मच्छर जनित बीमारियों ने भी पसारे पैर

बाल मुकुन्द ओझा

मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियां भारत में आम हैं। बारिश अपने साथ कई बीमारियां लेकर आती है जिनसे समय रहते सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। मानसून मच्छरों से होने वाली बीमारियों के लिए प्रजनन का मौसम है। भारत में मच्छर जनित बीमारियां वैश्विक डेंगू में 34 फीसदी और मलेरिया के मामलों में 11 फीसदी का योगदान करती हैं। इस मौसम में चिकनगुनिया का खतरा भी बना रहता है। यह भी मच्छर जनित बीमारी है। चिकनगुनिया के मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं जो दिन हो या रात कभी भी काट सकते हैं। गर्मी और बरसात में मच्छरों का प्रकोप सर्वत्र उत्पन्न हो जाता है। बढ़ती गर्मी से घर घर में कूलरों का उपयोग भी बढ़ गया है जो समय पर साफ सफाई के अभाव में मच्छरों को पनपने का मौका देता है।
कोरोना महासंकट के बीच देश और प्रदेशों में मच्छर उन्मूलन अभियान एक तरह से बंद है। लगातार बढ़ते मच्छरों की वजह से अनेक बीमारियां फैलने का भी खतरा उत्पन्न होने लगा है। बरसात के दिनों में हर साल मच्छरों के प्रकोप के कारण बड़ी संख्या में लोग डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का शिकार बनते हैं। मच्छर के काटने से होने वाली अलग-अलग बीमारियों से हर साल लाखों लोगों की जान चली जाती है। बरसात के दिनों में जगह-जगह पानी भर जाने और तापमान में गिरावट होने से हर तरफ मच्छर पनपने लगते हैं। एक छोटा सा मच्छर एक बार में व्यक्ति का 0.1 मिलीमीटर तक खून चूस लेता है। इससे निपटने के कई अभियानों को चलाए जाने के बाद भी हर साल सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों मलेरिया और डेंगू के केस सामने आते रहते हैं सरकार के मच्छरों से निपटने के तमाम अभियानों के बाद भी मच्छरजनित बीमारियों के मामले हर साल सामने आ रहे हैं। इन्हें हम साधारण समझते है मगर है ये स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक।
विश्व भर में मच्छरों की हजारों प्रजातियों हैं, जिनमें से कुछ बहुत ज्यादा हानिकारक होती हैं। नर मच्छर पेड़-पौधों का रस चूसते हैं, जबकि मादा मच्छर अपने पोषण के लिए मनुष्य का खून चूसती हैं। जब मादा मच्छर मनुष्य का खून चूस लेती हैं, तब यह मनुष्य में प्राण घातक संक्रमण को संचारित करने वाले घटक के तौर पर कार्य करती हैं, जिसके कारण मानव जीवन हेतु उत्तरदायी खतरनाक बीमारियां पैदा हो सकती हैं।
मच्छर प्राणघाती कीटों में से एक हैं। इसमें मनुष्यों के भीतर रोग प्रसारित और रोग संचारित करने की क्षमता है, जिसके कारण विश्व में प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती है। मच्छर का छोटा डंक – बड़ा खतरा पैदा कर सकता हैं। मच्छर का काटना घातक हो सकता है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इन्सेफेलाइटिस, फाइलेरिया,जीका वायरस और पीत ज्वर जैसी बीमारियों के कारण जीवन को गंभीर खतरा भी हो सकता हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मादा एनोफेलीज कूलिसिफासीस मलेरिया का प्रमुख रोग वाहक है, जो कि आमतौर पर मनुष्यों के साथ-साथ मवेशियों को भी काटता है। एनोफेलीज वर्षा जल और इकट्ठा हुए जल, गड्ढे, कम जल युक्त नदी, सिंचाई माध्यम, रिसाव, धान के खेत, कुंए, तालाब के किनारे, रेतीले किनारे के साथ धीमी धाराओं में प्रजनन करती है। एनोफेलीज मच्छर सबसे ज्यादा शाम और सुबह के बीच काटता है। मादा एडीज एजिप्ट मनुष्य में डेंगू, चिकनगुनिया, जीका और पीला बुखार संचारित करती है। मादा एडीज सबसे अधिक दिन के समय काटती है तथा काटने का चरम समय संध्या से पहले शाम या सुबह के दौरान होता है। एडीज एजिप्ट मच्छर किसी भी प्रकार के मानव निर्मित कंटेनरों या पानी की थोड़ी सी मात्रा से युक्त भंडारण करने वाले कंटेनरों में प्रजनन करती है। एडीज एजिप्ट के अंडे एक वर्ष से अधिक समय तक बिना पानी के जीवित रह सकते हैं। एडीज एजिप्ट सामान्यत चार सौ मीटर की औसत पर उड़ती है, लेकिन यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक मनुष्य के माध्यम से अकस्मात स्थानांतरित होती है। मादा मच्छरों के लिए केवल रक्त आहार और जानवरों को काटने की आवश्यकता होती है, जबकि पुरुष मच्छर काटते नहीं है, लेकिन वे फूलों के मकरंद या अन्य उपयुक्त शर्करा स्रोत को खाते हैं।
कोरोना महामारी के इस खतरनाक दौर में मच्छरों से होने वाली बीमारियों से अपना और अपने परिवार का बचाव करना है तो अपने आस-पास न सिर्फ अपने घर बल्कि पूरे इलाके में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें। घर में या घर के बाहर जलभराव न होने दें और अगर घर के आस-पास खुली नालियां हैं तो उन्हें तत्काल रूप से बंद करा दें। जागरूकता से ही हम मच्छरों से अपना बचाव कर सकते है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं)  

 

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