भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा राजतंत्र

 बाल मुकुन्द ओझा

देश में भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप ले लिया है। सत्तासीनों ने भ्रष्ट कर्मियों से अपना नापाक गठजोड़ स्थापित कर लिया है। विभिन्न प्रदेशों में जन प्रतिनिधियों और सरकारी कारिंदों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार और पद के दुरूपयोग के प्रकरणों का खुलासा आये दिन मीडिया में सुर्खियों में पढ़ने को मिल जाता है। महाराष्ट्र में पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप किसी सनसनी से कम नहीं है। इस कड़ी में राजस्थान में भ्रष्टाचार और सत्ता के नापाक गठजोड़ का बड़ा खुलासा हुआ है। हाल ही प्रदेश के श्रम आयुक्त और दो अन्य को रिश्वत लेने के मामलें में रंगे हाथों पकड़ा गया है। बताया जा रहा है राजस्थान के एक बड़े नेता की सिफारिश के बाद भारतीय डाक सेवा के एक अधिकारी की प्रदेश के बड़े सरकारी पद पर प्रतिनियक्ति की गयी थी। भारतीय जनता पार्टी ने गहलोत सरकार को भ्रष्टाचार में पूर्ण रूप से लिप्त होने के आरोप लगाए है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भरत सिंह भी कई बार यह कह चुके है कि राजस्थान में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है।
गौरतलब है प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार कह चुके है राजस्थान में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हो रही है, जिससे भ्रष्ट लोगों में भय का माहौल है। भ्रष्टाचार का खात्मा आमजन के सहयोग से ही संभव है। आमजन किसी भी भ्रष्ट गतिविधि की सूचना एसीबी के हेल्पलाइन नंबर 1064 या वॉट्सऐप नंबर 9413502834 पर जरूर दें।
श्रम आयुक्त प्रतीक झाझडिया को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक दल ने प्राइवेट व्यक्ति अमित शर्मा और आर्थिक सलाहकार परिषद में विशेषाधिकारी रवि मीणा के जरिये श्रम कल्याण अधिकारियों से एकत्रित की गई तीन लाख रूपये की रिश्वत राशि प्राप्त करते हुए हिरासत में लिया है। सियासी सूत्रों के अनुसार इसमें बड़े रैकेट के खुलासे होने की संभावनाएं जताई जा रही है। फिलहाल एसीबी पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पिछले कुछ अर्से से रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिहाज से सरकार ने भी एसीबी को जीरो टोलरेंस के अनुसार काम करने की छूटी दी है। पिछले एक साल में जिला कलेक्टर से लेकर विभिन्न विभागों के अनेक छोटे बड़े अधिकारीयों को रिश्वत लेते पकड़ा गया है। एसीबी ने पिछले डेढ़ वर्षों में 500 से अधिक भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के प्रकरणों में कार्यवाही कर राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारीयों और कर्मचारियों को पकड़ा है।
राजस्थान में भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप ले लिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा राजस्थान प्रशासनिक सेवा और राज्य सेवा के बहुत से प्रमुख अधिकारी या तो जेलो में बंद है अथवा जमानत पर बाहर आकर बहाल होकर अपनी अफसरी का लुत्फ उठा रहे है जो यह साबित करता है उनकी सरकार में कितनी भारी घुसपैठ है। सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की उनके रुतबे पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है और उनके द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सिर्फ शिष्टाचार है। जिनसे करोड़ों रूपयों की धन राशि बरामद हुई है वे भी जनता को सरेआम ठेंगा दिखा रहे है। इससे यह साफ जाहिर होता है भ्रष्टाचार ने इस राज्य में अपनी जडे मजबूती से जमा ली है। जनता के खून पसीने की कमाई को हड़प करने का जरिया भ्रष्टाचारियों ने अपना लिया है। यह तो भ्रष्टाचार की एक बानगी है। सच तो यह है कि भ्रष्टाचार ने अपना दामन चहुंओर फैला रखा है। राजस्व, तहसील, कलेक्ट्रेट, जेडीए, स्थानीय निकाय, सिंचाई, जलदाय, रसद, सड़क, पंजीयन जैसे दर्जनों कार्यालय हैं जहां बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं होता।
देश में भ्रष्टाचार इस हद तक फैल चुका है कि इसने समाज की बुनियाद को ही बुरी तरह हिला कर रख दिया है। जब तक मुट्ठी गर्म न की जाए तब तक कोई काम ही नहीं होता। भ्रष्टाचार एक संचारी बीमारी की भांति इतनी तेजी से फैल रहा है कि लोगों को अपना भविष्य अंधकार से भरा नजर आने लगा है और कहीं कोई भ्रष्टाचार मुक्त समाज की उम्मीद नजर नहीं आरही है। मंत्री से लेकर संतरी और नेताओं तक भ्रस्टाचार के दलदल में फंसे है। हालात इतने बदतर हैं कि निजी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। सिविल सोसाइटी और मीडिया के दवाब में सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम तो दे रही हैं मगर उनकी गति बेहद धीमी है ।

(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

 

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