दीक्षांत सीखने का अंत नहीं, जीवन के नए अध्याय का आरम्भ-डॉ. दिनेश शर्मा

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी का पांचवा दीक्षांत समारोह संपन्न

@ chaltefirte.com        मुरादाबाद। माननीय उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा बोले, डिग्री मिलने का पल ताउम्र याद रहता है। अगर डिग्री के साथ मेडल भी मिलता है तो जीवन पर्यन्त प्रेरणादायक बन जाता है। इन पुरस्कारों का भले ही कोई आर्थिक मूल्य न हो, मगर जीवन में गिरकर उठने के लिए संबल प्रदान करते हैं। जीवन में सफलता के मंत्र बताते हुए छात्रों को सलाह दी कि जीवन में लक्ष्य का निर्धारण बहुत जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा, छात्रों को बड़े सपने देखने होंगे।इन्हें पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाना होगा। उन्होंने अपने जीवन के दुर्लभ अनुभव भी साझा किए। वह ऑडी में आयोजित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश शर्मा, पंचायती राज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, चांसलर सुरेश जैन आदि ने माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ किया। कंवोकेशन प्रारम्भ करने का ऐलान कुलाधिपति ने किया। मेहमानों के अलावा जीवीसी  मनीष जैन और एमजीबी  अक्षत जैन ने शहर विधायक रितेश कुमार गुप्ता, खादी ग्रामोद्योग के उपाध्यक्ष  गोपाल अंजान, मेयर  विनोद अग्रवाल, कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू, बरेली-मुरादाबाद स्नातक सीट से एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, बाल संरक्षण आयोग के चेयरमैन डॉ. विशेष गुप्ता, एमएलसी  हरी सिंह ढिल्लों, मुरादाबाद के पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश कुमार सिंह, मुरादाबाद भाजपा के जिलाध्यक्ष  राजपाल सिंह चौहान, महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली चौहान, उत्तर प्रदेश पिछड़ा आयोग के सदस्य  गिरीश वर्मा, उत्तर प्रदेश एससीएसटी आयोग की सदस्या साध्वी गीता प्रधान का बुके देकर स्वागत किया। अंत में मुख्य अतिथि और गेस्ट ऑफ़ ऑनर को कुलाधिपति और जीवीसी ने माल्यार्पण कर शॉल पहनाई। साथ ही स्मृति चिन्ह और उनकी पोट्रेट भेंट की। संचालन रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने किया। इस मौके पर मेहमानों ने 153 स्वर्ण, 149 रजत और 139 ब्रोंज मेडल्स छात्र-छात्राओं को वितरित किए। ये 2018 से 2020 तक पास आउट स्टुडेंट्स हैं। 7,935 स्टुडेंट्स को डिग्रियों भी वितरित की गई। समारोह के प्रारम्भ में 2019 से 2021 तक शोध करने वाले 53 शोधार्थियों को पीएचडी अवार्ड की गईं। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

मेडलिस्ट छात्रों को सम्बोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा, दीक्षांत सीखने का अंत नहीं बल्कि जीवन के नए अध्याय का आरम्भ है। जीवन में चुनौतियों की शुरुआत इसी पल होती है। जीवन में कामयाबी के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बोले, हमारे संस्कार ही हमें दुनिया में पहचान दिलाते हैं। माता-पिता के आशीर्वाद के बिना हमारी सफलता अधूरी है। बोले, हमारा आचरण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक होता है। छात्रों का आह्वान करते हुए बोले, डिग्री लेने के बाद छात्रों का सपना विदेश जाने का होता है जबकि वास्तविकता यह है कि आज विदेशी कंपनियां भारत में अपनी इकाइयां लगा रही हैं। सैमसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, आज यह कंपनी अपने कुल उत्पादन का 60 प्रतिशत भारत में बनाती है, इसीलिए आज दुनिया भारत का लोहा मानती है। कोरोना पैन्डेमिक का जिक्र करते हुए कहा, माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के ट्रिपल टी अभियान के जरिए यूपी सरकार ने कोरोना से निपटने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस मॉडल की चर्चा देश के दीगर सूबों में ही नहीं अपितु पश्चिमी देशों में भी हो रही है। उप मुख्यमंत्री टीएमयू की भूमिका का उल्लेख करते हुए बोले, यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ चिकित्सा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। 1000 बेड का अस्पताल, कोरोना का एल 3 केंद्र या कोरोना जांच केंद्र इसका प्रत्यक्ष सुबूत है। उन्होंने कहा, वह आम तौर पर निजी शिक्षण संस्थानों में नहीं जाते हैं, लेकिन टीएमयू की शैक्षणिक गुणवत्ता का अध्ययन करने के बाद ही उन्होंने इस निमंत्रण को स्वीकार किया। साथ ही बोले, जैसा मैंने सुना था, उससे बेहतर पाया। मुरादाबाद जैसे शहर में इतना बड़ा शैक्षिक संस्थान अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अपने 45 मिनट के संबोधन के बाद गदगद होते हुए बोले, यहां आकर में भूल गया कि मैं उप मुख्यमंत्री हूँ, बल्कि मुझे ऐसा लगा कि मैं क्लास ले रहा हूँ। बोले, आज यहां आकर खुद को फिर से शिक्षक महसूस कर रहा हूँ।

