कोविड-19 की गणितीय मॉडल रामबाण : प्रो. भारद्वाज

एफओईसीएस के गणित विभाग की ओर से नेशनल ई-कांफ्रेंस- एआईएमईए-2021 का समापन

@ chaltefirte.com                         मुरादाबाद । दुनिया की जानी-मानी गणित विशेषज्ञ एवं गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की प्रो. रश्मि भारद्वाज ने कोविड-19 के गणितीय मॉडल पर विस्तार से प्रकाश डालाते हुए बोलीं, आरटी-पीसीआर टेस्ट रेसियो में गणित की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस गणितीय मॉडल से यह खुलासा हो जाता है, कोरोना के कितने पेशेंट पॉजिटिव होंगे। उन्होंने अंदेशा जताया, देश में कोविड की थर्ड वेव की दस्तक से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रो. भारद्वाज का एलएस-एसबीआर वेवलेट मॉडल कहता है, थर्ड वेव अक्टूबर तक आने की प्रबल सम्भावना है। ऐसे में देश के हर नागरिक का फर्ज है कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करें। मास्क, सोशल डिस्टेन्सिंग और सेनिटाइज़र को जीवन का अहम हिस्सा बनाएं। मैथ का महत्व अंकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जीवन रक्षक प्रौद्योगिकी में भी अहम रोल है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेस-एफओईसीएस के गणित विभाग की ओर से एडवांसमेंट इन मैथमैटिक्स एंड इट्स इमर्जिंग एरियाज-एआईएमईए-2021 पर आयोजित नेशनल ई-कांफ्रेंस के समापन मौके पर बतौर मुख्य बोल रही थीं। देश के एक दर्जन से अधिक सूबों के टीचर्स और शोधार्थियों ने 33 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। अंत में एफओईसीएस के निदेशक एवं जनरल चेयर प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, यह कांफ्रेंस गणित के शोधार्थियों के लिए वरदान साबित होगी। दो सत्रों में हुए इस कांफ्रेंस का संचालन अंग्रेजी प्रवक्ता मिस इंदु त्रिपाठी ने किया।

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कॉलेज एमएमएच के डॉ. नागेंद्र कुमार ने सूर्य की गति और संरचना पर प्रकाश डालते हुए एक सूत्र का खुलासा किया। पृथ्वी से सूर्य की दूरी, इसकी त्रिज्या और हाइड्रोजन परमाणु के फ़्युज़न का जिक्र करते हुए बोले, फ़्युज़न से अधिक ऊर्जा के साथ हीलियम एटम उत्पन्न करता है। इन सभी गणनाओं को डिफरेंशियल समीकरण के माध्यम से हल किया गया है। उन्होंने सूर्य के जरिए उत्पन्न पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए भविष्यवाणी की, सूर्य में ठोस प्लाज़्मा और इसके विभिन्न प्रकार भी मौजूद हैं। जम्मू आईआईएम के डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बाजार की मांग में ऑप्टिमाइज़ेशन और गणित के कई अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित किया। डॉ. कुमार ने ऑब्जेक्टिव ऑप्टिमाइज़ेशन और दवा आपूर्ति श्रृंखला में इसके एप्लीकेशन पर चर्चा की। टीएमयू की एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन बोलीं, विभिन्न डिफरेंशियल समीकरणों के माध्यम से समाधान खोजने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल लर्निंग इत्यादि में भी गणित की उल्लेखनीय भूमिका है। एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने जैव-सूचना विज्ञान, समूह सिद्धांत, डिफरेंशियल ज्यामिति और सभी प्रकार की गणितीय गणनाओं में गणित की पृष्ठभूमि और अनुप्रयोगों के बारे में बात की। उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं सदी इंटरनेट, आईओटी, एल्गोरिथम और चिकित्सा विज्ञान जैसे व्यापक एप्लिकेशन्स का युग है। ई-कांफ्रेंस में डॉ. लक्ष्मी कान्त तिवारी, डॉ. गोपाल कुमार गुप्ता, प्रो. आसीम अहमद, प्रो. आरसी त्रिपाठी, डॉ. अभिनव सक्सेना, डॉ. कामेश कुमार, डॉ. पराग अग्रवाल, श्री अशोक कुमार आदि मौजूद रहे। गणित विभाग के एचओडी एवं को-कन्वीनर डॉ. अजीत कुमार ने वोट ऑफ़ थैंक्स दिया जबकि कांफ्रेंस के कन्वीनर ने डॉ. आलोक कुमार गहलोत ने बताया, इस ई-कांफ्रेंस में यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखण्ड, एमपी, केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश की मैथ्स फैकल्टी, रिसर्चर्स और स्टुडेंट्स ने वर्चुअली भाग लिया।

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