अश्लीलता का बाजार – गंदा है पर धंधा है

बाल मुकुन्द ओझा

भारत में अश्लील फिल्में यानि पोर्न बनाना, बेचना, शेयर करना और इसके सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक है। आईपीसी की धारा 292 के तहत पॉर्न बनाना और बेचना जुर्म है। मगर यह भी सच है भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक पोर्न देखने वाला देश है। मशहूर फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा की मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद पोनोग्राफी एक बार फिर चर्चा में है। कुंद्रा पर अश्लील फिल्में बनाने एवं उसे विदेशों में बड़े दामों में बेचने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार फिल्मों में काम करने के इच्छुक नए कलाकारों को प्रलोभन दिया जाता है कि आपको वेबसीरीज में ब्रेक देंगे। ऑडिशन के वक़्त न्यूड और सेमीन्यूड सीन कराए जाते थे। उन्हीं में से एक पीड़िता सामने आयी थी और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस इस प्रकरण में शिल्पा की संलिप्तता की भी गहराई से जाँच में जुटी है।
भारतीयों में पॉर्न देखने की लत बढ़ रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक इसके शिकार हो रहे हैं। इस कारण समाज में अपराध बढ़ रहा है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन और मोबाइल की संख्या बढ़ रही है वैसे वैसे इसकी चाहत भी निरंतर बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 50 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जो कुल आबादी का लगभग 28 फीसदी है। यह तादाद वर्ष 2021 तक बढ़ कर 63 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है। भारत में लॉकडाउन के दौरान यानी साल 2020 के अप्रैल के महीने में एडल्ट साइट्स पर 95 प्रतिशत स्पाइक देखा गया। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पोर्न वेबसाइट पर जो कीवर्ड सबसे ज्यादा सर्च किए जाते हैं उनमें इंडियन भाभी देवर, देसी, वाइफ हसबैंड, इंडियन कॉलेज, इंडियन भाभी देवर, इंडियन, इंडियन टीचर विद हिंदी आदि शामिल हैं। भारत में 2019 में लगभग 89 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स ने अपने फोन पर पॉर्न देखा। फोन पर पोर्न देखने की रैंकिंग में भारत सबसे आगे है, इसने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। सस्ते इंटरनेट डेटा से जहाँ पोर्न देखने वालों की संख्या बढ़ी है वहां दुष्कर्म वारदातें भी उसी तेजी से बढ़ी है। यह भी कहा जाता है जिस चीज पर रोक लगती है उसकी डिमांड उसी अनुपात में बढ़ जाती है। पॉर्न के मामलों में भी यही हो रहा है।
देश की सर्वोच्च अदालत में एक वकील द्वारा दायर किए गए हलफनामे में बताया गया कि देश में 3 करोड़ बच्चे और 7 करोड़ वयस्क पॉर्न की लत के शिकार हैं। इस कारण ये हिंसक हो रहे हैं। ऐसे में इस पर तुरंत एक्शन की जरूरत है। यह भी कहा गया पॉर्न विडियो देखने की लत शराब और ड्रग्स की तरह है। पॉर्न देखना (अश्लील सामग्री) खराब माना जाता है। कुछ लोग इसे रेप और गलत रास्ते पर भटकाने की भी वजह मानते हैं।
भारतीय समाज में अश्लीलता सदियों से व्याप्त रही है जिसको भिन्न-भिन्न रूपों में परिभाषित किया गया है। एक समय में स्त्री और पुरुष का साइकिल पर एकसाथ बैठना लोगों के लिए परदे पर भी असहनीय था, यह अश्लीलता थी। आज पारिवारिक कार्यक्रमों के बीच कंडोम, एनर्जी ड्रिंक, परफ्यूम, अन्तः वस्त्र, गर्भ-निरोधन के अन्य उपायों और वयस्कों के उपयोग में लाये जाने वाले विषयों पर बने विज्ञापनों का प्रस्तुतीकरण बदला है। अश्लीलता बिन बुलाए मेहमान की तरह सीधे हमारे घरों में प्रवेश कर चुका है। बड़े सिनेमाई परदे और छोटे टीवी के पर्दें सहित सोशल मीडिया पर जानी मानी फिल्म अभिनेत्रियों की नग्न तस्वीरें सरेआम प्रदर्शित की जा रही है। अंग प्रदर्शन का इससे भोंडा प्रदर्शन ही कहा जायेगा जो बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक एक साथ बैठकर घरों पर देख रहे है।
पिछले कुछ सालों से भारत में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है। इंटरनेट को मनोरंजन और शिक्षा का माध्यम माना जाता था। एक बटन दबाते ही हमें वांछित सामग्री सुलभ हो जाती थी। इसे ज्ञान का प्रवाह भी माना गया। युवाओं ने अपनी शिक्षा-दीक्षा में इंटरनेट का व्यापक उपयोग किया जिसके मनवांछित परिणाम भी हमें मिले। मगर ज्ञान के साथ-साथ वह सामग्री भी हमें मिलने लगी जिससे हम कोसों दूर भागते थे। विज्ञान के चमत्कार ने जहाँ अच्छाई को प्रकट किया वहाँ बुराई भी हमारे सामने आई। इंटरनेट की साइटों से लगातार पोर्न फिल्मों का प्रचलन बढ़ रहा है और बच्चों और युवाओं को पोर्न फिल्में अज्ञानतावश अपनी ओर खींच रही है। हर चीज को कानून बनाकर नहीं रोका जा सकता, विशेष कर पोर्न फिल्मों को रोका जाना तो लगभग असंभव है। समाज में चेतना, जागरूकता और निगरानी के माध्यम से ही ऐसी फिल्मों पर अंकुश लग सकता है। माँ-बाप और अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों की सतत निगरानी रखें और कम्प्यूटर अथवा लेपटाप पर उन्हें देर रात्रि तक नहीं बैठने दें। स्वयं भी समय-समय पर कम्प्यूटर को देखते रहें ताकि बच्चों के मन में यह भय बना रहे कि उन्होंने कुछ भी अनुचित देखा तो माँ-बाप की नजर में आ जायेंगे।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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