स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर किडनी बचाएं

विश्व किडनी दिवस

बाल मुकुन्द ओझा

विश्व किडनी दिवस प्रत्येक वर्ष मार्च माह के दूसरे गुरूवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 11 मार्च को यह दिवस मनाया जायेगा। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को किडनी संबंधी रोगों के प्रति जागरूक करना और समस्या का निदान करना है। विश्व किडनी दिवस की इस साल की थीम है किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरी व्हेयर हर जगह हर किसी के लिए किडनी का स्वास्थ्य। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अपौष्टिक आहार के कारण लोग जल्दी ही असाध्य बीमारियों के शिकार होते जा रहे है। इनमें किडनी की बीमारी भी शामिल है। हम सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। शरीर का पूरा सिस्टम इस पर निर्भर करता है. इसलिए अगर इसकी देखभाल में कोई लापरवाही रखी तो ये जानलेवा भी हो सकती है किडनी की बीमारी से हर साल लगभग साढ़े आठ लाख लोगों की जान चली जाती है। इस बीमारी के चलते व्यक्ति की किडनी धीरे -धीरे काम करना बंद कर देती है। यह दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को किड्नी की सही देखभाल कर किसी भी प्रकार की बीमारी से बचने का है। अगर आपके पेट के बांयीं या दांयीं ओर असहनीय दर्द हो रहा हो, तो इसे कतई हल्के में ना लें, क्योंकि यह किडनी में परेशानी की हिंट हो सकती है। किडनी के काम न करने के कारण शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इस बीमारी में पेशाब आने की मात्रा बढ़ती या कम होती है। इसके अलावा बार-बार पेशाब आने का एहसास होना मगर करने पर पेशाब का न आना भी किडनी फेल का लक्षण है। किडनी की बीमारी के शुरूआती लक्षणों में लगातार उल्टी आना,भूख नहीं लगना, थकान और कमजोरी महसूस होना, पेशाब की मात्रा कम होना, खुजली की समस्या होना, नींद नहीं आना और मांसपेशियों में खिंचाव होना प्रमुख हैं। इससे बचने के लिए डिब्बा बंद खाने की चीजें, चिप्स, नमकीन, अचार और चटनी का सेवन कम करें।
इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ किडनी डिसीजेस और इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी द्वारा लगातार बढ़ रही किडनी डिसीज को बढ़ता देख यह दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। यह एक अवसर है कि जब प्रकृति द्वारा गुर्दे के रूप में दिए गए अनमोल उपहार को बचाया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह स्वस्थ रहे और सुचारू रूप से काम करता रहे। यह हमारे शरीर का ही एक अंग है इसलिये हमें पता होना चाहिये कि हम इसे ऐसा क्या दें कि यह सारी जिंदगी सही से काम अपना काम करें। आपके गुर्दे बीन के आकर में आपके पेट के दायें और बायें भाग में पीछे की तरफ स्थित होता है। यह शरीर में प्राकृतिक छलनी की तरह काम करता है। किडनी या गुर्दे की बीमारी को साइलेन्ट किलर भी कहा जाता है। क्योंकि प्रथम अवस्था में कभी भी इसका पता नहीं चलता है।
दुनियाभर में साढ़े तीन अरब से अधिक किडनी की बीमारियों के मरीज हैं जिनमें महिलाओं की तादाद 1.9 अरब है। भारत में प्रत्येक 10 व्यक्तियों में से एक किडनी की बीमारी से ग्रस्त है। दुर्भाग्य से आधे से अधिक मरीज अपनी बीमारी के बारे में तब जान पाते हैं जब उनका किडनी 60 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त हो चुका होता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार किडनी के लगभग 1.50 लाख नए मरीज हर वर्ष बढ़ जाते हैं जिनमें से बहुत थोड़े लोगों को किसी प्रकार का इलाज उपलब्ध हो पाता है। विश्व भर में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों में महिलाओं की तादाद पुरुषों से कहीं अधिक है, जिसका मुख्य कारण लापरवाही है। इस समस्या ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। अगर आपको मधुमेह,हाइपरटेंशन या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन(यूटीआई) है,तो गुर्दे के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। आंकड़े बताते हैं कि अधिकतर गुर्दा रोगी अस्पताल तब पहुंचते हैं जब उनका गुर्दा लगभग 50 प्रतिशत खराब हो चुका होता है। किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर मूत्र के रूप में निकालने में मदद करता है। इसमें खराबी मतलब पूरे शरीर के कार्य में बाधा उत्पन्न होना, इसलिए किडनी को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी होता है। लेकिन आज के आधुनिक युग की जीवनशैली के कारण किडनी की बीमारी होने का खतरा बढ़ गया है। भारत में हर साल लगभग पांच लाख गुर्दे का प्रत्यारोपण किए जाने की आवश्यकता होती है लेकिन इस मंहगी प्रक्रिया के माध्यम से कुछ हजार मरीज ही नया जीवन प्राप्त कर पाते हैं । किडनी जिसे गुर्दा भी कहते है की लंबी बीमारी के मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण उनका तथा उनके परिवार का पूरा जीवन दयनीय हो सकता है। ऐसे में यह आज के समय की आवश्यकता है कि हम सभी स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं। साथ ही, बीमारी के खतरे से ग्रस्त व्यक्तियों को नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने एवं निगरानी रखने की आवश्यकता है। इस महत्वपूर्ण दिवस पर आइये हम सभी इस महत्वपूर्ण अंग के विषय में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने और एक-दूसरे को जागरूक करने का संकल्प लें।

 

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