आकाशीय बिजली ने बरपाया कहर

बाल मुकुन्द ओझा

तन – मन को झुलसाते गर्मी के रौद्र रूप से निजात दिलाने बारिश का मौसम अपने साथ राहत और सुकून लाता है। मगर बारिश की राहत के साथ गरजी और कड़की आकाशीय बिजली ने देश में कोहराम मचा दिया है। मौसम विभाग के पूर्व अनुमानों को धत्ता बताते हुए देश में विशेषकर उत्तर भारत में भीषण गर्मी से तप रहे लोगों को मानसून की बारिश ने जहाँ राहत पहुंचाई वहां आकाशीय बिजली मौत बनकर टूटी। रविवार को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, प बंगाल और झारखण्ड आदि राज्यों में बारिश के साथ ही अनेक स्थानों पर बिजली गिरने की घटना हुई जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए और बहुत से घायल हो गए। सैंकड़ों की संख्या में मवेशियों की भी मौतें होने के समाचार है। बताते है इनमें से कुछ स्थानों पर गर्मी से परेशान लोग बारिश का लुत्फ़ उठाने पर्यटन स्थलों पर पहुँच गए थे और इस दौरान बिजली गिरने से अकाल मौत के शिकार हो गए। आकाशीय बिजली एक शक्तिशाली करंट है। इसके गिरने के समय लोगों को खुद को बचाने का क्षण भर का समय भी नहीं मिल पाता।
मौसम विभाग के अनुसार, बिजली का गिरना या आघात एक बड़ा विद्युतीय प्रवाह है जो तूफान के दौरान हवा की गति के बढ़ने और कम होने के कारण उत्पन्न होता है। इस दौरान, पृथ्वी की बाहरी परत पर सकारात्मक चार्ज होता है क्योंकि विपरीत चार्ज आकर्षित करता है, आंधी के बादलों में मौजूद नकारात्मक चार्ज पृथ्वी की बाहरी परत पर मौजूद सकारात्मक चार्ज से जुड़ना चाहता है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश के साथ तेज चमकती रोशनी और उसके बाद कड़कड़ाती आवाज सुनाई देती है। आसमान में चमकी यह बिजली तेजी से पृथ्वी पर गिर कर इंसानों की मौत का कारण भी बनती है। यह भी बताया जाता है तेज़ गर्मी और नमी के मिलन से बिजली वाले विशेष तरह के बादल गरज़ने के साथ तूफान का रूप ले लेते हैं। इस प्रक्रिया को थंडर स्टॉर्म कहा जाता हैं। थंडर स्टॉर्म मूल रूप से एक उग्र मौसम की स्थिति है, जो बिजली के साथ आती है और एक प्रकार की तेज ध्वनि भी होती है जिसको गड़गड़ाहट के रूप में जाना जाता है। थंडरस्टॉर्म के दौरान, उत्पन्न ध्वनि या गड़गड़ाहट सुनने से पहले हम बिजली को देखते हैं क्योंकि प्रकाश ध्वनि की तुलना में तेजी से गति करता है। बादल के अंदर गर्म और नम हवा ऊपर की ओर बढ़ती है और ठंडा होकर क्यूम्यलोनिम्बस बादल बनाती है जो आंधी या थंडरस्टॉर्म का कारण बनता है। आठ-दस किलोमीटर ऊंचे ऐसे बादलों के लोअर में निगेटिव और अपर में पॉजिटिव चार्ज ज्यादा होता है। दोनों के बीच डिफरेंस कम होने पर तेजी से होने वाला डिस्चार्ज बिजली के रूप में सामने आता है। आमतौर पर एक थंडर स्टॉर्म लगभग तीस मिनट तक रहता है और इसका व्यास 15 मील तक हो सकता है। हर थंडर स्टॉर्म में आकाशीय बिजली होती है। एक्सपर्ट के अनुसार आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य के ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता 300 किलोवॉट अर्थात 12.5 करोड़ वॉट से ज्यादा चार्ज की होती है।
मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार दुनिया में हर साल बिजली गिरने की करीब 2 लाख 40 हज़ार घटनाएं दर्ज होती हैं। इन घटनाओं में कितनी जानें जाती हैं, इसे लेकर कई तरह के अध्ययन अलग आंकड़े बताते हैं। एक स्टडी की मानें तो दुनिया में 6 हज़ार लोग हर साल बिजली गिरने से मारे जाते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मानें तो सिर्फ भारत में हर साल 2000 लोग बिजली गिरने से मारे जाते हैं। ब्यूरो के अनुसार, 2000 से 2014 तक भारत में बिजली गिरने से 32,743 लोगों की मौत हुई। एक गैर सरकारी अध्ययन के मुताबिक देश में हर साल 2,000 से 2,500 लोग इन घटनाओं के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं।
मानसून में बिजली कड़कना या गिरना आम बात है। इससे बचने के लिए स्वयं की सावधानी ही जान बचा सकती है। इस दौरान लोगों को घरों पर रहना चाहिए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कहना है कि आकाशीय बिजली से थोड़ी समझदारी से काम लिया जाए तो आसानी से बचा जा सकता है। जब बिजली तेज कड़क रही हो तो पेड़ों के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए.बिजली के खंभे और टावर के आसपास नहीं खड़ा होना चाहिए। अगर आप खेत में है तो कोशिश करें कि सूखे स्थान पर चले जाएं। उकड़ू बैठकर दोनों घुटनों को जोड़कर सिर झुकाकर बैठना चाहिए। लोहे समेत धातु से बने सामान साइकिल आदि से दूर रहना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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