दुनिया के देशों ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाये

कोरोना महासंकट

बाल मुकुन्द ओझा

यह सच्चाई है की भारत ने हर संकट में दुनिया के देशों की मदद की है। भारत सदा सर्वदा परोपकार के मार्ग पर चला है। हमारे पूर्वजों और ऋषि मुनियों ने हमें परोपकार के मार्ग चलने की शिक्षा और प्रेरणा दी है। भारत के मूल में है की मनुष्य को अपने जीवन में सबकी मदद करनी चाहिए। गोस्वामी तुलसी दास के बताये मार्ग को अंगीकार करते हुए भारत का मानना है परोपकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म होता है। परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। जो व्यक्ति स्वयं की चिंता न कर दूसरों के परोपकार के लिए कार्य करता है, वही सच्चे अर्थों में मनुष्य है। परोपकार का अर्थ है दूसरे की भलाई करना। परमात्मा ने हमें जो भी शक्तियां व सामर्थ्य दिए हैं वे दूसरों का कल्याण करने के लिए दिए हैं। इसी धर्म का अनुसरण करते हुए भारत ने कोरोना महामारी के दौरान विपदाग्रस्त देशों को कोरोना के टीके भेजकर मदद में हाथ बंटाया।
मार्च माह तक यह समझा जा रहा था की कोरोना भारत से विदा हो रहा है मगर अप्रैल आते आते कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत को भयाक्रांत कर दिया। इतनी तेजी से कोरोना फैला की समूचा देश एक बारगी चीत्कार कर उठा। अस्पतालों की व्यवस्थायें चरमरा गयी। लोगों की सांसे अटक गयी। बेड और आक्सीजन यकायक ही कम पड़ गए। देश में कोरोना संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया और बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हुए और जिन्हें यह सुविधा नहीं मिली वे मारे मारे फिर कर अपनी जान देने लगे। देशभर के ज्यादातर अस्पतालों की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। भारत पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। पर्याप्त साधनों के भाव में अस्पतालों ने हाथ ऊपर कर लिए और पीड़ित लोग एक एक कर अपनी जान गंवाने लगा। राजनेता बजाय राहत पहुँचाने के एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों में अपना समय जाया करने लगे। ऐसे में अदालतों ने फटकार भी लगायी।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति की गंभीरता देखते हुए अपने चुनावी दौरे निरस्त कर पीड़ितों की सहायता में जुट गए। इस कार्य में विलम्ब जरूर हुआ मगर उनके कूटनीतिक प्रयास रंग लाये और दुनिया के देश भारत के सहायता के लिए एक एक कर आगे आने लगे। देखते देखते आवश्यक दवा, आक्सीजन आदि का इंतजाम होने लगा। कोरोना वायरस की दूसरी तेज लहर का सामना कर रहे भारत में दुनिया के कई देशों से जरूरी मेडिकल सामानों की खेप की आपूर्ति शुरू हो गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की बीच फोन पर बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडने ने ट्वीट करते हुए कहा, महामारी की शुरुआत में भारत ने हमारी मदद की थी, हम भी भारत की मदद करने के लिए कटिबद्ध है। इसी भांति ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर,कनाडा, हांगकांग, आयरलैंड, थाइलैंड, यूएई आदि देशों ने तत्काल आक्सीजन सहित दवाइयों से भरे हवाई जहाज भारत को भेजने शुरू कर दिए। भूटान जैसे छोटे से देश ने भी सहायता का हाथ बंटाया। चीन और पाकिस्तान भी इस दिशा में आगे आये। इस तरह पूरी दुनिया ने कोरोना महासंकट में भारत की सहायता कर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। केंद्र सरकार ने एक हाई लेवल अंतर-मंत्रिस्तरीय समूह का गठन किया है जो इन चीजों के जरूरत के हिसाब से वहां-वहां पहुंचाने को लेकर फैसला करेगा। नवगठित हाई लेवल अंतर-मंत्रिस्तरीय समूह में कई देशों से मिली मदद को तत्काल अस्पतालों को मुहैया कराने को लेकर फैसला लेगा और कई सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्राप्तकर्ता संस्थानों को तुरंत भेजा जाएगा। यह कार्य त्वरित गति से शुरू भी हो गया है।
गौरतलब है कोरोना संकट में भारत ने सबसे पहले दुनिया के देशों की टीकों सहित हर संभव मदद की थी जिस पर विपक्ष के हमलों का शिकार मोदी सरकार को होना पड़ा था।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

 

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