नर्सेस करें डिलीवरी के वक्त मानकों का सख्ती से पालन

ताकि जन्म के समय कोई भी नवजात शिशु न हो चोटिल

@ chaltefirte.com                    मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के बाल चिकित्सा नर्सिंग विभाग की ओर से आयोजित गेस्ट लेक्चर में एम्स, जोधपुर के डॉ. रघु वी.ए. ने जन्मजात की चोटों पर चर्चा करते हुए कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं को सामान्य और सिजेरियन प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं के बारे में गहनता से बताया। डॉ. रघु बोले, आंकड़ों के अनुमान के मुताबिक देशभर में प्रति हजार डिलीवरी पर जन्मजात बच्चों में सात को बर्थ इंजुरीज पाई जाती हैं। गर्भावस्था के दौरान प्राइमीप्यारा, छोटे कद वाली माता, मातृ श्रेणी विसंगतियों, असामान्य प्रसव, गर्भाशय में पानी की कमी, भ्रूण की व्यवस्था, वैक्यूम डिलीवरी के उपयोग के चलते इंजुरीज का खतरा रहता है। सरस्वती वंदना के साथ गेस्ट लेक्चर का श्रीगणेश हुआ।

डॉ. रघु ने बताया, प्रसव के समय की जाने वाली एपिसियोटाेमी के दौरान सावधानी बरतें। नर्सिंग के मानकों का सख्ती से पालन करें । बोले, सही तरीके से निगरानी रखना और मूल्यांकन करना अवश्य है। डिलीवरी के समय यदि किसी बच्चे को चोट आती है तो नर्सिंग स्टाफ को रोग निरोधी एंटीबायोटिक और लक्षणात्मक इलाज के साथ उचित शारीरिक एलाइनमेंट बनाए रखना जरुरी है। उन्होंने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, कानूनी लड़ाई से बचने के लिए पुख्ता प्रबंधन होने चाहिए। ऐसे केसों में सबसे महत्वपूर्ण यह है, डिलीवरी के वक्त माता-पिता से लिखित में सहमति ले लेनी चाहिए। गेस्ट लेक्चर में कॉलेज प्राचार्य प्रो. श्रीनाथ के कुलकर्णी, वाइस प्रिंसिपल  जैसलीन एम,  महानतेस दासियाल, निशा वर्गीस, शिवानी नेगी के अलावा एमएससी, बीएससी नर्सिंग, पीबी, बीएसी नर्सिंग, जीएनएम के करीब 250 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन चाइल्ड हेल्थ नर्सिंग विभाग के एचओडी  बसवराज मुधोल ने किया।

 

 

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