आपभी जानिये ! दुनिया के सर्वाधिक पर्यटक गोवा क्यों आते है

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल लेखक एवं अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार 
 खूबसूरत समुद्री तटों को देखने और समुद्र की लहरों से अठखेलियां करने के लिए अब आपको ले चलते हैं गोवा राज्य की सैर पर। समुद्र तट ही नहीं वरन् गोवा की इमारतों की स्थापत्य कला भी आपको लुभा लेगी। यही वह राज्य है जहां से काजू ब्रिटेन, सउदी अरब एवं यूरोपियन राष्ट्रों को एवं लोह खनिज जापान व चीन को निर्यात किये जाते हैं। यहां के चर्च विश्व में अपना विशेष पहचान रखते हैं। यहां का समुद्रतट 101 कि.मी. लम्बा है और सैलानियों के लिए करीब 40 से अधिक समुद्री बीच मौजूद हैं। जनश्रुति के अनुसार इस स्थल का सम्बन्ध परशुराम से माना जाता है और सम्भवतः इसीलिए उत्तरी गोवा में हरमल के पर्वत को परशुराम के यज्ञ करने का स्थल माना जाता है। 

गोवा को महाभारत में गोपराष्ट्र, संस्कृत साहित्य में गोपकपुरी, गोपकपट्टन तथा गोमांचल एवं गोमांतक नामों से पुकारा गया है। वर्ष 1510 में पुर्तगाली यहां आये और उन्होंने इसे गोवा नाम दिया। करीब 500 वर्षों से अधिक यह स्थान पुर्तगालियों का उपनिवेश बना रहा। भारतीय सेना ने गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त कराने के लिए 19 दिसम्बर 1961 को ” ओप्रेशन विजय“ के नाम से सैन्य संचालन किया, जिसके परिणाम स्वरूप गोवा, दमन, दीव पुर्तगालियों के चंगुल से मुक्त होकर भारत के केन्द्रिय शासित प्रदेश बन गये। 30 मई 1987 को केन्द्र शासित क्षेत्रों का विभाजन कर गोवा को भारत का 25 वां राज्य बनाया गया तथा दमन और दीव केन्द्र शासित प्रदेश रहे।
गोवा की पूर्वी सीमा में पश्चिम घाटियों की पहाड़ियां, पश्चिम में अरब सागर, उत्तर में महाराष्ट्र के समुद्र तट तथा दक्षिण में कर्नाटक की तटीय समुद्र की सीमाएं जुड़ती हैं। पणजी को गोवा की राजधानी बनाया गया तथा वास्कोडिगामा राज्य का सबसे बड़ा शहर है। जनसंख्या एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का सबसे छोटा राज्य है। यहां उत्तर जिला गोवा एवं दक्षिण जिला गोवा दो जिले हैं। यहां की राजभाषा कोंकणी एवं मराठी हैं। यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव यहां स्पष्ट देखा जा सकता है। राज्य में 60 प्रतिशत हिन्दू एवं 28 प्रतिशत ईसाई पाये जाते हैं। विशेष बात यह है कि ईसाई परिवारों में भी हिन्दू परिवारों जैसी जाति व्यवस्था देखने को मिलती है।
अर्थव्यवस्था की दृष्टि से पर्यटन यहां का प्रमुख व्यवसाय है। पर्यटन पर आधारित कई व्यवसाय एवं उद्योग यहां फलफूल रहे हैं। चावल यहां की मुख्य फसल है तथा गन्ना अन्य खाद्यान व दालें भी यहां उगाई जाती हैं। नारियल, काजू, सुपारी, अन्नानास, आम एवं केलों की पैदावार भी यहां होती हैं। लोह खनिज प्रमुख रूप से पाया जाता है। यहां मछली पालन व्यवसाय भी प्रमुख है। मछली की खपत स्थानीय बाजार में ही हो जाती है। हाथी दाँत व कछुए की खाल से बनी वस्तुएं हस्तशिल्प के सुन्दर नमूने हैं,लुभावने समुन्द्री बीच।
