अरविन्द केजरीवाल सपनों के सौदागर हैं-आदेश गुप्ता

केजरीवाल सरकार का बजट- 2021-22

@ chaltefirte.com                                    नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आज एक पत्रकार सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये कहा कि अरविन्द केजरीवाल सरकार का बजट 2021-22 एक छलावा है। जिस तरह बजट 2021-22 दिल्ली की वर्तमान एवं अल्प अवधि विकास आवश्यकताओं पर मौन है और 2047 को लेकर दिल्ली वालों को सपने बेच रहा है यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अरविन्द केजरीवाल सपनों के सौदागर हैं। पत्रकार सम्मेलन में प्रदेश पदाधिकारी हर्ष मल्होत्रा,  वीरेन्द्र सचदेवा,  हरीश खुराना,  प्रवीण शंकर कपूर एवं  हरिहर रघुवंशी उपस्थित थे।

 आदेश गुप्ता ने कहा कि यह देश के किसी भी राज्य का पहला बजट होगा जिसमें सरकार ने 26 साल बाद की दिल्ली की कल्पना तो की है पर वर्तमान में प्रदूषण एवं परिवहन की बिगड़ती स्थिति पर कोई ठोस योजना नहीं रखी है। आज का बजट प्रस्तुत करते हुये दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने 2047 तक दिल्ली को सिंगापुर जैसा बनाने का दावा किया है, दिल्ली में ऑलम्पिक खेल कराने की कल्पना की है जो कि हास्यास्पद लगता है, क्योंकि यही सरकार अभी कुछ दिन पहले तक दिल्ली को लंडन जैसा, यमुना को थैम्स जैसा बनाने की बात कहती थी पर आज नये सपने बेचने लगी।

केजरीवाल सरकार हर वर्ष ऐतिहासिक बजट प्रस्तत करने के दावे करती है और हर वर्ष उस बजट का शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रदूषण, परिवहन पर आवंटित बजट का एक बड़ा भाग खर्च ही नहीं करती। 2015-16 में सरकार ने 41129 करोड़ रूपये का बजट प्रस्तुत किया जिसमें से 14.4 प्रतिशत बजट खर्च ही नहीं किया। 2016-17 में 46600 करोड़ रूपये का बजट लाई जिसका 20 प्रतिशत खर्च नहीं किया। 2017-18 में 48000 करोड़ रूपये का बजट प्रस्तुत किया जिसका 14.7 प्रतिशत खर्च नहीं हुआ। 2018-19 में 53000 करोड़ रूपये का आया जिसका 12.7 प्रतिशत तो 2019-20 में 60000 करोड़ रूपये का बजट आया जिसका 14.7 प्रतिशत खर्च ही नहीं किया। कोविड 19 के संकट काल के बावजूद वर्तमान वित्त वर्ष 2020-21 के 65000 करोड़ रूपये के बजट में से लगभग 9.23 प्रतिशत रूपये लैप्स होने जा रहा है।

दिल्ली सरकार स्वास्थ्य पर बड़े-बड़े दावे करती है। यह सरकार 2015 में जब सत्ता में आई तो दिल्ली में 94 अस्पताल कार्यरत थे जो आज घटकर 88 अस्पताल रह गये हैं। 2015 में दिल्ली में 265 महिला प्रसूति गृह थे जो आज घटकर 224 रह गये हैं। 2015-16 में दिल्ली का 35 प्रतिशत तो 2019-20 में 37 प्रतिशत स्वास्थ्य बजट खर्च ही नहीं किया। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में 3987 करोड़ रूपये का स्वास्थ्य बजट आवंटन है जिसमें से 25 प्रतिशत लैप्स होने का अनुमान है। आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के लिये 9934 करोड़ रूपये आबंटित किये गये है, पुराना अनुभव बताता है कि यह केवल एक घोषणा बनकर रह जायेगा क्योंकि सरकार के पास कोई कार्य योजना ही नहीं है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने शिक्षा पर 16377 करोड़ रूपये आबंटित किये हैं। सरकार इसी तरह हर वर्ष शिक्षा पर नये-नये सपने बेचती है पर उसने गत 5 साल में दिल्ली को 5 नये स्कूल भी नहीं खोले और आज फिर 145 स्कूल आफ एक्सीलेंस खोलने के सपने बेच रही है। यह वह सरकार है जिसके कार्यकाल में हर वर्ष औसतन 20 प्रतिशत शिक्षा बजट खर्च ही नहीं होता। 2015-16 में दिल्ली सरकार ने 9836 करोड़ रूपये का शिक्षा बजट दिया जिसका 21 प्रतिशत खर्च नहीं किया तो 2019-20 में 15601 करोड़ रूपये आबंटित किये और उसमें से 19.4 प्रतिशत खर्च ही नहीं किये।

 आदेश गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण दिल्ली की एक बड़ी समस्या है पर यह आश्चर्य का विषय है कि दिल्ली बजट 2021-22 में इसके लिये कोई कार्य योजना प्रस्तुत नहीं की गई है। बजट प्रावधानों के साथ ही सरकार पर हर वर्ष सैकड़ों करोड़ रूपये प्रदूषण सेस का पैसा आता है फिर भी सरकार के पास वायु प्रदूषण पर कोई कार्य योजना न होना अचम्भित करता है। इसी तरह सरकार हर वर्ष बजट में यमुना सफाई की बात करती है, बजट आवंटित करती है पर असल में आज यमुना पहले से भी गंदी है ऐसे में सरकार का इस पर अब बोलना अविश्वसनीय लगता है।

सार्वजनिक परिवहन यानि कि दिल्ली की बस सेवा चाहे डीटीसी की हो या कलस्टर सेवा हो का बुरा हाल किसी से छुपा नहीं है। सरकार ने आज बजट प्रस्तुत करते हुये 1300 नई बसें लाने के सपने को दिखाते हुये 2021-22 में दिल्ली में 6693 बसें होने का दावा किया है। जबकि वास्तविकता यह है कि लगभग 2000 पुरानी बसें मार्च, 2022 तक दिल्ली की सड़कों से हट जायेंगी और असल में अगले वर्ष के प्रारम्भ में दिल्ली में मात्र 4700 के लगभग ही बसें सड़कों पर होंगी।उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य चकित करता है कि दिल्ली में सड़क इफ्रास्टेक्चर सुधारने पर, नये फ्लाई ओवर बनाने पर बजट शांत है। मुख्यमंत्री सड़क योजना गत गई वर्ष से चल रही है लेकिन पी.डब्ल्यू.डी. की सड़कों की दुर्गती देखती ही बनती है। सरकारी बजट आंकड़े कितने अविस्वसनीय है इसका एक प्रमाण है कि कल जो आर्थिक सर्वेक्षण आया उसमें दिल्ली सरकार ने दावा किया कि उसने 1571 अनधिकृत कालोनियों तक पानी एवं सीवर की लाइनें पहुंचा दी हैं जबकि आज बजट प्रस्तुत करते हुये वित्त मंत्री ने कहा कि 1343 अनधिकृत कालोनियों तक पानी एवं सीवर की लाइनें पहुंची हैं।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि दिल्ली की जनता अब खूब समझती है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार बजट का उपयोग दिल्ली के विकास के लिये नहीं, केवल अपना चुनावी गणित साधने के लिये फ्री योजनाओं पर करती है जिसका परिणाम है दिल्ली में विकास ठप्प हो चुका है।

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