुत ज्यादा संख्या में प्रवासी कामगार लौटे थे, वहां चार-चार गांव ऐसे चुने गए जिनमें 100 या उससे अधिक प्रवासी कामगार लौटे थे। उनके लौटने के 15 दिन बाद क्रमरहित जांच कराई गई थी। इसका मकसद यह देखना था कि कहीं प्रवासी कामगारों के कारण गांव के अन्य लोगों को संक्रमण तो नहीं हो रहा है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि हालांकि ऐसी जांच में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया। इसका मतलब है कि ग्राम निगरानी समितियों ने अच्छा काम किया और प्रवासी श्रमिक भी अपने उत्तरदायित्व का भलीभांति पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ अन्य क्रमरहित जांच भी शुरू की गई हैं। प्रदेश के सभी जनपदों के वृद्धाश्रमों, राजकीय बाल गृह और नारी निकेतनों से नमूने एकत्र किए गए हैं। इनमें कुछ जगहों पर संक्रमण मिला। कानपुर नगर के राजकीय बालगृह और नारी निकेतन में संक्रमण मिला। इसके बाद वहां रहने वाले और लोगों के नमूने लिए गए जिसमें कुल 33 लोग संक्रमित मिले। प्रसाद ने बताया कि सरकारी और निजी अस्पतालों में अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की भी जांच कराई गई है। इसमें उन लोगों को चुना गया, जिनका जनता से अधिक मिलना-जुलना होता है। इसमें पंजीकरण डेस्क पर बैठने वाला क्लर्क, सुरक्षा गार्ड और ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक शामिल हैं। क्रमरहित जांच पूरे प्रदेश में की गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह की जांच के अगले चरण में ऑटो चालकों, ट्रक चालकों, ढाबा कर्मियों को शामिल किया जाएगा। होम डिलीवरी से जुड़े लोगों, फल-सब्जी विक्रेता, दवाई की दुकानों में काम करने वाले लोगों आदि के नमूनों की भी चरणबद्ध रूप से क्रमरहित जांच कराई जा रही है।
ठीक होने के बाद मनाया गया शादी का जश्न
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में दो जून को शादी के अगले ही दिन कोविड-19 संक्रमण के चलते एक अस्पताल में भर्ती कराए गए एक व्यक्ति के सामने, ठीक होकर छुट्टी मिलने के बाद शादी जैसा नजारा पेश किया गया। अस्पताल के अधीक्षक शुभाशीष मित्रा ने पत्रकारों को बताया कि 20 साल के सुप्रियो बंधोपाध्याय, पियाली बंधोपाध्याय के साथ वैवाहिक बंधन में बंधने के अगले दिन यानि तीन जून को कोविड-19 से संक्रमित पाए गए थे। मित्रा ने कहा, ‘डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने उनके डर को दूर किया और निरंतर उपचार के बाद वह ठीक हो गए। तीन दिन पहले उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है।’ शादी के बाद पारंपरिक रस्मों के बिना ही दुल्हन ससुराल पहुंची क्योंकि उसके पति को फुलेश्वर इलाके के संजीवनी अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल प्रबंधन और जिला स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्टाफ और दूल्हा-दुल्हन के परिवार वालों से सलाह-मशविरा करके मंगलवार दोपहर सुप्रियो के लिये भव्य आयोजन की योजना बनाई। इस दौरान दूल्हे की पोशाक पहने सुप्रियो, लाल रंग की साड़ी पहनी अपनी पत्नी पियाली के साथ नजर आए। पश्चिम बंगाल के मंत्री डॉक्टर निर्मल दास मांझी भी दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने पहुंचे। सुप्रियो दासनगर के रहने वाले हैं जबकि पियाली हुगली जिले के मसात की निवासी हैं। इस मौके पर सुप्रियो ने पत्रकारों से कहा, ‘जब मुझे पता चला कि मैं कोरोना वायरस संक्रमित हूं तो मैं डर गया था, लेकिन दासनगर पुलिस थाने के मेरे परिचित प्रभारी अधिकारी और अस्पताल के डॉक्टरों ने मेरी हिम्मत बढ़ाई।’ उन्होंने कहा, ‘मैं संकट की इस घड़ी में मेरा साथ देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं। मुझे उम्मीद है कि 14 दिन की पृथक वास अवधि पूरी करने के बाद मैं अपने काम पर लौट पाऊंगा।’
मलेरिया की दवा रोक नहीं पाएगी मौतों को
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष वैज्ञानिक ने कहा कि यह साबित हो गया है कि मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए लोगों की मौत रोकने में कारगर नहीं है। बहरहाल, डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का यह भी कहना है कि लोगों को कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आने से रोकने में इस दवा की भूमिका हो सकती है। इस संबंध में क्लीनिकल परीक्षण चल रहे हैं। सौम्या ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संक्रमण के शुरू में कोविड-19 महामारी की प्रचंडता रोकने या कम करने में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की भूमिका है या नहीं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए जा रहे अन्य परीक्षणों का संदर्भ देते हुए कहा ‘‘हम अब तक यह नहीं जानते। इसलिए बड़े पैमाने पर परीक्षण पूरे होने और आंकड़े हासिल करने की जरूरत है।”