 गोवा में प्राकृतिक आभा लिए समुद्री तट सैलानियों का सबसे प्रमुख आकर्षण है। कुछ तट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के होने से यह स्थान विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अपना महत्व रखता है।  पणजी से 16 कि.मी. पर कलंगुट बीच को यहां के बीचों की रानी कहा जाता है। विश्व के अच्छे समुद्र तटों में शुमार यह तट करीब 28 कि.मी. लम्बा है। इसके आस-पास बड़ी संख्या में रिसोर्ट एवं काॅटेज बने हुए हैं। इसके पास में बाग बीच, पणजी बीच के समीप मीरामार बीच एवं दोनापाउल बीच महत्वपूर्ण समुद्री तट हैं। अन्य सुन्दर तटों में बागाटोर बीच, अंजुना बीच, सिंकेरियन बीच, पालोलेम बीच एवं कोलबा बीच भी प्रमुख हैं। पणजी से 7 कि.मी. पर दोनापाउल बीच दोना और पाउल प्रेमी-प्रेमिका के प्यार की निशानी है। यह दोनों आपस में प्रेम करते थे परन्तु समाज ने इनके प्यार को स्वीकार नहीं किया। इन्होंने एक पहाड़ी से कूद कर आत्महत्या कर ली। इन्हीं की याद में यहां एक समाधि बना दी गई है। यह बीच रेत के तट पर नहीं बना है परन्तु बीच से समुद्र का सौन्दर्य देखते ही बनता है।

      बीच पर आप बनाना राइड्स,पेरसोललिंग,जेटस्की,बोट राइडिंग एवं पैरा ग्लाइडिंग का आनन्द भी ले सकते हैं। समुंद्री बीचों पर सैलानी समुद्र की लहरों को निहारने के साथ-साथ पानी से अठखेलियां करते नजर आते हैं। समुद्र की सैर के लिए यहां अनेक प्रकार की सुविधाएं वाटर स्कूटर, क्रूज आदि उपलब्ध हैं। केलंगयुट एवं बाघा बीच पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त के दृश्यों के साथ सांय काल डॉल्फिन देखने का मजा ही कुछ और है। समुद्री बीचों पर बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी चमकती रेत पर धूप सेकते नजर आते हैं। भारतीय एवं विदेशी संस्कृति का पर्याय बने ये बीच किसी स्वर्ग से कम नहीं है।  कैंडिल डिनर,डांस एवं कैसिनों का आनन्द लेने के लिए रात्रि में समुद्री क्रूज पर जरूर जाए।यह पल आपको एक नई दुनिया की सैर कराएंगे जिन्हें आप कभी नहीं भूल पाएंगे।
गोवा की संस्कृति को अधिक नजदीक से देखकर आनन्द प्राप्त करने के लिए किराये पर साइकिल, मोटर साइकिल आदि उपलब्ध रहती हैं।

पणजी
  गोवा की राजधानी पणजी का आधुनिक बाजार किसी अजूबे से कम नहीं है। मांडवी नदी के तट पर बसा यह नगर अत्यन्त नियोजित एवं सुव्यवस्थित है। यहां की इमारतों के घरों की छतें ढलवां एवं लाल रंग की होती है। रात्रि को माडंवी पर तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य में गोवा की संस्कृति देखने को मिलती है तथा यहीं पर लज्जतदार भोजन का भी सैलानी लुफ्त उठाते हैं।
चर्चों के साथ-साथ यहां कामांक्षी, सप्तकेटेश्वर, श्री शांतादुर्ग, महालसा नारायणी, परनगेम का भगवती मंदिर एवं महालक्ष्मी मंदिर प्रमुख प्राचीन मंदिर हैं। अगोडा का किला, केसरवाला जलप्रपात, मेयम झील, महावीर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, संग्राहलय यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। इनके साथ ही आदिल शाह का अस्तबल, इडालको का राजमहल (जहां अब सचिवालय है), अब्बे फारिया मूर्ति, शहीद स्मारक भी दर्शनीय हैं। पणजी से 4 कि.मी. दूर चैराओ गाँव में सलीम अली पक्षी विहार में दुर्लभ पक्षियों की भारतीय एवं प्रवासी प्रजातियां देखने को मिलती हैं। इस पक्षी विहार का नाम प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डाॅ. सलीम अली के नाम पर रखा गया है। फुटबाल एवं हाॅकी यहां के लोकप्रिय खेल हैं।
