आइएफसी, मेडजीनोम के साथ मिलकर भारत में कोविड-19 से लड़ाई को ताकत देगी

@ chaltefirte.com                                    नयी दिल्ली: भारत कोरोनावाइरस के कारण फैली महामारी की दूसरी लहर से जबकि उबर रहा है, आइएफसी आनुवंशिक निदान (जीनेटिक डाइग्नोस्टिक)और अनुसंधान की अग्रणी कंपनी मेडजीनोम के साथ साझीदारी कर रही है. इस साझीदारी का लक्ष्य यह है कि कोविड-19 की टेस्टिंग व्यवस्था का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले; दूसरे, वाइरस और इसके विभिन्न रूपों के बारे में बेहतर समझ बने और इसके कारण भविष्य में महामारी हो तो उसे संभाला जा सके.

आइएफसी का 1.65 करोड़ डॉलर (विदेशी मुद्रा की ताजा विनिमय दर के मुताबिक 123 करोड़ रुपये) का इक्विटी निवेश मेडजीनोम द्वारा दी जा रही नैदानिक सेवाओं (डाइग्नोस्टिक सर्विसेज) के विस्तार में मदद देगा, जिसमें कोविड-19 की टेस्टिंग शामिल है. इसके अलावा, इससे दक्षिण एशियाई आबादी से प्राप्त आनुवंशिक डाटा को ताकत मिलेगी, जो जटिल रोगों के बारे में मूल्यवान समझ विकसित करेगा और विविध किस्म की आबादियों के लिए असरदार इलाज विकसित करने में मददगार होगा.

मेडजीनोम के संस्थापक और अध्यक्ष सैम संतोष का कहना है कि : ”महामारी को खत्म करने का एक सबसे महत्वपूर्ण उपाय तेज, विश्वसनीय और व्यापक टेस्टिंग है. भारत को न केवल भविष्य में भी महामारी की लहरों का सामना करना पड़ सकता है बल्कि कोविड के कारण बीमार हुए लाखों लोगों की देखभाल भी करनी पड़ सकती है. आइएफसी के समर्थन से हम भारतभर में अपनी सेवाओं का विस्तार करेंगे, महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित समुदायों को टेस्टिंग की सुविधा सीधे उपलब्ध करा पाएंगे, और वाइरस के उन आनुवंशिक रूपों का पता भी लगा पाएंगे जो कुछ लोगों को कोविड से गंभीर रूप से संक्रमित कर सकते हैं और उससे उबरने के बाद भी दूसरी तरह से बीमार कर सकते हैं.”

मेडजीनोम भारत सरकार से जुड़ी प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर जीनेटिक सीक्वेंसिंग पर भी काम कर रही है ताकि कोरोनावाइरस के विकास पर नज़र रखी जा सके, उसके नए रूपों की पहचान हो, और इस रोग के प्रभावी इलाज के विकास में मदद की जा सके. अप्रैल 2021 में कंपनी के शोध प्रयासों के चलते उन जीन वैरिएंटों की पहचान की गई, जो लोगों को कोविड से संक्रमण का शिकार बनाते हैं.

आइएफसी के प्रबंध निदेशक मखतार डिओप का कहना है, “मेडजीनोम के साथ हम एक ऐसे अहम समय में साझीदारी कर रहे हैं जब भारत कोविड-19 के कारण अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है. इस निवेश से विश्वसनीय टेस्टिंग और वाइरस पर निगरानी रखने के अलावा जीवन रक्षक इलाज की पहचान करने में मदद मिलेगी. भारत की स्वास्थ्यसेवा व्यवस्था को मजबूत बनाना, उसे हर मौके के लिए तैयार करना, और महामारी से उबरने के गति को तेज करना ही हमारा लक्ष्य है.”

मेडजीनोम में निवेश आइएफसी के 4 अरब डॉलर (विदेशी मुद्रा की ताजा विनिमय दर के मुताबिक 29,820 करोड़ रुपये) के ‘ग्लोबल हेल्थ प्लेटफॉर्म’ का ही एक हिस्सा है. इसके तहत वैक्सीनों, मेडिकल उपकरणों, और औषधियों के उत्पादन और सप्लाइ को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैक्सीनों तथा दवाओं को पहुंचाने की व्यवस्था के लिए पैसे उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

आइएफसी के बारे में : आइएफसी विश्व बैंक समूह का एक सदस्य है. यह सबसे बड़ी ग्लोबल डेवलपमेंट संस्था है, जिसका ध्यान उभरते बाज़ारों में निजी क्षेत्र पर केन्द्रित है. हम 100 से ज्यादा देशों में काम कर रहे हैं और अपनी पूंजी, विशेषज्ञता और प्रभाव का उपयोग करके विकासशील देशों में बाज़ार और अवसरों का निर्माण कर रहे हैं. वित्त वर्ष 2020 में हमने विकासशील देशों में निजी कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं में 22 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया और निजी क्षेत्र की ताकत का उपयोग करके घोर गरीबी को खत्म करने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के प्रयास किए.

Post add

Leave A Reply

Your email address will not be published.