चीन से मुआवजे संबंधी याचिका खारिज
उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के लिये चीन से 600 अरब अमेरिकी डालर के मुआवजे के लिये अंतरराष्ट्रीय अदालत जाने का केन्द्र को निर्देश देने के लिये दायर याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चीन ने कथित रूप से जानबूझ कर इस वायरस को पैदा किया था। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से मदुरै निवासी के के रमेश की याचिका संक्षिप्त सुनवाई के बाद खारिज कर दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिका खारिज की जाती है।’’ साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में सरकार को प्रतिवेदन देने की छूट प्रदान की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सी आर जया सुकिन ने पीठ से कहा की उनकी याचिका को सरकार के एक प्रतिवेदन के रूप में लेना चाहिए। इस जनहित याचिका में दावा किया गया है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कोविड- 19 चीन के वुहान विषाणु संस्थान से निकला और उसने भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया तथा उसके हजारों नागिरकों की जान ले ली। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चीन ने भारत के खिलाफ जैविक हथियार के रूप में जानबूझ कर कोविड-19 वायरस पैदा किया है। याचिका में कहा गया था कि कोरोना वायरस भारत और दुनिया के अनेक देशों में फैला लेकिन चीन के वुहान शहर से इसकी उत्पत्ति होने के बावजूद यह आसपास के शहरों में नहीं फैला।
यूरोप के कुछ देशों में संक्रमण के मामले बढ़े
लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद यूरोप में बृहस्पतिवार को स्थानीय स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ गए। जर्मनी में मांस पैक करने वाली एक फैक्टरी में संक्रमण के सैकड़ों मामले आए तो यूनान ने एक गांव में सात दिन के लिए पूर्ण लॉकडाउन कर दिया है। चीन के बीजिंग में नए मामले कम हुए हैं और हांगकांग में डिज्नीलैंड को फिर से खोल दिया गया। पश्चिमी जर्मनी में ग्वेटरस्लोह में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि रहेदा वीदेनब्रूक में मांस पैक करने वाली फैक्टरी से जुड़े संक्रमण के मामले बढ़कर 657 हो गए हैं। जर्मनी में कोविड-19 के 188,474 मामले आए और 8844 लोगों की मौत हुई। यूनान के अधिकारियों ने उत्तरपूर्वी प्रांत जांति में करीब 3,000 की आबादी वाले इचिनोस गांव में लॉकडाउन लागू कर दिया। यहां पर संक्रमण और मौत के नए मामलों के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया। संक्रमण को बेहतर तरीके से रोकने के लिए यूनान की तारीफ भी हुई है क्योंकि यहां पर कोविड-19 के तकरीबन 3200 मामले आए हैं और संक्रमण से 187 लोगों की मौत हुई। व्यापार से जुड़ी कई गतिविधियों को खोलने की अनुमति के बाद संक्रमण के नए मामले आने पर तुर्की ने इस्तांबुल और अंकारा सहित तीन बड़े शहरों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले सप्ताह एक थोक बाजार में कम से कम 158 लोग संक्रमित मिले थे। बुधवार को संक्रमण के 31 मामले आए लेकिन बृहस्पतिवार को 21 मामले आए। बहरहाल, अमेरिका ने चीन के नेताओं पर दबाव बढ़ा दिया है कि महामारी के बारे में तथ्यों को वे उजागर करें। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कोविड-19 तथा आगे के दिनों में किसी अन्य महामारी को रोकने के वास्ते ‘‘पूरी पारदर्शिता और सूचनाएं साझा करने’’ पर जोर दिया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सायरिल रामाफोसा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए चीन-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से बात की और उन्हें याद दिलाया कि महामारी से मुकाबले के लिए अफ्रीकी देश कर्ज राहत की मांग कर रहे हैं। अफ्रीका बीमारी नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के प्रमुख जॉन निकागसोंग ने बताया कि अफ्रीकी देश कोरोना वायरस के टीके पर बातचीत के लिए अगले सप्ताह उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन कर रहे हैं। बैठक का मकसद है कि टीके की खोज होने की स्थिति में इन देशों तक भी इसकी पहुंच हो। वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बीच अफ्रीका के 54 देश जांच और चिकित्सा आपूर्ति को लेकर बहुत चिंतित हैं। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक वुहान में संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद से 83 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं और करीब 4,50,000 लोग जान गंवा चुके हैं। कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में आए हैं । देश में 21 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए और 1,17,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

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