वास्को-डी-गामा भारतीय रेलवे का अन्तिम पड़ाव है। यहां आने के लिए पावला से स्टीमर भी उपलब्ध है। हवाई अड्डा होने से भी इसका महत्व हैं। गोवा में जो भी प्राचीन इमारतें नजर आती हैं वे सब पुर्तगालियों की देन हैं।। गोवा पहुँचने के लिए डैबेलिम विमान क्षेत्र घरेलु हवाई अड्डा देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पणजी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से विभिन्न देशों के लिए विमान सेवा उपलब्ध हैं। गोवा सड़क मार्ग से मुम्बई व बैंग्लूर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जहां से लग्जरी बसें उपलब्ध हैं। कोंकण रेलवे-गोवा  भारत के पूर्वी तटीय शहरों से जुड़ा हुआ है। रेल द्वारा वास्कोडिगामा भी पहुँचा जा सकता है। गोवा भ्रमण के लिए पणजी से बस एवं टैक्सी टूर पैकेज उपलब्ध हैं। मुम्बई और पणजी के मध्य फ्रैंक शीपिंग कम्पनी जहाज सेवाएं उपलब्ध कराती है। गोवा घूमने के लिए सबसे उत्तम समय अक्टूबर से मई के मध्य का है। क्रिसमिस के समय दिसम्बर में गोवा का सौन्दर्य अपने चरम पर होता है। अतः इस समय गोवा घूमने का आननद दुगुनित हो जाता है।
सेंट कैथेड्रल चर्च, पुराना गोवा
भारत का सबसे बड़ा चर्च गोवा में सेंट कैथेड्रल चर्च है जो एलेक्जेन्ड्रिया की कैथरीन को समर्पित है। इस चर्च का निर्माण मुस्लिम सेना पर पुर्तगाली सेना की विजय के उपलक्ष्य में किया गया जो गोवा पर अपना अधिकार करना चाहती थी। इसका निमार्ण कार्य 1562 में शुरू हुआ और 1619 में पूर्ण किया गया। चर्च 181 फीट गहरा एवं 250 मीटर लम्बा है। कैथेड्रल में घन्टे के ऊंचे स्वर के कारण इसे ”गोल्डन बेल” के नाम से जाना जाता है। यह घन्टा विश्व का सबसे अच्छा एवं गोवा में सबसे बड़े घन्टे के रूप में जाना जाता है। मुख्य भवन में कैथरीन को समर्पित अनेक सुन्दर चित्र बनाये गये हैं। बांई ओर चेपल बना है। यहां क्राईस्ट ने 1919 में प्रवेश किया था। चेपल को क्राॅस आॅफ मिराकॅल के रूप में जाना जाता है।
बोम जीसस बेसिलिका चर्च
गोवा में समुद्र के किनारे स्थित 300 वर्ष प्राचीन बोम जीसस बेसिलिका चर्च भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध चर्चो में माना जाता है। बोम जीसस का अर्थ होता है भगवान जीसस। चर्च में सेंट फ्रंासिस जेवियर का मृत शरीर चांदी के ताबूत में रक्खा गया है जिसे वर्श में एक बार सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए खोला जाता है। इस अवधि में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी श्रद्धालु यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। इस चर्च को विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल किया गया है।
वेलकन्नी चर्च
बंगाल की खाड़ी में समुद्र तट पर स्थित वेलकन्नी चर्च दुनिया भर के ईसाइयों के लिए श्री का बड़ा केन्द्र है। यह चर्च बेसिलिका जिसे ”स्वास्थ्य की देवी“ कहा जाता है के नाम समर्पित है। माना जाता है कि यहां देवी को जलती हुई मोमबत्ती पेश करने पर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यहां मानव अंगों दिल, फेंफडे आदि आकृतियों में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। यह चर्च बहुसांस्कृतिक, अन्तर्राष्ट्रीय और धार्मिक सद्भावना की मिसाल है। गोवा देश के प्रमुख शहरों से बस,रेल एवं हवाई मार्गो से जुड़ा है। विदेशी पर्यटकों के लिये मुम्बई में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
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