अन्न की बर्बादी और भूख का तांडव

बाल मुकुन्द ओझा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने हालिया जारी अपनी फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2021 में देश और दुनिया का ध्यान भोजन की बर्बादी की ओर दिलाया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में खाने के लिये उपलब्ध भोजन का 17 प्रतिशत बर्बाद हो गया और लगभग 69 करोड़ लोगों को खाली पेट सोना पड़ा था। खाने की बर्बादी को लेकर दुनियाभर में चिंता व्यक्त की जा रही है। यही भोजन यदि गरीबों को सुलभ कराया जाये तो भूखे पेट सोने वालों की कमी आएगी ।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते साल पूरी दुनिया में अनुमानित रूप से 93.10 करोड़ टन खाना बर्बाद हो गया, जो वैश्विक स्तर पर कुल खाने का 17 फीसदी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय घरों में हर साल करीब 6.87 करोड़ टन खाना हर साल बर्बाद हो जाता है। भारत में गरीबी और कुपोषण का आज भी बोलबाला है। खाद्यान होने के बावजूद गरीबों को सुलभ नहीं हो रहा है। खाने की बर्बादी को लेकर समय समय पर खबरे प्रकाशित होती रहती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की ओर से तैयार खाने की बर्बादी के सूचकांक की रिपोर्ट, 2021 के मुताबिक इतना खाना घरों, खुदरा दुकानों, रेस्तरां समेत खानपान की अन्य जगहों पर बर्बाद हुआ। इसके मुताबिक, 93.10 करोड़ टन बर्बाद खाने में से 61 फीसदी हिस्सा घरों से, 26 फीसदी खाद्य सेवाओं और 13 फीसदी खुदरा जगहों से आता है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सालाना प्रति व्यक्ति 121 किलो खाना बर्बाद हो रहा है। इनमें प्रति घर के हिसाब से हिस्सेदारी 74 किलो है।
दुनिया के हर देश और हर देशवासी को यह ध्यान देना होगा कि अन्न का एक भी दाना खराब न होने पाए। खाद्य उत्पादन को खराब करने में सबसे आगे अमीर देश हैं। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक खाने की बर्बादी को कम करने का संकल्प लिया है।
भारत में घरों में प्रति व्यक्ति के हिसाब से हर साल 50 किलो खाना बर्बादी की भेंट चढ़ जाता है। इस भांति हर साल भारतीय घरों में 68,760,163 टन खाना हर साल बर्बाद होता है। दक्षिण एशियाई देशों में सालाना प्रति व्यक्ति खाना बर्बाद करने वाले देशों की सूची में भारत अंतिम पायदान पर है। इस सूची में 82 किलो के साथ अफगानिस्तान शीर्ष पर है। उसके बाद 79 किलो के साथ नेपाल, 76 किलो के साथ श्रीलंका, 74 किलो के साथ पाकिस्तान और फिर 65 किलो के साथ बांग्लादेश का नंबर आता है।
भोजन जीवन जीने का आधार है। बिना भोजन के आप और मैं जीवित नहीं रह पाएंगे। भारत में खाने की बर्बादी सबसे ज्यादा होती है। भारत जैसे देश में अधिक खाना बनाने और अधिक खाना परोसने का चलन सबसे ज्यादा है। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो खाने की बर्बादी कैसे रोकेंगे? घर में जब भी खाना बनाएं जितने की जरूरत है उससे थोड़ा कम बनाएं ज्यादा नहीं। किसी को खाने देते समय थोड़ी मात्रा में खाना दें। जितना लोग खा सकते हैं उसके हिसाब से ही खाना दें। थाली में खाना छोड़ने की आदत खुद छोड़ें और घर के अन्य सदस्यों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
आपने कई बार सुना होगा कि लोग अपना खाना बर्बाद करते हैं या आपने अपने घर में सुना होगा कि, आपके माता-पिता हमेशा आपको खाने को बर्बादी न करने की सलाह देते हैं, क्योंकि वे बखूबी समझते है कि खाना उनके लिए क्या माइने रखता है।एक कहावत बड़ी प्रचलित है कि इतना ही लो थाली में जो ना जाए नाली में। लेकिन आज इस बात पर कोई ध्यान नहीं देता है। अभी भी हमारे देश के कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड भुखमरी से जूझ रहे हैं। इन राज्यों के गाँव और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीबो को बहुत ही मुश्किल से दो समय की रोटी नसीब होती है। कई बार तो ये एक समय ही खाकर सो जाते है।
सीएसआर के एक जर्नल के मुताबिक, हम भारतीय उतना खाना बर्बाद करते हैं जितना कि पूरा यूके खाता है। जहां भारत में हर रोज करीब 194 मिलियन लोग भूखे सोने पर मजबूर हैं और करीब 24 प्रतिशत लोग आधे पेट ही भोजन प्राप्त कर पाते हैं। हर चार में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 23 करोड़ टन दाल,12 करोड़ टन फल और 21 करोड़ टन सब्जियां वितरण प्रणाली में खामियों के कारण खराब हो जाती हैं।
भारतीय संस्कृति में अन्न को देवता का दर्जा प्राप्त है और यही कारण है कि भोजन झूठा छोड़ना या उसका अनादर करना पाप माना जाता है। मगर आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपना यह संस्कार भूल गए हैं। यही कारण है कि होटल-रेस्त्रां के साथ ही शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में सैकड़ों टन खाना रोज बर्बाद हो रहा है। भारत ही नहीं, समूची दुनिया का यही हाल है। एक तरफ अरबों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, कुपोषण के शिकार हैं, वहीं रोज लाखों टन खाना बर्बाद किया जा रहा है। खाने की बर्बादी रोकने की दिशा में महिलाएं बहुत कुछ कर सकती हैं। खासकर बच्चों में शुरू से यह आदत डालनी होगी कि उतना ही थाली में परोसें जितनी भूख हो। एक-दूसरे से बांट कर खाना भी भोजन की बर्बादी को बड़ी हद तक रोक सकता है। हमें अपनी आदतों को सुधारने की जरूरत है।
(लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं पत्रकार हैं)

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