ताजिंदगी महिलाओं का रोल अविस्मरणीय-डॉ मंजुला

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में एफओईसीएस की ओर से मना विश्व महिला दिवस

@ chaltefirte.com                                  मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की एसोसिएट डीन डॅा मंजुला जैन बोलीं, बचपन से लेकर अब तक हमारे जीवन में महिलाओं का अविस्मरणीय योगदान रहा है। चाहे वह मां के रूप में हो या शिक्षिका और सासू मां के रूप में रहा होए जिन्होंने हमें अलग.अलग तरह की शिक्षाएं दीं। प्राचीन काल से ही जेंडर इक्वलिटी रही है। महिला और पुरुष को एक समान माना गया है। वेदों में महिला और पुरुष की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई है। महिलाएं हमेशा से ही सशक्त रही हैं। यह सशक्तिकरण हमारे विचारों से ही आता है। हमें अपनी तुलना पुरुषों से न करके बल्कि स्वंय के मानदंडों से ही करनी चाहिए। लोगों का क्या है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। उन्होंने रामायण की चर्चा करते हुए कहाए मां सीता ने एक बेटी, एक पत्नि और एक मां के रूप में आदर्श स्थापित किया है। वह चाहतीं तो रावण को एक पल में ही धराशायी कर देतीं, लेकिन उन्हें अपने पति प्रभु श्रीराम पर अटूट विश्वास था। वह जानती थीं, प्रभु श्रीराम उन्हें अवश्य रावण से छुड़ा ले जाएंगे। उन्होंने हमें विश्वास का महत्व समझाया। मां सीता के जीवन से यह शिक्षा मिलती है, महिलाओं को किस तरह से जीवन जीना चाहिए। आप समृद्ध तभी हो सकेंगे, जब महिलाओं को प्रसन्न रखेंगे, क्योंकि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता वास करते हैं। महिलाओं को आप जो कुछ भी देते हैं, वे उसका कई गुना ज्यादा आपको वापस करती हैं, इसीलिए महिलाओं का हमेशा सम्मान करना चाहिए। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज फैकल्टी और ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज. एफओईसीएस की ओर से आयोजित विश्व महिला दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। इससे पूर्व माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके टीएमयू की एसोसिएट डीन डॅा मंजुला जैन, ज्वांइट रजिस्ट्रार डॉ वैशाली ढींगरा, एफओईसीएस के निदेशक प्रो राकेश कुमार द्विवेदी और कॉलेज की वुमेन इम्पॉवरमेंट सेल की कोऑर्डिनेटर  रंजना शर्मा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर  प्रियंका द्विवेदी और  निधि सक्सेना की भी गरिमामयी मौजूदगी रही। सभी अतिथियों का बुके देकर स्वागत किया गया।

बतौर अतिथि ज्वाइंट रजिस्ट्रार डॉ वैशाली ढींगरा ने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को अति आवश्यक बताते हुए कहा, हम सभी को इसके प्रति संजीदा होने की दरकार है। उन्होंने महिलाओं को अपने आत्म सम्मान और सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया। एफओईसीएस के निदेशक प्रो राकेश कुमार द्विवेदी बोले, महिलाएं शक्ति और धैर्य का प्रतीक हैं। वे परिवारए समाज और देश में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इनसाइड पीसफुल इज आउटसाइड यूजफुल की बात करते हुए बोले, महिलाएं अंदर से शांत होती हैं तभी वह बाहर से कारगर होती हैं और उनकी कार्य क्षमता अद्भुत होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को भी लोग माँ सीता जी की वजह से ही जानते हैं। ऐसे में हमें महिलाओं का हमेशा सम्मान करना चाहिए।  प्रियांक सिंघल, डॉ पराग अग्रवाल,  हरजिंदर सिंह,  राघवेंद्र सिंह और  अंकित शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।

वर्ल्ड वुमेन डे पर रंगोली और नृत्य सरीखी प्रतियोगिताएं हुईं, जिनमें छात्राओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। बीएससी एनीमेशन फाइनल ईयर की अर्चना की टीम रंगोली में विजेता रही। बीसीए फाइनल ईयर की वंशिका चैाहान ने हो री चिरईया, नन्ही.सी चिड़िया गीत पर नृत्य कर प्रथम स्थान प्राप्त किया और बीसीए सेकेंड ईयर की गार्गी ने कारी.कारी रैना गीत पर नृत्य कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर कॉलेज की वुमेन इम्पॉवरमेंट सेल की कोऑर्डिनेटर  रंजना शर्मा, डॅा मेघा शर्मा, डॉ कीर्ति शुक्ला,  अनु शर्मा,  शिखा गंभीर, मिस हिना हाशमी, मिस रूहेला नाज, मिस हुमैरा अकील, मिस मेघा जैन के अलावा डॉ अशेंद्र कुमार सक्सेना, डॉ शम्भू भारद्वाज आदि मौजूद रहे। संचालन बीएससी एनीमेशन सेकेंड ईयर के अपूर्व मित्तल ने किया।

 

 

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