पिच को चमकाने वाले क्यूरेटर की जिंदगी हुई फीकी, पूरे काम का मिल रहा आधा दाम

पटना । कोरोना वायरस के कारण करोड़ों जिंदगियों पर असर पड़ा है। क्रिकेट के मैदान भी बिना खेल के सूखे पड़े हैं, लेकिन बावजूद इसके मैदानों की देख-रेख और इसको खेलने योग्य बनाए रखने के लिए लोग दिन-रात काम कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे लोगों की जिंदगी भी किसी संघर्ष से कम नहीं गुजर रही, क्योंकि कई लोग ऐसे हैं, जिनको पूरे काम का आधा दाम मिल रहा है। ऐसा ही कुछ पटना के ऊर्जा स्टेडियम के पिच क्यूरेटर के साथ हो रहा है।
दरअसल, दिन-रात एक कर पटना के नंबर वन ऊर्जा स्टेडियम को चमकाने वाले पिच क्यूरेटर सुब्रत माली की जिंदगी कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में फीकी पड़ गई है। साढ़े तीन साल पूर्व जब बंगाल के ईस्टर्न रेलवे खेल परिसर से सहायक क्यूरेटर की नौकरी छोड़ सुब्रत पटना आए, तो उन्हें यह मालूम नहीं था कि आज उन्हें घर चलाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। अपने डेढ़ साल के बच्चे के लिए दूध की व्यवस्था का मोहताज होना पड़ेगा। इतनी परेशानी के बावजूद ईमानदारी से अपने काम को अंजाम दे रहे सुब्रत बताते हैं कि एक निजी कंपनी से स्टेडियम के अगले साल नवंबर तक अनुबंधित होने से मुझे 19300 रुपये प्रति माह तनख्वाह मिलता है। फरवरी तक सभी कुछ सामान्य चल रहा था। इसके बाद लॉकडाउन होने से मार्च का आधा वेतन मिला। तब से लेकर अब तक एक सहायक के साथ पिच समेत पूरे मैदान को संवारने का काम कर रहा हूं और बदले में आधा तनख्वाह पाता हूं। विद्युत बोर्ड की ओर से क्वार्टर मिलने से रहने की समस्या तो नहीं है, लेकिन इतने कम पैसे में परिवार को चलाना और बंगाल में अंफान तूफान में काफी कुछ गंवा चुके बूढ़े माता-पिता की देखभाल करना संभव नहीं है। पूरा वेतन देने के लिए कई बार मेल कर चुका हूं पर कोई जवाब नहीं मिला है। अगले तीन माह तक इंतजार करूंगा। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से बात चल रही है, नहीं तो जीवन यापन के लिए दूसरी राह तलाश करूंगा।

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