भगवान शिव को समर्पित है सावन का महीना

मंगल व्यास भारती

हिंदू धर्म में सावन के महीने का बहुत महत्व है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं। शिव पुराण के अनुसार इसे मनोकामनाएं पूर्ण करने का महीना भी कहा जाता हैं। इस दौरान अनुशासित जीवन शैली को अपनाने पर जोर दिया जाता है। सावन में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की भी विशेष परम्परा मानी जाती हैं। मनुष्य विषयलोलुप होकर अधोगति को प्राप्त न हो और व्यक्ति अपनी चितवृतियों को स्वच्छ रख सके, इसके निमित्त रुद्र का अनुष्ठान करना मुख्य और उत्कृष्ट साधन हैं। यह रुद्रनुष्ठान प्रवृति मार्ग से निवृत्ति मार्ग को प्राप्त कराने में समर्थ हैं। अर्थात जो व्यक्ति समुद्र पर्यन्त वन,पर्वत, जल, एवं वृक्षों से युक्त तथा श्रेष्ठ गुणों से युक्त पृथ्वी का दान करता है, जो धन धान्य, सुवर्ण और ओषधियों युक्त है, उससे भी अधिक पुण्य एक बार के रुद्री जप एवं रुद्राभिषेक का हैं। इसलिये जो भगवान रुद्र का ध्यान करके रुद्री का पाठ करता है अथवा रुद्राभिषेक यज्ञ करता है, वह उसी देह से निश्चित ही रुद्र रूप हो जाता है, इसमें संदेह नहीं हैं। इस प्रकार सावन की महीना एक साल से आता है।
भीषण गर्मी के बाद सावन का महीना तन मन को खुशियां प्रदान करता हैं। सावन में चारों तरफ हरियाली रहती हैं। बारिश के आगमन से धरती का कोना कोना हरा भरा होकर खिल उठता हैं।मानों प्रकृति ने फिर से अंगडाई ली हो और सृष्टि का फिर से निर्माण किया हो, लेकिन ये महीना पुण्य प्रदायक है, अतः सबको लुभाने लगता है। चूंकि श्रावण अमवस्या पर पेड़ पौधों के नये जीवन का संचार होता है और मानव जीवन सुरक्षा पाकर वेदार्थ एवं वेद के गम्भीर तत्वों से विद्बान प्राय अनभिज्ञ रहते हैं। वास्तव में उनकी यह धारणा उचित नहीं है वैदिक विद्बानों को वेद के अर्थ एवं उनके तत्वों से पूर्णतः परिचत होना चाहिये। प्राचीन ग्रन्थों में भी वेदार्थ एवं वेद तत्वार्थ की बड़ी महिमा गायी है निरुक्तकार कहते हैं कि जो वेद पढ़कर उसका अर्थ नहीं जानता, वह पशु के समान है अथवा निर्जन वन के सुमधुर उस रसाल वृक्ष के समान है, जो न स्वयं उस अमृतरस का आस्वादन करता है और न किसी अन्य को ही देता हैं। अतः वेद मंत्रों के अर्थ का ज्ञाता पूर्ण रूप से कल्याण का भागी होता है। इसे भगवान शंकर से जोड़कर देखा जाता हैं। इसलिए इसका महत्व बढ़ जाता है श्री मनु महाराज के कथनानुसार भगवान वेद सर्वधर्मो के मूल हैं या सर्वधर्ममय हैं। वेदों एवं उनकी विभिन्न संहिताओं में प्रकृति के अनेक तत्वों जैसे आकाश, जल, वायु, उषा, संध्या इत्यादि के तथा इन्द्र ,सूर्य,सोम, रुद्र, विष्णु आदि वेदों के वर्णन और स्तुति सूक्त प्राप्त होते हैं। प्रकृति के सौंदर्य का यह नजारा देखने के योग्य लगता है। धरती हरियाली तीज की ओढ़नी ओढ़ लेती हैं।सावन का महीना ही अद्बभुत मान्यताओं के अनुसार सावन आने पर हर तरफ हरियाली छा जाती हैं। इस महीने में शंकर भगवान हमारी संस्कृति की प्रत्यक्ष रूप पूजा अर्चना पाठ आदि से चारों तरफ अराधना के ही स्वर सुनाई देते हैं। शिवमय समुचित संसार गतिशील होता हुआ दिखाई देता हैं।
धार्मिक मान्यता है सावन के महीने में किसी की बुराई और क्रोध नहीं करनी चाहिए यह महीना मन को शुद्ध करने का महीना होता है। इसलिए हर प्रकार की बुराई और गलत आदतों का त्याग करना चाहिए।

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