कोरोना काल में डिजिटल पेमेंट में जबरदस्त इजाफा

डॉ मोनिका ओझा खत्री

कोरोना काल में देश में अर्थव्यवस्था की गिरावट के बीच डिजिटल पेमेंट में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। देश में सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस के अनुसार डिजिटल पेमेंट ने हाल ही में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। माह जून में इस प्लेटफॉर्म पर अनुमानित रूप से 4.5 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है जो अब तक का सबसे अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक के सुझावों के अनुसार कोरोना काल में देशवासी लेनदेन के लिए डिजिटल तरीका अपना रहा है। मौजूदा समय में हर छोटे मोटे कारोबारी डिजिटल पेमेंट का सहारा ले रहे है। साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी इंटरनेशनल रैंकिंग में 180 से ज्यादा देशों में भारत दुनिया के टॉप-10 देशों में शामिल हो चुका है। साल भर पहले तक हम इसमें 47वीं रैंक पर थे।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार डिजिटल इंडिया यानि समय, श्रम और धन की बचत. डिजिटल इंडिया यानि तेज़ी से लाभ, पूरा लाभ. डिजिटल इंडिया यानि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिम गवर्नेंस. डिजिटल इंडिया यानि सबको अवसर, सबको सुविधा, सबकी भागीदारी. डिजिटल इंडिया यानि सरकारी तंत्र तक सबकी पहुंच, डिजिटल इंडिया यानि पारदर्शी, भेदभाव रहित व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर चोट करना है। भारत डिजिटल पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस, बर्थ सर्टिफिकेट पानी बिजली के बिल, इनकम टैक्स रिटर्न आदि अनेक कामों के लिए अब प्रक्रियाएं डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान, बहुत तेज हुई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में पूरी दुनिया में 7 करोड़ 3 लाख डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए जो कि पिछले साल के मुकाबले 41 फीसदी ज्यादा हैं। इसमें सबसे ज्यादा 2 करोड़ 55 लाख डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हुए। इसमें 15 फीसदी ट्रांजैक्शन डिजिटल पेमेंट से जुड़े हुए हैं। लेकिन अभी भी 61 फीसदी ट्रांजैक्शन ऑफलाइन हो रहे हैं। पेमेंट सिस्टम कंपनी एसीआई वर्ल्ड वाइड की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक भारत में डिजिटलª ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल 71 फीसदी से ज्यादा होगा। रिजर्व बैंक ने पेमेंट बैंकों को बड़ा बूस्ट देते हुए उन्हें 2 लाख तक डिपॉजिट लेने और नॉन बैंकिंग पेमेंट संस्थानों को आरटीजीएस और नेफ्ट की इजाजत दे दी है।
मोबाइल और वैकल्पिक भुगतान भारतीय युवाओं में लोकप्रिय बने हुए हैं। ई-कामर्स के कारण उम्मीद की जाती है कि 2021 तक ऐसे लेन-देन की संख्या पीओएस ट्रांसैक्शन से बढ़ जाएगी। ऐसा अनुमान है की अगले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट व्यवसाय में आशातीत वृद्धि होगी। मौजूदा दौर में भारतीय खुदरा बाजार क्रान्तिकारी बदलाव से गुजर रहा है। उपभोक्ता भिन्न चैनल्स (स्रोतो) से डिजिटल खरीदारी कर रहे हैं।
ई-कॉमर्स या इ-व्यवसाय इंटरनेट के माध्यम से व्यापार का संचालन है। न केवल खरीदना और बेचना, बल्कि ग्राहकों के लिये सेवाएं और व्यापार के भागीदारों के साथ सहयोग भी इसमें शामिल है। ई-पेमेंट को हम इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के नाम से भी जानते हैं ई-पेमेंट या इलेक्ट्रॉनिक ई-पेमेंट किसी भी डिजिटल फाइनेंसियल पेमेंट लेनदेन है जिसमें दो या दो से अधिक पार्टियों के बीच मनी ट्रान्सफर शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट इंटरनेट आधारित प्रक्रियाएं हैं। जो ग्राहक या उपयोगकर्ता को उनकी खरीदारी आदि के लिए ऑनलाइन पेमेंट करने में मदद करती है। इंटरनेट पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए। इनमें मुख्य है इलेक्ट्रॉनिक कैश, स्मार्ट कार्ड और डेबिट क्रेडिट, गूगल पे, फोन पे आदि। जब हम इलेक्ट्रॉनिक मीडियम का यूज करके पेमेंट करते हैं तो वह इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कहलाता है जैसे-जैसे ई-कॉमर्स का यूज बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का भी यूज बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन इनवॉइस पेमेंट से कंपनियों को समय बचाने में मदद मिलती है। वे तेज होते हैं और ग्राहकों के लिए अधिकतम प्रयास बचाते हैं। यह भौतिक लेन देन में शामिल अत्यधिक लागत को कम करने में भी मदद करता है। यह कागज के महत्वपूर्ण मात्रा को कम करने में भी मदद करता है जो मुद्रित किया जाएगा और इनवॉइस भेजने के लिए उपयोग किया जाएगा।
{ डॉ मोनिका ओझा खत्री पूर्णिमा यूनिवर्सिटी जयपुर में बैचलर ऑफ बिज़नस एडमिनिस्ट्रेशन की विभागाध्यक्ष है।}

 

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