गेस्ट ऑफ़ ऑनर पंचायती राज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अपने संक्षिप्त आशीर्वचन में कहा, जीवन में शिक्षा के साथ-साथ मूल्यों का भी महत्व है। नैतिक मूल्य हमें अर्जित ज्ञान को समाज और देश के लिए उपयोग करने की राह दिखाते है। यह मूल्य हमें देश के विकास और सामाजिक समरसता की स्थापना में सक्षम बनाते हैं। टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने अपने वेलकम एड्रेस में टीएमयू की विकास यात्रा और उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। बोले, विश्वविद्यालय एनईपी 2020 को लागू करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। विश्वविद्यालय 2016 से ही आउटकम बेस्ड एजुकेशन और क्रेडिट बेस्ड सिस्टम को लागू कर चुका है। उन्होंने बताया, यूनिवर्सिटी में रिसर्च का माहौल बनाने के लिए शोधार्थियों के वास्ते अनेक योजनाएं लागू की है, जिनमें सीड मनी, आईआईसी आदि प्रमुख हैं।

प्रेसिडेंटियल सम्बोधन में टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन ने टीएमयू को दीगर शिक्षण संस्थानों से अलग बताते हुए कहा, विश्वविद्यालय ने अनुशासन और ईमानदारी की राह पर चलते हुए ही अल्प समय में ही इतनी प्रगति की है। इसका श्रेय छात्रों को देते हुए बोले, एल्युमिनाई हमारी ताक़त हैं। यूनिवर्सिटी की प्लेसमेंट उपलब्धियों के लिए उन्होंने छात्रों के अनुशासन की वकालत करते हुए कहा, एक अनुशासित युवा ही यूनिवर्सिटी और माता-पिता का नाम रोशन कर सकता है। मेडलिस्टों को अपने आशीर्वचन में बोले, जीवन में गिरने का मतलब हार नहीं होती बल्कि जीवन में तरक्की के लिए कभी प्रयास नहीं छोड़ने चाहिए। सफलता कड़ी मेहनत करने वालों के ही पैर चूमती है। अंत में बोले “मेरा यही अंदाज़ लोगों को खलता है, कैसे यह इंसान गिर-गिर कर संभलता है। उन्होंने यह भी खुलासा किया, मार्च 2020 में इस कंवोकेशन की तैयारियां मुकम्मल कर ली गई थीं। इसमें यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन कोरोना की दस्तक के चलते तैयारियां धरी की धरी रह गईं। इस मौके स्क्रॉल साइनिंग सेरेमनी भी हुई, जिसमें परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने प्रोटोकाल के तहत कुलाधिपति से स्क्रॉल हस्ताक्षर कराए। मेहमानों के साथ कुलाधिपति, वीसी, कांठ के विधायक  राजेश कुमार चुन्नू और जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पवन कुमार के साथ मेडलिस्टों की ग्रुप फोटोग्राफी भी हुई। दीक्षांत समारोह के अंत में डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने सभी मेहमानों और मेडलिस्टों का आभार व्यक्त किया।

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